ईरान-अमेरिका युद्धविराम पालन पर जॉर्डन-संयुक्त राष्ट्र की बैठक, होर्मुज स्ट्रेट पर भी जोर
सारांश
मुख्य बातें
जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 27 जुलाई 2026 को अम्मान में मुलाकात कर पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। दोनों नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम के पूर्ण अनुपालन को सुनिश्चित करने तथा तनाव के मूल कारणों के समाधान के लिए व्यापक वार्ता फिर से शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में क्या हुआ
जॉर्डन सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, सफादी और गुटेरेस ने क्षेत्र में जारी खतरनाक तनाव के दुष्प्रभावों और स्थायी शांति एवं सुरक्षा बहाल करने के प्रयासों पर विचार-विमर्श किया। दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि युद्धविराम का पालन दोनों पक्षों की ओर से पूरी तरह होना चाहिए और तनाव कम करने के लिए बातचीत का रास्ता फिर से खोला जाना चाहिए।
बैठक में होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब इस जलमार्ग से गुजरने वाले वैश्विक तेल व्यापार पर तनाव का सीधा असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
गाजा संकट पर सफादी की मांग
बैठक में अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्रों की स्थिति पर भी विशेष चर्चा हुई। सफादी ने गाजा में मानवीय संकट को तत्काल समाप्त करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा योजना के सभी प्रावधानों को लागू करने और गाजा पट्टी में पर्याप्त मानवीय सहायता पहुँचाने में बाधा बन रही इजरायली पाबंदियों को हटाने की माँग की।
गौरतलब है कि जॉर्डन पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और गाजा में मानवीय सहायता पहुँचाने के प्रयासों में सक्रिय रहा है।
जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में ड्रोन घटना
इसी बीच, जॉर्डन ने 28 जुलाई को तड़के अपने हवाई क्षेत्र में घुसे एक ड्रोन को मार गिराने का दावा किया। सरकारी समाचार एजेंसी पेट्रा के अनुसार, ड्रोन को देश के पूर्वी रेगिस्तानी इलाके में निशाना बनाया गया।
इस घटना से कुछ समय पहले इजरायली सेना ने भी बताया था कि उसने जॉर्डन सीमा के निकट एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया, हालाँकि इजरायल का कहना है कि ड्रोन उसकी सीमा के भीतर प्रवेश नहीं कर पाया था। अब तक न जॉर्डन और न ही इजरायल ने यह स्पष्ट किया है कि ड्रोन किसने भेजा, वह कहाँ से आया और उसका संभावित लक्ष्य क्या था।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ती चिंताएँ
यह ड्रोन घटना ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही चरम पर है। आलोचकों का कहना है कि युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है और किसी भी छोटी घटना के बड़े टकराव में बदलने का खतरा है। यह घटना इस बात का संकेत है कि केवल युद्धविराम की घोषणा से टिकाऊ शांति नहीं आती — उसके लिए राजनयिक तंत्र को सक्रिय रखना होगा।
आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र की पहल और जॉर्डन की मध्यस्थ भूमिका पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।