ईरानी विदेश मंत्री अराघची की अमेरिका को कड़ी चेतावनी: 'हर हमले का मुंहतोड़ जवाब देंगे, फारस की खाड़ी छोड़ो'
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 10 जून 2026 को अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान की शक्तिशाली सेनाएं किसी भी हमले या धमकी का निर्णायक जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह बयान उस घटनाक्रम के बाद आया जब अमेरिकी सेना ने 9 जून को ईरानी हवाई हमले में अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई की।
अराघची का एक्स पोस्ट: सीधी और कड़ी भाषा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में अराघची ने लिखा, 'युद्ध के मैदान में हार के बावजूद, अमेरिका ने हमारे संकल्प की परीक्षा लेने का फैसला किया है। हमारी शक्तिशाली सेनाएं किसी भी हमले या धमकी का मुंहतोड़ जवाब देंगी। अगर आप सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो हमारे इलाके से चले जाएं। फारस की खाड़ी का इतिहास घुसपैठ करने वाले बाहरी लोगों के बुरे अंजामों की कई कहानियों से भरा पड़ा है।'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि होर्मुज स्ट्रेट कोई अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र नहीं है, बल्कि यह ईरान और ओमान के बीच बंटा हुआ है और अमेरिकी तटों से हजारों मील दूर स्थित है।
ईरान की सैन्य सतर्कता पर जोर
अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान की सेनाएं देश के हवाई क्षेत्र, जमीन और जलक्षेत्र के किसी भी उल्लंघन के प्रति हमेशा सतर्क रहती हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी इलाके के आसपास तैनात विदेशी सेनाओं को 'मानवीय गलतियों, आम हादसों या दोनों तरफ से होने वाली फायरिंग में फंसने का खतरा हमेशा बना रहता है।' उनके अनुसार, इस खतरे को कम करने का सबसे कारगर उपाय यही है कि विदेशी सेनाएं इस इलाके से जल्द से जल्द हट जाएं।
अमेरिकी जवाबी हमले की पृष्ठभूमि
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, राष्ट्रपति के आदेश पर 9 जून को शाम पाँच बजे अमेरिकी पूर्वी समय (21:00 GMT) पर ईरान के खिलाफ हमले शुरू किए गए। CENTCOM के बयान में कहा गया कि यह कार्रवाई 'आत्मरक्षा' के तहत की गई और इसका कारण एक दिन पहले अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराया जाना था।
अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों ने सटीक निर्देशित हथियारों का इस्तेमाल करते हुए होर्मुज स्ट्रेट के निकट ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों और निगरानी रडार ठिकानों को निशाना बनाया।
कूटनीति का रास्ता खुला, लेकिन चेतावनी भी साफ
अराघची ने यह भी कहा कि ईरान कूटनीति की भाषा को प्राथमिकता देता है, लेकिन साथ ही जोड़ा कि 'जैसा हमारे बहादुर योद्धाओं ने दुनिया को दिखाया है, हम दूसरी भाषाएं बोलना भी जानते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब फारस की खाड़ी में तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला पर इसके असर की आशंका बढ़ रही है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियों पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।