ईरान का आरोप: अमेरिका ने होर्मोजगन में सीजफायर तोड़ा, तेहरान ने दी कड़े जवाब की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी विदेश मंत्रालय ने 26 मई 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका पर सीजफायर नियमों के सीधे उल्लंघन का आरोप लगाया है। मंत्रालय के अनुसार, होर्मोजगन प्रांत में अमेरिकी सेना की आक्रामक कार्रवाई अमेरिकी शासन की 'दुर्भावना और वादाखिलाफी' का प्रमाण है। ईरान ने स्पष्ट किया कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने से नहीं हिचकेगा।
मुख्य घटनाक्रम
26 मई की सुबह अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट कथित तौर पर बारूदी सुरंग बिछा रही नौकाओं को निशाना बनाया। इसके अतिरिक्त बंदर अब्बास बंदरगाह के पास एक सरफेस-टू-एयर मिसाइल साइट पर भी हमला किया गया। सेंटकाम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों की सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा में की गई।
ईरान का पलटवार
ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, 'अमेरिकी सेना ने पिछले 48 घंटों में ईरानी व्यापारिक जहाजों के खिलाफ जो कार्रवाई की है, वह सीजफायर नियमों का सीधा उल्लंघन है।' बयान में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में जारी कूटनीतिक प्रक्रिया के समानांतर किए गए ये आक्रामक कदम अमेरिकी दुर्भावना को 'पूरी दुनिया के सामने उजागर करते हैं।' ईरान ने इन हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन करार दिया और कहा कि तेहरान इस कार्रवाई का 'मुकम्मल जवाब' देगा।
सेना की चेतावनी
हमलों के बाद ईरानी सेना के प्रवक्ता अबोलफजल शेखरची ने कहा कि अगर दोबारा हमला हुआ तो ईरान की प्रतिक्रिया 'पहले से कहीं ज्यादा बड़ी और कड़ी' होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगली बार जवाब केवल इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। यह बयान क्षेत्रीय तनाव को एक नई ऊँचाई पर ले जाता है।
कूटनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान-अमेरिका के बीच कूटनीतिक वार्ता जारी बताई जा रही है। ईरानी मंत्रालय के अनुसार, इससे यह साबित होता है कि ईरानी जनता का अमेरिका के प्रति 'गहरा अविश्वास पूरी तरह तर्कसंगत है।' यह बयान ईरानी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा किया।
क्या होगा आगे
दोनों पक्षों के कड़े बयानों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य — जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है — पर तनाव बढ़ने की आशंका है। विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली वार्ता प्रक्रिया इन घटनाओं के बाद और अधिक जटिल हो सकती है।