7 जुलाई 2026
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चीन के पनडुब्बी ICBM परीक्षण पर अमेरिका सख्त, बोला — बीजिंग का परमाणु विस्तार वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा

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चीन के पनडुब्बी ICBM परीक्षण पर अमेरिका सख्त, बोला — बीजिंग का परमाणु विस्तार वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा

सारांश

चीन ने प्रशांत महासागर में पनडुब्बी से ICBM दागकर दुनिया को चौंकाया। अमेरिका ने इसे परमाणु अप्रसार के विरुद्ध बताया और P5 मानकों के अनुरूप पारदर्शिता की माँग की। ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और जापान ने भी चिंता जताई — यह परीक्षण हिंद-प्रशांत में बढ़ते सामरिक तनाव का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

चीन ने दक्षिणी प्रशांत महासागर में पनडुब्बी से इंटरकॉन्टिनेंटल-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया, जिसमें डमी वारहेड था।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि बीजिंग का परमाणु विस्तार वैश्विक अप्रसार प्रयासों के विरुद्ध है।
अमेरिका ने चीन से P5 मानकों के अनुरूप हथियार नियंत्रण वार्ता और मिसाइल प्रक्षेपण की नियमित अधिसूचना व्यवस्था की माँग की।
ऑस्ट्रेलिया ने इसे क्षेत्र को अस्थिर करने वाला, न्यूज़ीलैंड ने 'चिंताजनक' और जापान ने बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर आपत्ति जताई।
चीनी अधिकारियों के अनुसार, संबंधित देशों को पहले से सूचना दी गई थी और मिसाइल निर्धारित क्षेत्र में गिरी।

चीन ने दक्षिणी प्रशांत महासागर में अपनी पनडुब्बी से एक इंटरकॉन्टिनेंटल-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया, जिसमें डमी वारहेड लगाया गया था। अमेरिकी विदेश विभाग ने 7 जुलाई को इस परीक्षण पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि बीजिंग का तेज़ी से बढ़ता परमाणु शस्त्रागार वैश्विक परमाणु अप्रसार प्रयासों के सीधे विरुद्ध है। यह परीक्षण चीन की समुद्र-आधारित रणनीतिक मिसाइल क्षमता के सार्वजनिक प्रदर्शन का एक दुर्लभ उदाहरण माना जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

चीन ने स्वयं सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उसने एक पनडुब्बी से प्रशांत महासागर की ओर बिना हथियार वाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी। चीनी अधिकारियों के अनुसार, संबंधित देशों को पहले से सूचना दी गई थी और मिसाइल निर्धारित क्षेत्र में जाकर गिरी।

अमेरिकी राज्य विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने पुष्टि की कि वाशिंगटन ने इस प्रक्षेपण पर नज़र रखी थी। उन्होंने कहा, 'ऐसे समय में जब अमेरिका परमाणु प्रसार को रोकने के लिए पहले से कहीं ज़्यादा मेहनत कर रहा है, चीन इसका उल्टा कर रहा है।'

अमेरिका की माँगें और चेतावनी

पिगॉट ने स्पष्ट किया कि बीजिंग का तेज़ी से और बिना पारदर्शिता के परमाणु हथियार बनाना इस क्षेत्र और पूरी दुनिया के लिए गहरी चिंता का विषय है। अमेरिका ने चीन से औपचारिक हथियार नियंत्रण वार्ता में शामिल होने की अपील की।

पिगॉट के अनुसार, 'हम चीन से लगातार अपील करते हैं कि वह काम की हथियार नियंत्रण बातचीत में शामिल हो और सभी इंटरकॉन्टिनेंटल-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल और स्पेस लॉन्च के लिए एक नियमित अधिसूचना व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हो, जैसा कि P5 के बाकी सभी सदस्यों ने किया है।' गौरतलब है कि P5 में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन शामिल हैं।

क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया

इस परीक्षण ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों में भी चिंता की लहर पैदा की। न्यूज़ीलैंड ने इस प्रक्षेपण को 'अच्छी बात नहीं' बताया, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने इसे क्षेत्र को अस्थिर करने वाला क़रार दिया। जापान ने भी चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की।

यह ऐसे समय में आया है जब एशिया-प्रशांत में सामरिक तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है और कई देश अपनी रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करने में जुटे हैं।

अमेरिका की हिंद-प्रशांत प्रतिबद्धता

वाशिंगटन ने इस अवसर पर हिंद-प्रशांत में अपनी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं की भी पुनः पुष्टि की। विदेश विभाग के बयान में कहा गया, 'अमेरिका अपने सहयोगियों और साझेदारों के प्रति अपनी रक्षा प्रतिबद्धताओं पर अडिग है।'

आलोचकों का कहना है कि चीन का यह परीक्षण महज़ तकनीकी प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीतिक संदेश है — विशेष रूप से ऐसे समय में जब ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर में तनाव बना हुआ है।

आगे क्या

अमेरिका ने चीन से पारदर्शिता और हथियार नियंत्रण वार्ता की माँग दोहराई है, लेकिन बीजिंग की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस परीक्षण के बाद वाशिंगटन और उसके प्रशांत सहयोगियों के बीच सुरक्षा समन्वय और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका रणनीतिक संदेश स्पष्ट है — बीजिंग अपनी समुद्र-आधारित परमाणु क्षमता को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने में अब संकोच नहीं करता। अमेरिका की P5 पारदर्शिता की माँग उचित है, परंतु विडंबना यह है कि वाशिंगटन स्वयं हाल के वर्षों में परमाणु आधुनिकीकरण पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है। असली चिंता यह है कि चीन किसी भी बहुपक्षीय हथियार नियंत्रण ढाँचे में शामिल होने से लगातार इनकार करता आया है, और इस परीक्षण के बाद उस रुख़ के बदलने के कोई संकेत नहीं हैं — जो हिंद-प्रशांत में दीर्घकालिक अस्थिरता की आशंका को और गहरा करता है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन ने प्रशांत महासागर में किस मिसाइल का परीक्षण किया?
चीन ने एक पनडुब्बी से इंटरकॉन्टिनेंटल-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) दागी, जिसमें डमी (नकली) वारहेड लगाया गया था और जो दक्षिणी प्रशांत महासागर में निर्धारित क्षेत्र में गिरी। चीनी अधिकारियों के अनुसार, संबंधित देशों को पहले से सूचित किया गया था।
अमेरिका ने चीन के इस मिसाइल परीक्षण पर क्या कहा?
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि चीन का तेज़ी से और बिना पारदर्शिता के परमाणु हथियार बनाना वैश्विक परमाणु अप्रसार प्रयासों के विरुद्ध है। अमेरिका ने चीन से P5 मानकों के अनुरूप हथियार नियंत्रण वार्ता और नियमित अधिसूचना व्यवस्था की माँग की।
क्षेत्रीय देशों — ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, जापान — ने इस परीक्षण पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ऑस्ट्रेलिया ने इसे क्षेत्र को अस्थिर करने वाला बताया, न्यूज़ीलैंड ने इसे 'चिंताजनक' क़रार दिया और जापान ने चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर गहरी आपत्ति जताई।
P5 देशों की मिसाइल अधिसूचना व्यवस्था क्या है और चीन इससे अलग क्यों है?
P5 (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन) के बाकी सदस्य इंटरकॉन्टिनेंटल-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल और स्पेस लॉन्च के लिए नियमित अधिसूचना व्यवस्था का पालन करते हैं। अमेरिका का आरोप है कि चीन इस पारदर्शिता प्रतिबद्धता से बचता आया है, जो वैश्विक हथियार नियंत्रण प्रयासों को कमज़ोर करता है।
क्या यह चीन की समुद्र-आधारित परमाणु क्षमता का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन है?
रिपोर्टों के अनुसार, यह चीन की समुद्र-आधारित रणनीतिक मिसाइल क्षमता के सार्वजनिक प्रदर्शन का एक दुर्लभ उदाहरण माना जा रहा है। इससे पहले चीन अपनी पनडुब्बी-आधारित परमाणु क्षमता को लेकर बेहद गोपनीय रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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