13 सितंबर 2026
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रूस का सुखोई इंजन ऑफर भारतीय वायुसेना के लिए गेमचेंजर, चीन पर भरोसे में सावधानी ज़रूरी: ब्रिगेडियर महाजन

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रूस का सुखोई इंजन ऑफर भारतीय वायुसेना के लिए गेमचेंजर, चीन पर भरोसे में सावधानी ज़रूरी: ब्रिगेडियर महाजन

सारांश

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस का सुखोई इंजन ऑफर भारतीय वायुसेना की रणनीतिक पहुँच को तिब्बत तक बढ़ा सकता है — और यह मौजूदा इंजनों से 7% सस्ता भी है। लेकिन रक्षा विशेषज्ञ महाजन की चेतावनी है: शी जिनपिंग के दौरे से उत्साहित होने से पहले ज़मीनी हकीकत देखें।

मुख्य बातें

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत को सुखोई विमानों के लिए नए उन्नत इंजन की पेशकश की।
नया इंजन मौजूदा इंजनों से 7 प्रतिशत सस्ता है; रूस ने तकनीक हस्तांतरण पर भी सहमति जताई।
सुखोई भारतीय वायुसेना के कुल लड़ाकू बेड़े का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है; उन्नत इंजन से तिब्बत तक परिचालन पहुँच संभव।
रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (से.नि.) हेमंत महाजन ने शी जिनपिंग के दौरे पर सतर्कता बरतने की सलाह दी — सीमा विवाद हल किए बिना संबंध सुधार संभव नहीं।
चीन से भारत का आयात 100 अरब डॉलर से अधिक, जबकि भारत का निर्यात महज़ 20 अरब डॉलर — महाजन ने इसे असंतुलित और अस्वस्थ बताया।
चीन पर रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर प्रतिबंध , पाकिस्तान को समर्थन और संयुक्त राष्ट्र में भारत-विरोध को लेकर महाजन ने गंभीर चिंताएँ जताईं।

रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) हेमंत महाजन ने 12 सितंबर 2026 को कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा प्रस्तुत सुखोई विमानों के नए इंजन की पेशकश भारतीय वायुसेना के लिए अत्यंत लाभकारी सौदा है। साथ ही उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर सतर्क और 'ज़मीनी नतीजों पर आधारित' रुख अपनाने की सलाह दी।

सुखोई इंजन ऑफर: क्या है पेशकश

महाजन के अनुसार, रूस ने सुखोई विमानों के लिए अधिक शक्तिशाली नए इंजन की पेशकश की है, जो मौजूदा इंजनों की तुलना में 7 प्रतिशत सस्ते हैं। उन्होंने बताया कि सुखोई भारतीय वायुसेना के कुल लड़ाकू बेड़े का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है और इसे सबसे आधुनिक विमानों में गिना जाता है।

महाजन ने कहा, 'रूस की यह पेशकश सुखोई के लिए ज़्यादा ताकतवर इंजन की है, जो मौजूदा इंजनों की तुलना में 7 प्रतिशत सस्ता भी है और इससे सुखोई विमान की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस ने तकनीक हस्तांतरण पर भी सहमति जताई है और कीमत अमेरिकी विमानों के मुकाबले काफी कम है।

रणनीतिक महत्व: तिब्बत से तटीय क्षेत्र तक

महाजन ने रेखांकित किया कि फिलहाल सुखोई विमान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात हैं। उन्नत इंजन लगने के बाद ये विमान पूरे तिब्बत क्षेत्र तक पहुँच सकेंगे। उनके अनुसार, यह अपग्रेड अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम जैसे पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ देश के पूर्वी और पश्चिमी तटीय समुद्री क्षेत्रों तथा रेगिस्तानी इलाकों में भी कारगर साबित होगा।

गौरतलब है कि भारत-चीन सीमा तनाव के बाद से पूर्वी लद्दाख जैसे उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से प्राथमिकता बन चुकी है। ऐसे में यह पेशकश ऐसे समय में आई है जब भारत अपनी वायुशक्ति को व्यापक रूप से आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

शी जिनपिंग के दौरे पर सतर्कता की सलाह

चीनी राष्ट्रपति के भारत दौरे पर महाजन ने कहा कि वे एक रणनीतिक विश्लेषक के तौर पर इस यात्रा को लेकर सतर्क रहेंगे और ज़मीनी स्तर पर ठोस कदम उठने के बाद ही भरोसा करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों में सबसे अहम मुद्दा सीमा विवाद है और जब तक यह हल नहीं होता, तब तक संबंध नहीं सुधर सकते, क्योंकि चीन 'स्लाइसिंग' यानी धीरे-धीरे जमीन हथियाने की नीति अपनाता है।

आर्थिक असंतुलन का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि चीन से भारत का आयात 100 अरब डॉलर से अधिक है, जबकि भारत का चीन को निर्यात महज़ 20 अरब डॉलर के आसपास है। उन्होंने कहा कि यह असंतुलन स्वस्थ आर्थिक साझेदारी की नींव नहीं हो सकता।

आपूर्ति श्रृंखला और अन्य विवाद

महाजन ने यह भी बताया कि चीन भारत के खिलाफ 'सप्लाई चेन वॉरफेयर' की रणनीति अपना रहा है — जिसमें दुर्लभ खनिज तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) पर प्रतिबंध, उर्वरकों और बोरिंग मशीनों की अपर्याप्त आपूर्ति, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों में अड़चनें तथा भारतीय कारोबारियों को वीज़ा देने में दिक्कतें शामिल हैं।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि चीन लगातार पाकिस्तान की सैन्य और कूटनीतिक मदद करता आ रहा है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का विरोध करता है। उनके अनुसार, इन सभी मुद्दों पर ठोस बदलाव के बिना संबंध सुधार की बात केवल कागज़ी रहेगी।

आगे की राह

महाजन का मानना है कि रूस के साथ सुखोई इंजन सौदे को आगे बढ़ाना भारत के हित में है, बशर्ते तकनीक हस्तांतरण की शर्तें संतोषजनक हों। चीन के साथ संबंधों में सुधार के लिए उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा विवाद का समाधान, व्यापार संतुलन, आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता और पाकिस्तान को समर्थन बंद करना — ये सभी शर्तें पूरी होनी चाहिए। भारत की रक्षा और कूटनीतिक नीति का अगला कदम इन्हीं बिंदुओं पर टिका होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तकनीक हस्तांतरण और वायुसेना के आधे बेड़े को तत्काल बढ़त — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत रूस पर रणनीतिक निर्भरता और घरेलू इंजन विकास की दिशा में संतुलन बना पाएगा। महाजन की चीन-संबंधी चेतावनी वाजिब है: शिखर-स्तरीय मुलाकातें अक्सर संरचनात्मक खामियों को ढँक देती हैं, और 100 अरब डॉलर बनाम 20 अरब डॉलर का व्यापार असंतुलन कूटनीतिक गर्मजोशी से नहीं मिटता। मुख्यधारा की कवरेज ब्रिक्स की प्रतीकात्मकता पर केंद्रित रहती है, जबकि रेयर अर्थ प्रतिबंध और सप्लाई चेन वॉरफेयर जैसे ठोस दबाव-बिंदु नेपथ्य में रहते हैं — और यही वे बिंदु हैं जो भारत की दीर्घकालिक आर्थिक संप्रभुता को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूस का सुखोई इंजन ऑफर भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
रूस ने सुखोई विमानों के लिए नए और अधिक शक्तिशाली इंजन की पेशकश की है जो मौजूदा इंजनों से 7 प्रतिशत सस्ते हैं। चूँकि सुखोई भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है, यह अपग्रेड वायुसेना की परिचालन क्षमता में बड़ा इज़ाफा कर सकता है।
उन्नत सुखोई इंजन से भारत को रणनीतिक रूप से क्या फ़ायदा होगा?
रक्षा विशेषज्ञ हेमंत महाजन के अनुसार, अधिक शक्तिशाली इंजन लगने से सुखोई पूरे तिब्बत क्षेत्र तक पहुँच सकेगा। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम जैसे पहाड़ी क्षेत्रों के अलावा पूर्वी-पश्चिमी तट और रेगिस्तानी इलाकों में भी इसकी उपयोगिता बढ़ेगी।
ब्रिगेडियर हेमंत महाजन ने शी जिनपिंग के दौरे पर सतर्कता क्यों बरतने को कहा?
महाजन का कहना है कि जब तक सीमा विवाद हल नहीं होता, व्यापार असंतुलन कम नहीं होता और चीन पाकिस्तान को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक संबंध सुधार केवल कागज़ी रहेगा। उन्होंने ज़मीनी ठोस कदमों के बाद ही भरोसा करने की बात कही।
भारत-चीन व्यापार में असंतुलन कितना बड़ा है?
चीन से भारत का आयात 100 अरब डॉलर से अधिक है, जबकि भारत का चीन को निर्यात महज़ 20 अरब डॉलर के आसपास है। महाजन के अनुसार, यह भारी असंतुलन स्वस्थ आर्थिक साझेदारी की बुनियाद नहीं हो सकता।
चीन की 'सप्लाई चेन वॉरफेयर' रणनीति क्या है?
महाजन के अनुसार, चीन भारत को ज़रूरी वस्तुओं की आपूर्ति रोककर दबाव बनाता है — जिसमें रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर प्रतिबंध, उर्वरक व बोरिंग मशीनों की अपर्याप्त आपूर्ति और भारतीय कारोबारियों को वीज़ा देने में अड़चनें शामिल हैं। यह रणनीति भारत की आर्थिक संप्रभुता को कमज़ोर करने का प्रयास है।
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