राम मंदिर चढ़ावा चोरी: विपक्ष ने SIT जांच को बताया अपर्याप्त, सुप्रीम कोर्ट निगरानी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 8 जुलाई को विपक्षी दलों ने विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) दोनों ने एकमत होकर माँग की कि इस संवेदनशील मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाए, क्योंकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था इससे जुड़ी है।
कांग्रेस का तीखा हमला
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मामले को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में रखते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'मंदिरों से चढ़ावा चोरी करना और मुसलमानों के साथ सीनाजोरी करना, इन सभी मामलों को दबाने के लिए मुसलमानों पर बुलडोजर चलाना, उन्हें लाठियों से पीटना, डंडे बरसाना, नफरत फैलाना और अपनी सभी नाकामियों व कमियों को छिपाना, यही सब हो रहा है।'
मसूद ने SIT की वैधानिक स्थिति पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। उनका कहना था कि यह SIT नहीं बल्कि 'SET' है और इसका कोई कानूनी महत्व नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) सरकार ने नहीं, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दर्ज कराई है।
SP सांसद की सुप्रीम कोर्ट निगरानी की माँग
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के स्पष्टीकरण को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि यह केवल चोरी का मामला नहीं है — इसमें देश के करोड़ों लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है। उन्होंने माँग की कि SIT गठन से पहले ट्रस्ट को भंग किया जाना चाहिए था और उसके सभी सदस्यों को रामलला परिसर से बाहर किया जाना चाहिए था।
प्रसाद ने SIT रिपोर्ट के कथित रिसाव पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, 'अभी तक केवल परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता था, लेकिन अब SIT की गोपनीय रिपोर्ट लीक हो रही है।' उन्होंने कहा कि इस स्थिति में एकमात्र विश्वसनीय विकल्प यह है कि जांच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित टीम की निगरानी में संपन्न हो।
झारखंड से कांग्रेस नेता की माँग
झारखंड में कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि SIT जांच चोरों को बचाने का माध्यम बन रही है। उन्होंने उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की माँग करते हुए कहा कि तीनों आरोपियों की पुलिस रिमांड के दौरान की पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि जनता यह जान सके कि वे किसका नाम ले रहे हैं और इस मामले का असली मास्टरमाइंड कौन है।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का यह मामला तब सामने आया जब ट्रस्ट ने स्वयं FIR दर्ज कराई। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने SIT का गठन किया और तीन आरोपियों को हिरासत में लिया। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक विवाद पहले से ही राष्ट्रीय चर्चा में हैं।
आगे क्या होगा
विपक्ष की एकजुट माँग के बाद यह देखना होगा कि क्या सर्वोच्च न्यायालय स्वतः संज्ञान लेता है अथवा कोई पक्ष याचिका दायर करता है। तीनों आरोपियों की पुलिस रिमांड के दौरान जो खुलासे होंगे, वे इस मामले की दिशा तय करेंगे।