राम मंदिर चढ़ावा विवाद: कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 3 जुलाई को चंडीगढ़ में राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए माँग की कि इस पूरे प्रकरण की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष रूप से होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और रामलला के जन्मस्थान की पवित्रता से जुड़ा है।
राम मंदिर गबन पर तिवारी का रुख
तिवारी ने कहा, 'वास्तविकता यह है कि वहाँ कथित गबन हुआ है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि रामलला के जन्मस्थान की अपनी पवित्रता है और उस पवित्रता को बनाए रखना तथा करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करना आवश्यक है। उनके अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में जांच ही एकमात्र रास्ता है जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और आम जनता का विश्वास बना रहे। गौरतलब है कि उनकी यह प्रतिक्रिया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के बयान के संदर्भ में आई है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर संवैधानिक सवाल
महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के लिए ड्राफ्टिंग कमेटी बनाए जाने की घोषणा पर तिवारी ने संवैधानिक पहलू उठाया। उन्होंने कहा कि संविधान 'यूनिफॉर्म सिविल कोड' की बात करता है, 'कॉमन सिविल कोड' की नहीं — और यह भेद महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने याद दिलाया कि जब केंद्र सरकार ने पहले इस विषय पर पहल की थी, तब स्वयं सरकार ने कहा था कि अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जनजातियों और विभिन्न एथनिक अल्पसंख्यक समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा।
तिवारी ने सवाल उठाया कि जब समाज के इतने बड़े वर्ग — जिनके अपने पारंपरिक और प्रथागत कानून (Customary Law) हैं — को UCC के दायरे से बाहर रखा जाएगा, तो इसे 'यूनिफॉर्म' कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड की अवधारणा का उल्लेख है, न कि कॉमन सिविल कोड का।
सिंधु जल संधि और पाकिस्तान नीति
सिंधु जल संधि पर भारत के सख्त रुख के सवाल पर तिवारी ने कहा कि इस विषय पर भारत की नीति लंबे समय से स्पष्ट है। उन्होंने बताया कि 1994 और 2013 में संसद में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं। उन्होंने 7 मई से 10 मई के बीच पाकिस्तान के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा विभिन्न देशों में दिए गए संदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।
राष्ट्रीय सहमति का आह्वान
तिवारी ने कहा कि देश में इस मुद्दे पर व्यापक आम सहमति है कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।' उनके अनुसार, सरकार को इस राष्ट्रीय सहमति को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए और उसी के अनुरूप अपनी नीति आगे बढ़ानी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध अत्यंत तनावपूर्ण दौर से गुज़र रहे हैं और सिंधु जल संधि का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।