संयुक्त राष्ट्र का अमेरिका-ईरान से आग्रह: छह महीने के संघर्ष के बाद कूटनीतिक बातचीत फिर शुरू करें
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान से युद्ध के छह महीने पूरे होने पर कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया है। 29 अगस्त 2026 को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से जारी बयान में संगठन के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि इस संघर्ष का एकमात्र रास्ता कूटनीतिक समाधान है।
प्रवक्ता का बयान
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, "यह चल रहे संघर्ष के छह महीने पूरे होने का एक दुखद पड़ाव है। हम फिर से जोर देते हैं कि इसका एकमात्र समाधान कूटनीतिक समाधान है। और हम अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान दोनों से सार्थक बातचीत करने का आग्रह करते हैं।" दुजारिक ने यह भी बताया कि कतर, पाकिस्तान, मिस्र, सऊदी अरब और कुवैत की मध्यस्थता कोशिशों को संयुक्त राष्ट्र का पूरा समर्थन प्राप्त है और महासचिव इन देशों के संपर्क में बने हुए हैं।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इज़रायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इस संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य काफी हद तक अवरुद्ध हो गया, जिससे तेल और अन्य वस्तुओं की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। गौरतलब है कि 18 जून 2026 को दोनों देशों ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के लिए बातचीत होनी थी — लेकिन नए तनाव के कारण वह प्रक्रिया अनिश्चित हो गई।
मानवीय और आर्थिक संकट
दुजारिक ने बताया कि इस संघर्ष के विनाशकारी मानवीय और आर्थिक परिणाम महासचिव के लिए गहरी चिंता का विषय बने हुए हैं। इनमें खाद्य आपूर्ति पर वैश्विक आर्थिक प्रभाव, मानवीय सहायता सामग्री का न पहुँच पाना, उर्वरकों की सीमित उपलब्धता और ऊर्जा की कीमतों में तेज़ वृद्धि शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव झेल रही है।
व्यक्तिगत दूत की भूमिका
संयुक्त राष्ट्र ने इस संघर्ष के लिए महासचिव के व्यक्तिगत दूत जीन अर्नॉल्ट को नियुक्त किया है, जो दोनों पक्षों और मध्यस्थ देशों के साथ निरंतर संपर्क में हैं और एक स्थायी समाधान की दिशा में प्रयासरत हैं। आने वाले हफ्तों में इन कूटनीतिक प्रयासों की दिशा तय करेगी कि क्या दोनों देश बातचीत की मेज पर वापस लौटते हैं।