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अमरनाथ यात्रा 2026: चार दिनों में 85,779 श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन

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अमरनाथ यात्रा 2026: चार दिनों में 85,779 श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन

सारांश

अमरनाथ यात्रा 2026 के पहले चार दिनों में ही 85,779 श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं — खराब मौसम भी आस्था को रोक नहीं पाया। सोमवार को 28,818 यात्री गुफा तक पहुँचे। प्रशासन ने चार-स्तरीय सुरक्षा और सख्त पंजीकरण नियम लागू किए हैं।

मुख्य बातें

3 जुलाई 2026 से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा के पहले चार दिनों में 85,779 श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं।
7 जुलाई को एक ही दिन में 28,818 श्रद्धालु 3,880 मीटर की ऊँचाई पर स्थित गुफा तक पहुँचे।
यात्रा बालटाल और पहलगाम — दोनों मार्गों से जारी है; पहलगाम मार्ग के यात्री वापसी में बालटाल को प्राथमिकता दे रहे हैं।
चार-स्तरीय सुरक्षा लागू — सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस तैनात।
अपंजीकृत या तय तिथि से पहले आने वाले श्रद्धालुओं को बेस कैंप की ओर जाने की अनुमति नहीं।
जम्मू में तवी रिवरफ्रंट, राम मंदिर व गीता भवन पंजीकरण काउंटरों पर लंबी कतारें।

अमरनाथ यात्रा के शुरू होने के महज चार दिनों के भीतर 85,779 श्रद्धालु बाबा बर्फानी के पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। 7 जुलाई 2026 को अकेले एक दिन में 28,818 श्रद्धालुओं ने 3,880 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस पवित्र गुफा तक पहुँचकर दर्शन किए। अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों की संख्या में प्रतिदिन उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है।

यात्रा का क्रम और मार्ग

3 जुलाई 2026 से आरंभ हुई इस वार्षिक तीर्थयात्रा में श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम — दोनों मार्गों से गुफा तक पहुँच रहे हैं। सोमवार को कई क्षेत्रों में तेज़ बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और वे दोनों रास्तों से दर्शन के लिए आगे बढ़ते रहे। शाम होते-होते दर्शन करने वाले श्रद्धालु सुरक्षित रूप से बालटाल बेस कैंप लौट आए।

अधिकारियों के अनुसार, दक्षिण कश्मीर के पहलगाम स्थित नुनवान बेस कैंप तक वापस पहुँचने में तीन से चार दिन का समय लगता है। इसी कारण पहलगाम मार्ग से यात्रा करने वाले अधिकांश श्रद्धालु दर्शन के बाद वापसी में बालटाल मार्ग को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे वे उसी दिन बेस कैंप लौट सकते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएँ

प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। बालटाल और नुनवान पहलगाम बेस कैंपों से लेकर पवित्र गुफा तक यात्रा मार्ग के प्रत्येक पड़ाव पर आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा जगह-जगह लंगर लगाए गए हैं, जहाँ यात्रियों को निःशुल्क भोजन परोसा जा रहा है। इसके अतिरिक्त हज़ारों टेंट भी स्थापित किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को रात्रि विश्राम में कोई कठिनाई न हो।

प्रशासन बेस कैंपों पर सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के ज़रिए मौसम की अग्रिम जानकारी भी प्रसारित कर रहा है, ताकि श्रद्धालु अपनी यात्रा की योजना मौसम के अनुरूप बना सकें।

सुरक्षा व्यवस्था

पहलगाम और बालटाल बेस कैंप से लेकर पवित्र गुफा तक चार-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। ऊँचाई वाले इलाकों और दोनों यात्रा मार्गों पर सेना के जवान तैनात हैं, जबकि बेस कैंपों की सुरक्षा केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के हाथों में है। जम्मू-कश्मीर पुलिस भी समग्र सुरक्षा व्यवस्था में सक्रिय सहयोग दे रही है।

पंजीकरण और नियम

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अपंजीकृत श्रद्धालु अथवा निर्धारित तिथि से पूर्व पहुँचने वाले यात्री को दोनों बेस कैंपों की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे केवल अपनी पंजीकरण तिथि के अनुसार ही यात्रा करें।

जम्मू में भी श्रद्धालुओं का भारी तांता लगा हुआ है। मंगलवार सुबह से ही तवी रिवरफ्रंट, राम मंदिर, पुरानी मंडी और गीता भवन स्थित पंजीकरण व टोकन काउंटरों पर लंबी कतारें देखी गईं। यात्रा का यह उत्साह बताता है कि आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

779 श्रद्धालुओं का आँकड़ा यात्रा की अटूट लोकप्रियता को दर्शाता है, लेकिन यह प्रशासन के लिए भीड़ प्रबंधन की कड़ी परीक्षा भी है। खराब मौसम और ऊँचाई के जोखिम के बीच पंजीकरण नियमों का सख्त पालन सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य है। गौरतलब है कि पिछले वर्षों में अनियंत्रित भीड़ और मौसमी आपदाओं के कारण यात्रा मार्ग पर जानमाल का नुकसान हो चुका है। प्रशासन की चार-स्तरीय सुरक्षा और अग्रिम मौसम चेतावनी प्रणाली सही दिशा में कदम हैं, लेकिन असली परीक्षा उन हफ्तों में होगी जब श्रद्धालुओं की संख्या अपने चरम पर होगी।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरनाथ यात्रा 2026 में अब तक कितने श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं?
यात्रा शुरू होने के पहले चार दिनों में 85,779 श्रद्धालु बाबा बर्फानी के गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। 7 जुलाई 2026 को अकेले एक दिन में 28,818 यात्री गुफा तक पहुँचे।
अमरनाथ यात्रा 2026 कब शुरू हुई और कौन-से मार्ग उपलब्ध हैं?
अमरनाथ यात्रा 2026 की शुरुआत 3 जुलाई 2026 को हुई। श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम — दोनों मार्गों से 3,880 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पवित्र गुफा तक पहुँच सकते हैं।
क्या बिना पंजीकरण के अमरनाथ यात्रा की जा सकती है?
नहीं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अपंजीकृत श्रद्धालुओं या निर्धारित तिथि से पहले आने वाले यात्रियों को बालटाल और नुनवान बेस कैंप की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जम्मू में तवी रिवरफ्रंट, राम मंदिर और गीता भवन पर पंजीकरण काउंटर उपलब्ध हैं।
अमरनाथ यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के क्या इंतज़ाम हैं?
बेस कैंप से गुफा तक चार-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है। ऊँचाई वाले इलाकों और यात्रा मार्गों पर सेना के जवान तैनात हैं, बेस कैंपों की सुरक्षा CRPF के ज़िम्मे है, और जम्मू-कश्मीर पुलिस भी सहयोग कर रही है।
पहलगाम मार्ग से यात्रा करने वाले श्रद्धालु वापसी में बालटाल क्यों चुनते हैं?
अधिकारियों के अनुसार, पहलगाम के नुनवान बेस कैंप तक वापस पहुँचने में तीन से चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग से श्रद्धालु दर्शन के उसी दिन बेस कैंप लौट सकते हैं। इसी सुविधा के कारण अधिकांश यात्री वापसी में बालटाल मार्ग को प्राथमिकता देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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