ब्रिक्स एनएसए बैठक: अजीत डोभाल ने शोइगु और वांग यी से की अहम मुलाकात, भारत-रूस-चीन संबंधों पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मंगलवार, 23 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स एनएसए बैठक के दौरान रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु से द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक में भारत-रूस विशेष एवं रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बैठक की जानकारी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की।
डोभाल-शोइगु वार्ता: मुख्य घटनाक्रम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों पक्षों ने ब्रिक्स के तहत चल रहे आपसी सहयोग पर विस्तृत चर्चा की, जिसमें रूस की ओर से दिए गए कुछ प्रस्ताव भी शामिल थे। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे सहयोग की प्रगति की भी समीक्षा की गई। यह समीक्षा भारत-रूस के बीच की विशेष और रणनीतिक साझेदारी के व्यापक ढाँचे में की गई।
डोभाल-वांग यी मुलाकात: भारत-चीन संबंधों में प्रगति
इसी बैठक के दौरान एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच भी महत्वपूर्ण वार्ता हुई। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में हाल की प्रगति पर चर्चा की और माना कि संबंध धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री, भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग और दोनों पक्षों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
वांग यी का संदेश: वैश्विक दृष्टिकोण से रिश्ते देखें
राजदूत शू फेइहोंग द्वारा एक्स पर जारी बयान के अनुसार, वांग यी ने कहा कि भारत और चीन — दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले दो देश — अपने रिश्तों को केवल द्विपक्षीय नज़रिए से नहीं, बल्कि वैश्विक दृष्टिकोण से भी देखें। उन्होंने ज़ोर दिया कि दोनों देशों को अपने नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को ज़मीन पर लागू करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, आपसी सहयोग के ज़रिए विकास को गति देनी चाहिए और ग्लोबल साउथ के आधुनिकीकरण को तेज करना चाहिए।
ब्रिक्स अध्यक्षता पर चीन का समर्थन
बैठक के दौरान वांग यी ने ब्रिक्स की रोटेटिंग अध्यक्षता की जिम्मेदारी निभाने में भारत का समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन, ब्रिक्स समूह के विकास और विस्तार को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत-चीन सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के संबंध सामान्यीकरण की प्रक्रिया में हैं।
आगे क्या होगा
इस बहुपक्षीय कूटनीतिक संवाद से स्पष्ट है कि भारत ब्रिक्स मंच पर अपनी केंद्रीय भूमिका को और सक्रिय रूप से निभाने की दिशा में अग्रसर है। भारत-रूस और भारत-चीन, दोनों द्विपक्षीय धाराओं में एक साथ प्रगति का यह प्रयास भारत की बहु-संरेखण (multi-alignment) विदेश नीति का व्यावहारिक प्रतिबिंब है।