एनएसए अजीत डोभाल बीजिंग पहुंचे, भारत-चीन सीमा वार्ता के 25वें दौर में वांग यी से करेंगे बातचीत
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सोमवार, 24 अगस्त 2026 को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंचे, जहाँ वे भारत-चीन सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के 25वें दौर में भाग लेंगे। यह यात्रा चीन के विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर हो रही है, जो भारत-चीन सीमा मामले में चीन के विशेष प्रतिनिधि भी हैं।
वार्ता का एजेंडा और मुख्य बिंदु
विदेश मंत्रालय के अनुसार, डोभाल और वांग यी मंगलवार को औपचारिक वार्ता करेंगे, जिसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिरता, सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन और द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास पर चर्चा होगी। अपनी इस यात्रा के दौरान डोभाल चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात करेंगे, जो इस दौरे को कूटनीतिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।
पिछली बैठकों की पृष्ठभूमि
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब 6 अगस्त को नई दिल्ली में भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए बने कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 36वीं बैठक आयोजित हुई थी। उस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने किया था, जबकि चीनी पक्ष का प्रतिनिधित्व चीन के विदेश मंत्रालय के सीमा और समुद्री मामलों के विभाग की महानिदेशक होउ यानकी ने किया था।
विदेश मंत्रालय ने उस बैठक के बाद जारी बयान में कहा था, 'दोनों पक्षों के बीच खुलकर चर्चा हुई और वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति की समीक्षा की गई। यह भी दोहराया गया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है।'
संवाद तंत्र और सहमति के बिंदु
डब्ल्यूएमसीसी बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों ने सहमति जताई कि वे लंबित मुद्दों को सुलझाने और एलएसी पर किसी भी गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य संवाद के रास्तों का उपयोग जारी रखेंगे। इनमें डब्ल्यूएमसीसी, स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकें और पहले से तय अन्य तंत्र शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने 24वें विशेष प्रतिनिधि वार्ता दौर के नतीजों के बाद सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, तंत्र निर्माण और सीमा पार सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया था।
नदी जल और तकनीकी सहयोग पर भारत का जोर
भारतीय पक्ष ने सीमा पार बहने वाली नदियों से जुड़े 'एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म' की अगली बैठक जल्द बुलाने की आवश्यकता दोहराई। साथ ही, भारत ने ऊपरी क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं से संबंधित तकनीकी जानकारी साझा करने के महत्व पर भी बल दिया — यह एक ऐसा मुद्दा है जो ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों पर चीनी बाँध परियोजनाओं के संदर्भ में भारत के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक चिंता का विषय रहा है।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह वार्ता का 25वाँ दौर है, जो दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता की यह प्रक्रिया वर्षों से जारी है। बीजिंग में होने वाली यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में एक और कदम मानी जा रही है। डोभाल की यह यात्रा भारत-चीन के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संपर्क को पुनर्जीवित करने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है।