राम मंदिर चढ़ावे पर ईडी-सीबीआई चुप क्यों? सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने माँगी पारदर्शिता
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने 7 जुलाई को नई दिल्ली में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब लोगों ने भगवान राम के नाम पर आस्था के साथ दान दिया है, तो इस पूरे मामले में पूर्ण पारदर्शिता अनिवार्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी जाँच एजेंसियाँ इस मामले में सक्रिय क्यों नहीं दिख रहीं।
राम मंदिर चढ़ावे पर पारदर्शिता की माँग
नदवी ने स्पष्ट किया कि भगवान राम के प्रति सम्मान केवल हिंदू समाज तक सीमित नहीं है। उन्होंने अल्लामा इकबाल के प्रसिद्ध शेर का हवाला देते हुए कहा कि भगवान राम भारतीय सभ्यता के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। उनका कहना था कि चंदे या चढ़ावे से जुड़े किसी भी प्रकार के आरोपों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और यह जाँच उन्हीं एजेंसियों द्वारा होनी चाहिए जो अन्य मामलों में सक्रिय रहती हैं।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के संबंध में पूछे गए सवाल पर नदवी ने कहा कि सभी भारतीयों को धार्मिक मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए। उनके अनुसार, गलत कार्य चाहे किसी भी धर्म या व्यक्ति द्वारा किया जाए, उसे गलत ही माना जाना चाहिए।
जलालाबाद नाम परिवर्तन पर ऐतिहासिक नैरेटिव का सवाल
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शाहजहांपुर जिले की जलालाबाद तहसील का नाम बदलकर 'भगवान परशुराम पुरी' किए जाने के फैसले पर नदवी ने दावा किया कि इतिहास को लेकर एक विशेष नैरेटिव तैयार किया गया है, जिससे हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच दूरी बढ़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम में लालच या भय के आधार पर धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि मंदिरों को जबरन मस्जिदों में बदले जाने संबंधी आरोप ऐतिहासिक रूप से सही नहीं हैं।
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति पर आपत्ति
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति के मुद्दे पर नदवी ने कहा कि किसी भी समुदाय के धार्मिक मामलों में दूसरे समुदाय का हस्तक्षेप उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी आपत्तियों के बावजूद सरकार ने संबंधित कानून लागू किया, जिसके बाद कई मस्जिदों पर कार्रवाई की गई।
एकता और विकास के लिए सांप्रदायिक सद्भाव ज़रूरी
नदवी ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए सांप्रदायिक विवादों से ऊपर उठना होगा। उन्होंने ज़ोर दिया कि संविधान, कानून के शासन और न्याय के सिद्धांतों का समान रूप से पालन ही देश की एकता, अखंडता और विकास की असली बुनियाद है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े इस्तीफों को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में हलचल बनी हुई है।