ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने पाकिस्तान, ओमान और तुर्किए से की फोन वार्ता, अमेरिकी हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 10 जुलाई 2026 को अमेरिकी सैन्य हमलों के तुरंत बाद ओमान, तुर्किए और पाकिस्तान के शीर्ष अधिकारियों से अलग-अलग फोन पर बातचीत की। ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, इन वार्ताओं में होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय स्थिरता के उपायों पर विशेष रूप से चर्चा हुई।
किनसे हुई बातचीत और क्या रहे मुद्दे
अराघची ने ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद अल बुसैदी और तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान से फोन पर संपर्क किया। ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों वार्ताओं में होर्मुज स्ट्रेट में हालिया घटनाक्रम और साझा चिंता के अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। अराघची ने क्षेत्रीय विवादों को कूटनीतिक माध्यम से सुलझाने और तनाव को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए संवाद एवं समन्वय जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पाकिस्तानी आर्मी चीफ से बातचीत में कड़ी चेतावनी
ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, अराघची ने पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल असीम मुनीर से भी फोन पर बात की। इस वार्ता में उन्होंने ईरान पर हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर और हाल ही में हस्ताक्षरित ईरान-अमेरिका शांति समझौते (एमओयू) का खुला उल्लंघन करार दिया। अराघची ने अमेरिकी सेना की किसी भी आगामी कार्रवाई के विरुद्ध चेतावनी दी और ईरान की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के दृढ़ संकल्प को दोहराया।
अमेरिकी हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई
अमेरिका ने कहा कि उसकी सेना ने बुधवार और गुरुवार को ईरान के भीतर कई ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका के अनुसार, ये हमले होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर ईरान के नए हमलों के जवाब में किए गए और इनका उद्देश्य इस अहम जलमार्ग में ईरान की खतरा पहुँचाने की क्षमता को कम करना था।
ईरानी अधिकारियों के बयान के अनुसार, अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो गई और 78 अन्य घायल हुए; एक पुल और एक रेलवे को भी नुकसान पहुँचा। जवाबी कार्रवाई में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और सेना ने कहा कि उन्होंने कुवैत, बहरीन, कतर और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डों और ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
कूटनीतिक पृष्ठभूमि: एमओयू के बीच बढ़ता टकराव
यह ताज़ा तनाव ऐसे नाज़ुक दौर में सामने आया है जब ईरान और अमेरिका एक ज्ञापन समझौते के तहत 60 दिन की बातचीत कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य अंतिम समझौते पर पहुँचना है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों द्वारा एक साथ सैन्य कार्रवाई और वार्ता जारी रखना इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आगे की राह
अराघची की इन फोन वार्ताओं को क्षेत्रीय शक्तियों के बीच कूटनीतिक समन्वय स्थापित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यह देखना अहम होगा कि ओमान — जो अतीत में ईरान-अमेरिका वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है — इस संकट में किस प्रकार की भूमिका अदा करता है।