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अमरनाथ यात्रा 2026: 1.60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन, 9वाँ जत्था रवाना

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अमरनाथ यात्रा 2026: 1.60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन, 9वाँ जत्था रवाना

सारांश

अमरनाथ यात्रा 2026 में महज़ एक हफ्ते में 1.60 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं — पिछले साल से अधिक। 9वाँ जत्था रवाना, 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा पर समापन। आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों को मिल रही नई ऊर्जा।

मुख्य बातें

10 जुलाई 2026 तक 1.60 लाख से अधिक श्रद्धालु अमरनाथ गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं।
शुक्रवार को 8,796 तीर्थयात्रियों का 9वाँ जत्था जम्मू से घाटी के लिए रवाना हुआ।
जत्थे में 6,426 पुरुष , 2,042 महिलाएँ , 228 साधु , 10 बच्चे और 33 विदेशी नागरिक शामिल।
काफिले में 354 वाहन तैनात; बालटाल और पहलगाम — दोनों मार्गों पर आवाजाही।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पंथा चौक यात्री कैंप का दौरा कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
यात्रा का समापन 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) पर होगा।

अमरनाथ यात्रा 2026 पूरे उत्साह के साथ जारी है और 10 जुलाई 2026 तक 1.60 लाख से अधिक श्रद्धालु 3,880 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। 3 जुलाई 2026 को शुरू हुई इस वार्षिक तीर्थयात्रा में इस वर्ष पिछले साल की तुलना में अधिक श्रद्धालुओं के पहुँचने की पुष्टि अधिकारियों ने की है।

9वाँ जत्था रवाना: आँकड़े और विवरण

शुक्रवार को भगवती नगर यात्री निवास, जम्मू से 8,796 तीर्थयात्रियों का नौवाँ जत्था घाटी के लिए रवाना हुआ। इनमें से 3,350 यात्री तड़के 2:42 बजे एक सुरक्षा काफिले में बालटाल बेस कैंप के लिए निकले, जबकि 5,346 तीर्थयात्री सुबह 3:24 बजे दूसरे काफिले में नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप के लिए रवाना हुए।

इस जत्थे में 6,426 पुरुष, 2,042 महिलाएँ, 228 साधु, 10 बच्चे और 33 विदेशी नागरिक शामिल रहे। काफिले के लिए कुल 354 वाहन तैनात किए गए — जिनमें 175 बसें, 70 मीडियम मोटर वाहन, 106 लाइट मोटर वाहन और 3 दोपहिया वाहन थे। इनमें से 173 वाहन बालटाल रूट और 181 वाहन पहलगाम रूट के लिए निर्धारित थे।

उपराज्यपाल की समीक्षा और संदेश

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को श्रीनगर के बाहरी इलाके में स्थित पंथा चौक यात्री कैंप का दौरा किया और व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया। उन्होंने कहा, "पिछले सप्ताह के आँकड़े बताते हैं कि इस साल श्री अमरनाथ जी यात्रा में पिछले साल की तुलना में अधिक श्रद्धालु आए हैं। यह बढ़ोतरी न सिर्फ हमारी आध्यात्मिक विरासत के लिए एक आशीर्वाद है, बल्कि जम्मू-कश्मीर में पर्यटन के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।"

उपराज्यपाल ने स्थानीय हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूँ कि जम्मू-कश्मीर के बेहतरीन हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद पूरे देश में पहुँचें और यह अनूठी विरासत हर श्रद्धालु के घर में जगह बनाए। इससे हमारे कारीगरों का सम्मान होगा और 'एक जिला एक उत्पाद' अभियान की भावना भी मज़बूत होगी।"

उन्होंने जिला प्रशासन, श्राइन बोर्ड, पुलिस, सुरक्षा बलों और संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों की सराहना की और भीड़ प्रबंधन, निर्बाध पंजीकरण तथा तीर्थयात्रियों को समय पर सूचना देने की निरंतरता बनाए रखने का निर्देश दिया।

दो मार्ग, दो अनुभव

श्रद्धालु पहलगाम मार्ग या बालटाल मार्ग — दो पारंपरिक रास्तों से गुफा मंदिर तक पहुँचते हैं। पहलगाम मार्ग से यात्रा करने वाले तीर्थयात्री गुफा तक पहुँचने में चार दिन लगाते हैं, जबकि बालटाल मार्ग का उपयोग करने वाले उसी दिन दर्शन कर बेस कैंप लौट आते हैं।

यात्रा का समापन और महत्व

अमरनाथ यात्रा 2026 का समापन 28 अगस्त 2026 को होगा, जिस दिन श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन का पर्व भी है। यह यात्रा जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है — स्थानीय परिवहन, आतिथ्य और हस्तशिल्प क्षेत्र को इससे सीधा लाभ मिलता है। गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने पर विशेष ध्यान दे रही है। आने वाले हफ्तों में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि बढ़ती भीड़ के साथ सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं का स्तर भी उसी अनुपात में बना रहे। उपराज्यपाल का हस्तशिल्प और 'एक जिला एक उत्पाद' पर ज़ोर दर्शाता है कि सरकार तीर्थयात्रा को केवल आस्था नहीं, आर्थिक अवसर के रूप में भी देख रही है — जो स्थानीय कारीगरों के लिए उत्साहजनक है। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि ऊँचाई पर मौसम की अनिश्चितता और बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के बीच आपातकालीन प्रबंधन की तैयारी की जाँच हर साल नए सिरे से होती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरनाथ यात्रा 2026 कब शुरू हुई और कब समाप्त होगी?
अमरनाथ यात्रा 2026 की शुरुआत 3 जुलाई 2026 को हुई और इसका समापन 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के दिन होगा। यात्रा लगभग दो महीने तक चलती है।
अब तक कितने श्रद्धालुओं ने अमरनाथ दर्शन किए हैं?
10 जुलाई 2026 तक 1.60 लाख से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा मंदिर में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।
अमरनाथ गुफा मंदिर तक पहुँचने के कौन-से मार्ग हैं?
श्रद्धालु दो मार्गों से अमरनाथ गुफा पहुँच सकते हैं — पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग। पहलगाम मार्ग से यात्रा में चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग से तीर्थयात्री उसी दिन दर्शन कर बेस कैंप लौट सकते हैं।
9वें जत्थे में कितने और किस तरह के तीर्थयात्री शामिल थे?
शुक्रवार को रवाना हुए 9वें जत्थे में कुल 8,796 तीर्थयात्री थे, जिनमें 6,426 पुरुष, 2,042 महिलाएँ, 228 साधु, 10 बच्चे और 33 विदेशी नागरिक शामिल थे। काफिले के लिए 354 वाहन तैनात किए गए थे।
अमरनाथ यात्रा का जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है?
अमरनाथ यात्रा स्थानीय परिवहन, आतिथ्य, हस्तशिल्प और व्यापार क्षेत्र को सीधा लाभ पहुँचाती है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इसे जम्मू-कश्मीर में पर्यटन और 'एक जिला एक उत्पाद' अभियान के लिए सकारात्मक अवसर बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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