19 जुलाई 2026
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ईरान-अमेरिका तनाव: जॉर्डन में 2 अमेरिकी सैनिक शहीद, ईरान ने समझौते की जिम्मेदारियाँ रोकीं

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ईरान-अमेरिका तनाव: जॉर्डन में 2 अमेरिकी सैनिक शहीद, ईरान ने समझौते की जिम्मेदारियाँ रोकीं

सारांश

ईरान-अमेरिका टकराव नए मोड़ पर है — जॉर्डन में 2 अमेरिकी सैनिक शहीद, IRGC ने हमले की जिम्मेदारी ली, और ईरान के उपविदेश मंत्री ने साफ कहा कि समझौता अब एकतरफा नहीं चलेगा। दोनों देशों के बीच बातचीत की कोई उम्मीद फिलहाल नहीं।

मुख्य बातें

ईरान के उपविदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने 19 जुलाई 2026 को कहा कि अमेरिका के वादे तोड़ने के बाद ईरान ने शांति समझौते की जिम्मेदारियाँ निभाना बंद किया।
17 जुलाई को जॉर्डन के अल-अजराक में ईरानी मिसाइल-ड्रोन हमले में 2 अमेरिकी सैनिक मारे गए, 1 लापता ।
IRGC ने हमले की जिम्मेदारी ली; दावा किया कि कई एयरक्राफ्ट नष्ट हुए।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जवाबी एयरस्ट्राइक शुरू किए, लक्ष्य — होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की क्षमता कम करना।
राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी; नई बातचीत के कोई संकेत नहीं।

ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपविदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने 19 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि ईरान ने अमेरिका के साथ हुए शांति समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियाँ निभाना बंद कर दिया है, क्योंकि वाशिंगटन ने पहले अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया। यह घोषणा ऐसे समय में आई जब जॉर्डन के अल-अजराक स्थित अमेरिकी सैन्य बेस पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में 2 अमेरिकी सैनिक मारे गए और 1 लापता है।

गरीबाबादी का बयान: समझौता टूटा, बचाव प्राथमिकता

सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए साक्षात्कार में गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताएँ व्यावहारिक रूप से तोड़ दी हैं या रद्द कर दी हैं। उन्होंने कहा, 'अभी हमारे सामने देश का मजबूती से बचाव करने की चुनौती है। इस बार भी, अमेरिकियों को पहले ही जवाब मिल चुका है कि इन आक्रामक कार्रवाइयों से कुछ नहीं होगा। अगर वे समझदार हैं, तो उन्हें दूसरे तरीके चुनने चाहिए।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी नई बातचीत की कोई संभावना नहीं है।

जॉर्डन में हमला और अमेरिकी सैनिकों की मौत

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि 17 जुलाई को जॉर्डन में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौरान 2 अमेरिकी सेवा सदस्य मारे गए, जबकि 1 सेवा सदस्य अभी लापता है। 4 अन्य सैनिकों को जॉर्डन के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिन्हें बाद में छुट्टी दे दी गई। कुछ अन्य को मामूली चोटें आईं और वे ड्यूटी पर लौट आए। सेंट्रल कमांड के अनुसार, मार्च के बाद ईरानी कार्रवाई में अमेरिकी सैनिक की यह पहली मौत है।

अमेरिका का जवाबी हमला और ईरान की प्रतिक्रिया

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने शनिवार शाम 6 बजे (अमेरिकी समयानुसार) कमांडर-इन-चीफ के आदेश पर ईरान के खिलाफ नए एयरस्ट्राइक शुरू किए। इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक जहाजरानी को खतरा पहुँचाने की ईरान की क्षमता को कम करना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की सेना को दंडित करना बताया गया। उधर, IRGC ने जॉर्डन के अल-अजराक में अमेरिकी बेस पर हमले की जिम्मेदारी ली और दावा किया कि हमले में कई एयरक्राफ्ट पूरी तरह नष्ट हो गए।

नेताओं की प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शहीद सैनिकों पर दुख जताते हुए कहा, 'हमें ऐसा होते देखना अच्छा नहीं लग रहा। हमारे देश की सेवा करते हुए वो शहीद हुए।' रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक्स पर लिखा, 'भगवान आपका भला करे, हीरो। उनकी कुर्बानी हमारे इरादे को और मजबूत करती है।' गौरतलब है कि अमेरिका ने पिछले हफ्ते भी ईरान के दक्षिणी प्रांतों में सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए थे।

आगे क्या होगा

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कई खाड़ी देशों और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है। दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है और किसी नई बातचीत के संकेत फिलहाल नहीं हैं। शहीद सैनिकों की पहचान उनके परिवारों को सूचित किए जाने के 24 घंटे बाद सार्वजनिक की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो तनाव-कम करने की पहल कौन करेगा? जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौत वाशिंगटन पर घरेलू दबाव बढ़ाएगी, जबकि ईरान की जवाबी कार्रवाई की भाषा बताती है कि तेहरान पीछे हटने के मूड में नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ता दबाव वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सीधा खतरा है — एक पहलू जो इस संघर्ष को द्विपक्षीय से बहुपक्षीय बना सकता है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने शांति समझौते की जिम्मेदारियाँ क्यों रोकीं?
ईरान के उपविदेश मंत्री काजम गरीबाबादी के अनुसार, अमेरिका ने समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताएँ व्यावहारिक रूप से तोड़ दी हैं या रद्द कर दी हैं। इसलिए ईरान ने भी अपनी जिम्मेदारियाँ निभाना बंद कर दिया है।
जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला कब और कैसे हुआ?
17 जुलाई 2026 को जॉर्डन के अल-अजराक स्थित अमेरिकी सैन्य बेस पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। इस हमले में 2 अमेरिकी सेवा सदस्य मारे गए और 1 लापता है; 4 अन्य को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
IRGC ने हमले में क्या दावा किया?
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन के अल-अजराक में अमेरिकी बेस पर हमले की जिम्मेदारी ली और दावा किया कि हमले में कई एयरक्राफ्ट पूरी तरह नष्ट हो गए। हमला मिसाइलों और ड्रोन दोनों से किया गया था।
अमेरिका ने ईरान पर जवाबी हमले क्यों किए?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, जवाबी एयरस्ट्राइक का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक जहाजरानी को खतरा पहुँचाने की ईरान की क्षमता को कम करना और जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने वाले IRGC को दंडित करना था। ये हमले कमांडर-इन-चीफ के आदेश पर शुरू किए गए।
क्या ईरान और अमेरिका के बीच नई बातचीत की संभावना है?
फिलहाल नहीं। गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि अभी बातचीत की कोई खबर नहीं है और ईरान का ध्यान देश के बचाव पर केंद्रित है। दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाइयाँ जारी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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