ब्रिक्स एनएसए बैठक: अजित डोभाल ने इथियोपिया के मिलियन लेमा टैडेसे से की मुलाकात, भारत-इथियोपिया रणनीतिक साझेदारी पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने सोमवार, 22 जून को नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) बैठक के दौरान इथियोपिया की राष्ट्रीय खुफिया और सुरक्षा सेवा (एनआईएसएस) के विश्लेषण विभाग के कार्यकारी निदेशक मिलियन लेमा टैडेसे से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने भारत-इथियोपिया रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ एवं गहरा बनाने के लिए सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के अनेक पहलुओं पर चर्चा हुई। इस बैठक में सीमा-पार आतंकवाद, पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति, उभरते भू-राजनीतिक संकट और ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने जैसे अहम मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान होने की उम्मीद जताई गई।
बैठक का व्यापक स्वरूप
डोभाल की अध्यक्षता में हो रही इस उच्चस्तरीय बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु और ईरान के सुरक्षा प्रतिनिधि नेजामी सहित कई देशों के वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक की केंद्रीय थीम 'आज दुनिया के सामने मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियाँ' रखी गई है, जिस पर सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि अपने-अपने दृष्टिकोण साझा करेंगे।
भारत की ब्रिक्स रणनीति और इस बैठक का महत्व
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत ब्रिक्स मंच पर वैश्विक शासन, सुरक्षा सहयोग और तकनीकी चुनौतियों पर अपनी भूमिका को और सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है। गौरतलब है कि ब्रिक्स समूह अब केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा — रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ भी इसके एजेंडे का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। हाल के ईरान-संबंधित घटनाक्रमों और क्षेत्रीय तनावों के बीच यह बैठक विशेष महत्व रखती है।
सितंबर शिखर सम्मेलन की तैयारी
इस एनएसए बैठक को सितंबर 2026 में भारत में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि ईरान जनवरी 2024 से ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य है और हाल के वर्षों में समूह के भीतर उसकी सक्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। नई दिल्ली में आयोजित यह सुरक्षा बैठक सदस्य देशों के बीच रणनीतिक समन्वय को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।