अराघची: अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का अधिकार है आत्मरक्षा

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अराघची: अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का अधिकार है आत्मरक्षा

सारांश

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमले को आत्मरक्षा का अधिकार माना जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष उनकी इच्छा से नहीं, बल्कि अमेरिका और इजरायल द्वारा थोपे गए हैं। जानिए इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।

Key Takeaways

ईरान का अमेरिकी ठिकानों पर हमला आत्मरक्षा का हिस्सा है। अराघची ने युद्ध को अमेरिका और इजरायल द्वारा थोपे जाने वाला बताया। ट्रंप ने ईरान के माफीनामे पर तंज कसा है। ईरान को अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में सुधार की आवश्यकता है। क्षेत्रीय तनाव के बढ़ने की संभावना है।

तेहरान, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया है कि मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले को आत्मरक्षा का अधिकार मानते हैं। उनका कहना है कि यह युद्ध ईरान की इच्छा से नहीं, बल्कि अमेरिका और इजरायल ने उन पर थोप दिया है।

एनबीसी न्यूज के साथ बातचीत में अराघची ने कहा, “यह वह युद्ध नहीं है जिसे हमने चुना है। यह अमेरिका और इजराइल द्वारा हम पर थोपे गए संघर्ष का हिस्सा है।” उन्होंने इस संघर्ष को “बिना उकसावे के, अनुचित और अवैध” करार दिया।

ईरानी विदेश मंत्री का कहना है कि ईरान की जवाबी सैन्य कार्रवाई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लक्षित कर रही है।

अराघची ने एनबीसी के ‘मीट द प्रेस’ में कहा, “अमेरिकियों ने हमारे खिलाफ यह युद्ध शुरू किया है, उन पर हमला किया है, और हम अपनी रक्षा कर रहे हैं। हमारी मिसाइलें अमेरिका तक नहीं पहुँच सकतीं। इसलिए हम जो कर सकते हैं, वह कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “हम जो कर सकते हैं, वह है अपने आस-पास के अमेरिकी बेस और अमेरिकी ठिकानों पर हमला करना, जो दुर्भाग्यवश हमारे पड़ोसी देशों की ज़मीन पर हैं।”

यह टिप्पणी पेजेशकियान के बयान के एक दिन बाद आई है। शनिवार को स्टेट टेलीविजन पर राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने गल्फ देशों के प्रति अपने संबंधों का हवाला देते हुए कहा था कि वे तब तक हमला नहीं करेंगे जब तक उनकी ज़मीन का उपयोग ईरान को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाता।

इस बयान के तुरंत बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी तंज करते हुए कहा कि ऐसा उन्होंने यूएस-इजरायल के दबाव में किया है। ट्रंप ने लिखा, “ईरान अपने पड़ोसी देशों के सामने झुक गया है।”

ट्रंप के अनुसार, “यह वादा केवल यूएस और इजरायल के लगातार हमलों के कारण किया गया है। ईरान मध्य पूर्व पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन यह पहली बार है जब ईरान, हजारों सालों में, आस-पास के मिडिल ईस्ट देशों के सामने परास्त हुआ है।”

ट्रंप ने दावा किया है कि खाड़ी देशों ने ईरान के इस माफीनामे के बाद उन्हें धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने मिडिल ईस्ट में “थैंक यू प्रेसिडेंट ट्रंप” कहकर आभार व्यक्त किया।

ईरान अब “मिडिल ईस्ट को धमकाएगा” नहीं, बल्कि वे “मिडिल ईस्ट के लूजर” हैं, और कई दशकों तक ऐसे ही रहेंगे जब तक वे सरेंडर नहीं कर देते या पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाते!

Point of View

NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

अराघची ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले को क्यों सही ठहराया?
उन्होंने इसे आत्मरक्षा का अधिकार बताया और कहा कि यह युद्ध ईरान की इच्छा से नहीं, बल्कि अमेरिका और इजरायल ने उन पर थोप दिया है।
क्या ईरान की मिसाइलें अमेरिका तक पहुँच सकती हैं?
अराघची ने कहा कि उनकी मिसाइलें अमेरिका तक नहीं पहुँच सकतीं, इसलिए वे आस-पास के अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहे हैं।
ट्रंप ने ईरान के माफीनामे पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ट्रंप ने कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के सामने झुक गया है और यह माफीनामा यूएस और इजरायल के दबाव में दिया गया है।
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