13 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद शी जिनपिंग भारत से रवाना, मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता में साझेदारी पर जोर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद शी जिनपिंग भारत से रवाना, मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता में साझेदारी पर जोर

सारांश

सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग ने ब्रिक्स मंच का इस्तेमाल भारत-चीन संबंधों को नई दिशा देने के लिए किया — 'साझेदार, प्रतिद्वंद्वी नहीं' का संदेश देते हुए। गलवान के बाद जमी बर्फ पिघलती दिख रही है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है।

मुख्य बातें

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद 13 सितंबर 2026 को भारत से रवाना हुए।
यह सात वर्षों में शी की पहली भारत यात्रा थी; इस दौरान PM मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी हुई।
शी ने कहा कि भारत और चीन साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं ; सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने पर सहमति।
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो वर्षों में दोनों नेता दो बार मिल चुके हैं और द्विपक्षीय व्यापार नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा।
शी ने चार सुझाव दिए: संतुलित रणनीतिक समझ, साझा सहयोग, सीमा-विवाद समाधान, और ब्रिक्स/UN/SCO/G-20 पर बहुपक्षीय सहयोग।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद 13 सितंबर 2026 को भारत से स्वदेश रवाना हो गए। शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन आउटरीच बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन सुनने के बाद उन्होंने अन्य नेताओं के साथ फैमिली फोटो भी खिंचवाई। सात वर्षों के अंतराल के बाद भारत की यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

द्विपक्षीय बैठक: साझेदारी का संदेश

शिखर सम्मेलन के इतर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में शी जिनपिंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं। दोनों नेताओं ने सीमा विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने और सीमा पर स्थिरता बनाए रखने की अपील की।

चीनी विदेश मंत्रालय का बयान

चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, पिछले दो वर्षों में शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी दो बार मुलाकात कर चुके हैं, जिन्होंने दोनों देशों के संबंधों को पुनः पटरी पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच संस्थागत स्तर पर संवाद धीरे-धीरे फिर से शुरू हुआ है और द्विपक्षीय व्यापार नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है।

बयान में यह भी रेखांकित किया गया कि दोनों देशों की परिस्थितियाँ भले ही अलग-अलग हों, लेकिन वे एक-दूसरे की ताकतों से सीख सकते हैं और साझा सफलता की दिशा में मिलकर आगे बढ़ सकते हैं।

शी जिनपिंग के चार प्रमुख सुझाव

चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति शी ने भारत-चीन संबंधों के दीर्घकालिक और स्थिर विकास के लिए चार प्रमुख सुझाव रखे।

पहला, दोनों देशों को वस्तुनिष्ठ और संतुलित रणनीतिक समझ के साथ आगे बढ़ना चाहिए — भारत और चीन साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं, और एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर हैं, खतरा नहीं। दूसरा, सहयोग और साझेदारी के ज़रिए साझा सफलता हासिल की जानी चाहिए। तीसरा, आपसी सम्मान के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों और सीमा से जुड़े मुद्दों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जाए और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखी जाए। चौथा, भारत और चीन को ब्रिक्स, संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और जी-20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए।

संबंधों का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद भारत-चीन संबंध गहरी तनाव में आ गए थे। उस समय के बाद से यह शी जिनपिंग की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। यह ऐसे समय में आई है जब दोनों देश सीमा पर गश्त व्यवस्था को लेकर समझौते पर पहुँचे हैं और व्यापार संबंध नए उच्च स्तर पर हैं। शी जिनपिंग ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की ज़रूरत पर भी बल दिया।

भारत-चीन के बीच यह नई कूटनीतिक सक्रियता आने वाले महीनों में दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रतिद्वंद्वी नहीं' का नारा सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन भारत के रणनीतिक हलकों में सवाल यह है कि क्या यह बदलाव चीन की आर्थिक सुस्ती और पश्चिम के साथ बढ़ते तनाव की प्रतिक्रिया है। द्विपक्षीय व्यापार के 'रिकॉर्ड स्तर' पर पहुँचने की बात बीजिंग करता है, लेकिन भारत के व्यापार घाटे की वास्तविकता इस आँकड़े को जटिल बनाती है। असली कसौटी यह होगी कि सीमा पर 'शांति और स्थिरता' के वादे सत्यापन-योग्य जमीनी बदलाव में तब्दील होते हैं या नहीं।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में क्यों आए थे?
शी जिनपिंग नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए थे। यह उनकी सात वर्षों में पहली भारत यात्रा थी, जिसके दौरान उन्होंने PM मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की।
मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक में क्या हुआ?
इस बैठक में शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं। दोनों नेताओं ने सीमा विवाद को सुलझाते हुए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील की।
शी जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों के लिए कौन-से चार सुझाव दिए?
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, शी ने चार सुझाव दिए: संतुलित रणनीतिक समझ विकसित करना, सहयोग से साझा सफलता पाना, आपसी सम्मान से बाधाएँ दूर करना, और ब्रिक्स व UN जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाना।
भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार की स्थिति क्या है?
चीनी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। दोनों देशों के बीच संस्थागत स्तर पर संवाद भी धीरे-धीरे फिर से शुरू हुआ है।
शी जिनपिंग की यह भारत यात्रा कितने समय बाद हुई?
शी जिनपिंग लगभग सात वर्षों के अंतराल के बाद भारत आए। 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद से दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहे थे, और यह उनकी उस दौरान भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 13 घंटे पहले
  2. 13 घंटे पहले
  3. 17 घंटे पहले
  4. 1 साल पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले