एनएसए अजीत डोभाल ने बीजिंग में चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग से की मुलाकात, सीमा शांति पर 25वें दौर की वार्ता से पहले बड़ी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की और सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता को मज़बूत करने तथा आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय मंचों पर द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। यह बैठक भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के 25वें दौर से ठीक पहले हुई, जो इसे कूटनीतिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।
यात्रा का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
भारत-चीन सीमा मुद्दे पर भारत के विशेष प्रतिनिधि के रूप में अजीत डोभाल सोमवार, 24 अगस्त को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुँचे। यह यात्रा चीन के विदेश मंत्री और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो सदस्य वांग यी के निमंत्रण पर हुई। गौरतलब है कि पिछले वर्ष अगस्त में आयोजित 24वीं बैठक में दोनों पक्षों के बीच सीमा मुद्दे पर खुलकर और विस्तार से चर्चा हुई थी तथा कई सहमतियाँ बनी थीं।
भारतीय दूतावास की आधिकारिक पुष्टि
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस बैठक की पुष्टि की। दूतावास ने लिखा, '25 अगस्त को भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति महामहिम हान झेंग से मुलाकात की। विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के 25वें दौर से पहले, एनएसए डोभाल और उपराष्ट्रपति हान ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को मज़बूत करने तथा दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुसार आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय मंचों पर द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की।'
चीन का रुख और पिछली सहमतियाँ
इससे पहले सोमवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा था कि दोनों देश अपने नेताओं के बीच बनी सहमति की भावना के अनुरूप सीमा मुद्दे पर गहन बातचीत जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चीन-भारत सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की बैठक दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता का मुख्य माध्यम है और आपसी चिंताओं वाले मुद्दों पर संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच भी। लिन जियान ने कहा कि इस बैठक में दोनों पक्ष सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों तथा अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
भारत का स्थायी रुख
भारत लगातार यह कहता रहा है कि सीमा क्षेत्रों की स्थिति का सीधा असर भारत-चीन के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है। इस महीने की शुरुआत में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, 'भारत और चीन के सीमा क्षेत्रों से जुड़े मामलों पर हमने हमेशा चीनी पक्ष के साथ चर्चा में ज़ोर दिया है कि हम इन मुद्दों को बेहद गंभीरता से देखते हैं और इन क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।' इससे पहले 6 अगस्त को भारत-चीन सीमा मामलों पर कार्य तंत्र (WMCC) की 36वीं बैठक में भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास की स्थिति की समीक्षा की गई थी।
आगे क्या होगा
डोभाल और वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता का 25वाँ दौर मंगलवार को ही निर्धारित था, जो दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश गलवान घाटी संघर्ष के बाद से धीरे-धीरे राजनयिक और सैन्य संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं।