अमेरिका-ईरान वार्ता जारी, अराघची बोले — अटकलों पर ध्यान न दें, बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान कायम
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 1 जून 2026 को स्पष्ट किया कि अमेरिका-ईरान वार्ता अभी भी जारी है और इस विषय में फैलाई जा रही तमाम अटकलें ध्यान देने योग्य नहीं हैं। ईरान के सरकारी टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच संवाद और संदेशों का आदान-प्रदान निर्बाध रूप से चल रहा है।
अराघची का बयान: अटकलें बेमानी
विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि जब तक कोई ठोस और अंतिम परिणाम सामने नहीं आता, तब तक किसी भी पक्ष के बारे में निर्णायक राय बनाना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, इस समय जो भी चर्चाएँ और दावे सार्वजनिक रूप से किए जा रहे हैं, वे महज अनुमान हैं। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी (आईआरएनए) ने उनके इस बयान को प्रमुखता से प्रसारित किया।
युद्धविराम की पृष्ठभूमि
8 अप्रैल 2026 को लागू हुए युद्धविराम के बाद से दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। यह युद्धविराम करीब 40 दिनों तक चले जवाबी हवाई हमलों के उस दौर को रोकने में सफल रहा, जो तब शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। गौरतलब है कि उसी दौरान ईरान और अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक बातचीत भी कर रहे थे।
परमाणु वार्ता और पिछले अनुभव
दोनों पक्ष इस मुद्दे पर अब तक तीन दौर की वार्ता कर चुके हैं। इससे पहले भी, 13 जून को इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के समय दोनों देश परमाणु वार्ताओं में शामिल थे। इन दोनों अनुभवों का हवाला देते हुए ईरान का कहना है कि मौजूदा बातचीत का प्राथमिक लक्ष्य युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना होना चाहिए — परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी वार्ताएँ उसके बाद आगे बढ़ाई जाएँ।
राष्ट्रपति के इस्तीफे की अफवाह, सरकार ने नकारा
इस बीच, ईरान की घरेलू राजनीति को लेकर भी हलचल बताई जा रही है। लंदन स्थित ईरानी विपक्षी वेबसाइट 'ईरान इंटरनेशनल' से जुड़े एक सूत्र के हवाले से दावा किया गया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मोज्तबा खामेनेई को अपना इस्तीफा सौंपने का एक पत्र भेजा है। हालाँकि, ईरान सरकार ने इस खबर को तत्काल खारिज करते हुए इसे 'झूठी मीडिया रिपोर्ट' करार दिया।
आगे क्या होगा
वार्ता के नतीजों पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नज़र टिकी है, क्योंकि किसी भी स्थायी समझौते की अनुपस्थिति में क्षेत्रीय तनाव फिर से भड़कने की आशंका बनी रहती है। अराघची के बयान से स्पष्ट है कि तेहरान फिलहाल कूटनीतिक चैनलों को खुला रखने की नीति पर चल रहा है।