दक्षिणी ईरान में अमेरिकी हमला: मिसाइल साइट्स और बारूदी सुरंग बिछाने वाली नौकाएं तबाह, युद्धविराम खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोमवार, 26 मई 2026 को पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट्स और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली ईरानी नौकाओं पर आत्मरक्षा के तहत हमला किया। इस कार्रवाई ने पहले से ही नाज़ुक स्थिति में चल रहे युद्धविराम को और अस्थिर कर दिया है, जो 8 अप्रैल से लागू था।
हमले का विवरण और कारण
सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने बयान में कहा, 'अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए दक्षिणी ईरान में आत्मरक्षा के तहत कार्रवाई की गई। ईरानी बलों से खतरा था, इसलिए यह कदम उठाया गया।' उन्होंने स्पष्ट किया कि निशानों में मिसाइल लॉन्च साइट्स के साथ-साथ वे नौकाएं भी शामिल थीं जो खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही थीं। हॉकिन्स ने यह भी जोड़ा, 'सीजफायर के दौरान भी अमेरिकी सेंट्रल कमांड अपने सैनिकों की सुरक्षा कर रहा है और संयम बरत रहा है।'
नाकेबंदी और आर्थिक दबाव
गौरतलब है कि अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रही है, जबकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ज़रिए होने वाली खाड़ी की समुद्री आवाजाही पर अपना नियंत्रण बनाए रखा है। पिछले हफ्ते सेंट्रल कमांड ने बताया था कि इस नाकेबंदी के कारण 100 जहाजों का रास्ता बदलना पड़ा और 4 जहाज संचालन के अयोग्य हो गए।
सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, 'इस नाकेबंदी की वजह से ईरानी बंदरगाहों से होने वाला व्यापार पूरी तरह रुक गया है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।' यह ऐसे समय में आया है जब इस संघर्ष का असर वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति पर पहले से ही पड़ रहा है।
ट्रंप की चेतावनी और वार्ता की स्थिति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान समेत कई देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की अपील भी की।
ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा, 'या तो यह सबके लिए एक शानदार समझौता होगा, या फिर कोई समझौता नहीं होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हालात फिर से युद्ध और गोलीबारी तक पहुंच सकते हैं और इस बार लड़ाई पहले से ज्यादा बड़ी और खतरनाक होगी। लेकिन ऐसा कोई नहीं चाहता।' यह टिप्पणी उनकी उस पूर्व घोषणा के बाद आई, जिसमें उन्होंने ईरान और मध्य पूर्व व दक्षिण एशिया के देशों के बीच एक बड़े क्षेत्रीय समझौते के करीब होने का संकेत दिया था।
युद्धविराम पर असर और आगे की राह
यह हमला 8 अप्रैल से लागू युद्धविराम की नींव को और कमज़ोर करता है। विश्लेषकों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज — जिससे दुनिया का लगभग 20% तेल गुज़रता है — पर तनाव बने रहने से वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता जारी रह सकती है। दोनों पक्षों के बीच युद्ध समाप्ति के लिए वार्ता जारी है, लेकिन ताज़ा सैन्य कार्रवाई इन प्रयासों को और पेचीदा बना सकती है।