13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में UN महासचिव गुटेरेस की शांति अपील — गाजा, यूक्रेन, सूडान का जिक्र

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में UN महासचिव गुटेरेस की शांति अपील — गाजा, यूक्रेन, सूडान का जिक्र

सारांश

ब्रिक्स मंच पर UN महासचिव गुटेरेस ने गाजा, यूक्रेन और सूडान का नाम लेकर शांति की अपील की — और ईरान, UAE, सऊदी अरब तीनों एक ही घोषणा-पत्र पर सहमत हो गए। यह कूटनीतिक समीकरण असाधारण है, पर असली सवाल यह है कि क्या यह सहमति कागज से जमीन तक उतरेगी।

मुख्य बातें

UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 13 सितंबर 2026 को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में गाजा, यूक्रेन, सूडान समेत सभी संघर्ष क्षेत्रों में शांति की अपील की।
गुटेरेस ने कहा कि ग्लोबल साउथ इन संघर्षों की सबसे बड़ी कीमत चुका रहा है और समावेशी विकास के लिए शांति अनिवार्य है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन , अबू धाबी के क्राउन प्रिंस , सऊदी विदेश मंत्री और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सभी एक ही सम्मेलन में उपस्थित थे।
11 सदस्यीय ब्रिक्स घोषणा-पत्र में गाजा युद्धविराम, फिलिस्तीनियों के अधिकार और मध्य पूर्व में संयम की अपील शामिल।
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की 20% पेट्रोलियम और गैस आपूर्ति होती है, जो फरवरी के हमलों के बाद से बाधित रही है।
PM नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित सम्मेलन विषय — लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास — की गुटेरेस ने सराहना की।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के सक्रिय संघर्षों को तत्काल रोकने की अपील की, यह रेखांकित करते हुए कि इन युद्धों का सबसे गहरा असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहा है। 13 सितंबर 2026 को आयोजित इस सम्मेलन में उन्होंने कहा कि समावेशी वैश्विक विकास का रास्ता शांति से ही होकर जाता है।

गुटेरेस के मुख्य बयान

गुटेरेस ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, 'गाजा से लेकर पूरे मध्य पूर्व, यूक्रेन, सूडान और अन्य संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों तक — दुनिया को शांति की जरूरत है।' उन्होंने सभी देशों से संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियाँ निभाने का आग्रह किया।

इन जिम्मेदारियों में उन्होंने गिनाया — अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर आवागमन की स्वतंत्रता, देशों की संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता, राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान, विवादों का शांतिपूर्ण समाधान तथा अंतरराष्ट्रीय मानवीय और मानवाधिकार कानूनों का पालन।

सम्मेलन में मौजूद प्रमुख नेता

इस सम्मेलन में पश्चिम एशिया के संघर्ष से जुड़े कई नेता एक साथ मौजूद थे। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ-साथ अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद भी उपस्थित थे।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी सम्मेलन में शामिल हुए। गौरतलब है कि रूस की ओर से यूक्रेन पर हमले के बाद वैश्विक स्तर पर खाद्यान्न और उर्वरक आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट उत्पन्न हुआ था।

होर्मुज स्ट्रेट संकट और वैश्विक ऊर्जा पर असर

फरवरी में इज़रायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए कथित हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली समुद्री आवाजाही प्रभावित हुई। यह मार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत पेट्रोलियम और गैस आपूर्ति का वाहक है। इस व्यवधान ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बढ़ाया और गुटेरेस की समुद्री स्वतंत्रता संबंधी टिप्पणी को विशेष प्रासंगिकता दी।

ब्रिक्स संयुक्त घोषणा-पत्र में शांति की प्रतिध्वनि

मध्य पूर्व और सूडान में शांति के लिए गुटेरेस की अपील शनिवार को अपनाए गए ब्रिक्स संयुक्त घोषणा-पत्र में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। इस 11 सदस्यीय घोषणा-पत्र में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई गई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने तथा हालात बिगाड़ने वाले कदमों से बचने की अपील की गई।

घोषणा-पत्र में गाजा के सभी पक्षों से युद्धविराम बनाए रखने का आह्वान किया गया। फिलिस्तीनियों के मौलिक और अविभाज्य अधिकारों की रक्षा का समर्थन किया गया और उन्हें उनके घरों से बेदखल किए जाने का विरोध किया गया। उल्लेखनीय है कि ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब के नेताओं ने भी इस घोषणा-पत्र का समर्थन किया, जो ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक एकजुटता का संकेत है।

PM मोदी के सम्मेलन विषय की सराहना

गुटेरेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तय किए गए सम्मेलन के विषय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'जैसा कि इस सम्मेलन का विषय सही तरीके से बताता है, हमें लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के आधार पर आगे बढ़ना होगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सभी लक्ष्य शांति के बिना संभव नहीं हैं।

यह सम्मेलन ऐसे समय में हुआ है जब एक ओर रूस-यूक्रेन युद्ध थमने के संकेत नहीं दे रहा, और दूसरी ओर मध्य पूर्व में तनाव नई ऊँचाइयों पर है। आने वाले हफ्तों में ब्रिक्स देशों की घोषणा-पत्र प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक कूटनीतिक कदमों में बदलने की परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

UAE और सऊदी अरब का एक साथ एक घोषणा-पत्र पर सहमत होना कूटनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय है, लेकिन इसे सफलता मानना जल्दबाजी होगी — क्योंकि ब्रिक्स घोषणा-पत्रों का इतिहास बड़े शब्दों और सीमित क्रियान्वयन का रहा है। गुटेरेस की समुद्री स्वतंत्रता संबंधी टिप्पणी सीधे होर्मुज संकट की ओर इशारा करती है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक गंभीर भेद्यता बनी हुई है। असली परीक्षण यह है कि क्या ब्रिक्स देश अपनी आंतरिक प्रतिस्पर्धाओं — खासकर रूस-यूक्रेन पर भिन्न रुख — को पार करके किसी ठोस शांति पहल में तब्दील कर पाते हैं। फिलहाल यह घोषणा-पत्र आकांक्षाओं का दस्तावेज है, कार्ययोजना का नहीं।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में गुटेरेस ने क्या अपील की?
UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 13 सितंबर 2026 को ब्रिक्स सम्मेलन में गाजा, मध्य पूर्व, यूक्रेन और सूडान में चल रहे संघर्षों को तत्काल रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि समावेशी वैश्विक विकास के लिए शांति सबसे जरूरी शर्त है और इन युद्धों की सबसे ज्यादा मार ग्लोबल साउथ पर पड़ रही है।
ब्रिक्स संयुक्त घोषणा-पत्र में क्या कहा गया?
11 सदस्यीय ब्रिक्स घोषणा-पत्र में मध्य पूर्व/पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई गई। इसमें गाजा में युद्धविराम बनाए रखने, फिलिस्तीनियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और उनके बेदखली के विरोध का समर्थन किया गया। ईरान, UAE और सऊदी अरब सभी ने इस घोषणा-पत्र पर सहमति जताई।
होर्मुज स्ट्रेट संकट का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर क्या असर पड़ा?
फरवरी में इज़रायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर कथित हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री आवाजाही प्रभावित हुई। चूँकि दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत पेट्रोलियम और गैस आपूर्ति इसी मार्ग से होती है, इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर सीधा दबाव पड़ा।
सम्मेलन में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल थे?
सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उपस्थित थे। पश्चिम एशिया के संघर्ष से जुड़े परस्पर विरोधी पक्षों का एक मंच पर होना इस सम्मेलन की कूटनीतिक विशेषता रही।
PM मोदी और ब्रिक्स सम्मेलन के विषय का इससे क्या संबंध है?
PM नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित सम्मेलन का विषय — लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास — था। गुटेरेस ने इस विषय की सराहना करते हुए कहा कि ये लक्ष्य शांति के बिना हासिल नहीं किए जा सकते, और इसीलिए शांति स्थापना को प्राथमिकता देना जरूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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