ईरान के विदेश मंत्री अराघची: अमेरिका से युद्धविराम तभी, जब हमारी स्थिति मज़बूत होगी
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 20 जुलाई को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ चल रहा सशस्त्र संघर्ष तब तक नहीं थमेगा, जब तक ईरान को रणनीतिक बढ़त हासिल नहीं हो जाती। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने सोमवार को लगातार नौवीं रात ईरानी सैन्य ठिकानों पर बमबारी की।
मुख्य घटनाक्रम
सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए को दिए साक्षात्कार में अराघची ने कहा, 'बातचीत भी तभी होनी चाहिए, जब ईरान ऐसी स्थिति में हो जहाँ उसे लगे कि हालात उसके पक्ष में हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि जल्दबाजी में वार्ता करना उचित नहीं होगा।
अराघची के अनुसार किसी भी युद्ध का अंत दो तरीकों से होता है — पहला, किसी एक पक्ष की निर्णायक सैन्य जीत से; और दूसरा, दोनों पक्षों द्वारा बातचीत के ज़रिए समझौते पर पहुँचने से। उन्होंने जोर दिया कि संघर्ष में अपनी स्थिति सुदृढ़ किए बिना वार्ता की मेज़ पर बैठना ईरान के हित में नहीं।
अमेरिकी हमलों का विवरण
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार ताज़ा हमलों में ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च साइट्स और ड्रोन लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया गया। उत्तर-पश्चिमी ईरान की तबरीज़ मिसाइल फील्ड में आग लगने की खबर है, जिसे इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की एयरोस्पेस फोर्स संचालित करती है।
वहीं ईरान भी खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है।
अमेरिकी सैन्य हानि
सेंटकॉम ने पुष्टि की कि उत्तरी इराक में बिना फटे ईरानी ड्रोन को नष्ट करने के अभियान के दौरान एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य सैनिक घायल हुआ है और उसका उपचार जारी है। इस संघर्ष में अब तक कुल 17 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं।
ईरान की रणनीतिक सोच
अराघची ने कहा कि सरकार को निरंतर यह आकलन करते रहना चाहिए कि युद्ध जारी रखने से लाभ अधिक है या हानि, और यदि नुकसान बढ़ने लगे तो उसी के अनुसार निर्णय लेना होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ नुकसान के बावजूद इस युद्ध के बाद ईरान पहले से अधिक सशक्त वैश्विक खिलाड़ी बनकर उभरा है।
उन्होंने नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कहा कि लोगों की जान और देश के भविष्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता — हर निर्णय पूर्ण जानकारी और सटीक आकलन के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि यह संघर्ष अब नौ दिनों से अधिक समय से जारी है और कोई युद्धविराम का संकेत फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा। अराघची के बयान से स्पष्ट है कि तेहरान वार्ता के लिए तैयार नहीं है जब तक ज़मीनी हालात उसके अनुकूल नहीं हो जाते। पश्चिम एशिया में व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें इस संघर्ष के अगले मोड़ पर टिकी हैं।