8 जुलाई 2026
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: विपक्ष ने SIT जांच को बताया अपर्याप्त, सुप्रीम कोर्ट निगरानी की मांग

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: विपक्ष ने SIT जांच को बताया अपर्याप्त, सुप्रीम कोर्ट निगरानी की मांग

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विपक्ष एकजुट हो गया है — कांग्रेस ने SIT की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए, SP ने ट्रस्ट भंग करने की माँग की और झारखंड कांग्रेस ने आरोपियों की पूछताछ सार्वजनिक करने की अपील की। सभी की एक माँग: सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने SIT को 'SET' बताते हुए उसकी कानूनी वैधता को नकारा और कहा कि FIR सरकार ने नहीं, ट्रस्ट ने दर्ज कराई है।
SP सांसद अवधेश प्रसाद ने माँग की कि जांच सर्वोच्च न्यायालय गठित टीम की निगरानी में हो और ट्रस्ट को SIT गठन से पहले ही भंग किया जाना चाहिए था।
प्रसाद ने SIT की गोपनीय रिपोर्ट लीक होने पर गंभीर चिंता जताई।
झारखंड कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने तीनों आरोपियों की पुलिस रिमांड की वीडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने की माँग की।
मामले में अब तक 3 आरोपी पुलिस हिरासत में हैं; FIR श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दर्ज कराई है।

श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 8 जुलाई को विपक्षी दलों ने विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) दोनों ने एकमत होकर माँग की कि इस संवेदनशील मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाए, क्योंकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था इससे जुड़ी है।

कांग्रेस का तीखा हमला

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मामले को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में रखते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'मंदिरों से चढ़ावा चोरी करना और मुसलमानों के साथ सीनाजोरी करना, इन सभी मामलों को दबाने के लिए मुसलमानों पर बुलडोजर चलाना, उन्हें लाठियों से पीटना, डंडे बरसाना, नफरत फैलाना और अपनी सभी नाकामियों व कमियों को छिपाना, यही सब हो रहा है।'

मसूद ने SIT की वैधानिक स्थिति पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। उनका कहना था कि यह SIT नहीं बल्कि 'SET' है और इसका कोई कानूनी महत्व नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) सरकार ने नहीं, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दर्ज कराई है।

SP सांसद की सुप्रीम कोर्ट निगरानी की माँग

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के स्पष्टीकरण को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि यह केवल चोरी का मामला नहीं है — इसमें देश के करोड़ों लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है। उन्होंने माँग की कि SIT गठन से पहले ट्रस्ट को भंग किया जाना चाहिए था और उसके सभी सदस्यों को रामलला परिसर से बाहर किया जाना चाहिए था।

प्रसाद ने SIT रिपोर्ट के कथित रिसाव पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, 'अभी तक केवल परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता था, लेकिन अब SIT की गोपनीय रिपोर्ट लीक हो रही है।' उन्होंने कहा कि इस स्थिति में एकमात्र विश्वसनीय विकल्प यह है कि जांच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित टीम की निगरानी में संपन्न हो।

झारखंड से कांग्रेस नेता की माँग

झारखंड में कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि SIT जांच चोरों को बचाने का माध्यम बन रही है। उन्होंने उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की माँग करते हुए कहा कि तीनों आरोपियों की पुलिस रिमांड के दौरान की पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि जनता यह जान सके कि वे किसका नाम ले रहे हैं और इस मामले का असली मास्टरमाइंड कौन है।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का यह मामला तब सामने आया जब ट्रस्ट ने स्वयं FIR दर्ज कराई। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने SIT का गठन किया और तीन आरोपियों को हिरासत में लिया। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक विवाद पहले से ही राष्ट्रीय चर्चा में हैं।

आगे क्या होगा

विपक्ष की एकजुट माँग के बाद यह देखना होगा कि क्या सर्वोच्च न्यायालय स्वतः संज्ञान लेता है अथवा कोई पक्ष याचिका दायर करता है। तीनों आरोपियों की पुलिस रिमांड के दौरान जो खुलासे होंगे, वे इस मामले की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन SIT रिपोर्ट के कथित रिसाव की चिंता को खारिज नहीं किया जा सकता — यह जांच की विश्वसनीयता पर वास्तविक प्रश्न खड़ा करता है। यह भी उल्लेखनीय है कि FIR स्वयं ट्रस्ट ने दर्ज कराई, सरकार ने नहीं — जो इस मामले में राज्य की भूमिका और जवाबदेही को लेकर एक संरचनात्मक अस्पष्टता पैदा करता है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संस्थान में पारदर्शिता सुनिश्चित करना केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संस्थागत अनिवार्यता है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला क्या है?
अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आया, जिसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं FIR दर्ज कराई। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में SIT गठित की और तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है।
विपक्ष SIT जांच पर सवाल क्यों उठा रहा है?
कांग्रेस ने SIT की कानूनी वैधता को चुनौती देते हुए इसे 'SET' बताया और कहा कि इसका कोई कानूनी महत्व नहीं है। SP सांसद अवधेश प्रसाद ने SIT की गोपनीय रिपोर्ट के कथित रिसाव का हवाला देते हुए जांच की निष्पक्षता पर संदेह जताया।
सुप्रीम कोर्ट निगरानी की माँग क्यों की जा रही है?
विपक्ष का तर्क है कि मामले की संवेदनशीलता और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए केवल सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में ही जांच विश्वसनीय हो सकती है। SP सांसद प्रसाद के अनुसार, SIT रिपोर्ट लीक होना यह साबित करता है कि मौजूदा तंत्र पर्याप्त नहीं है।
चंपत राय इस विवाद में कहाँ हैं?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मामले पर स्पष्टीकरण दिया, जिसे SP सांसद अवधेश प्रसाद ने अपर्याप्त बताया। विपक्ष ने माँग की है कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों को रामलला परिसर से बाहर किया जाए और ट्रस्ट को भंग किया जाए।
आरोपियों की पूछताछ सार्वजनिक करने की माँग क्यों उठी?
झारखंड कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने माँग की है कि तीनों आरोपियों की पुलिस रिमांड के दौरान की पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की जाए। उनका कहना है कि इससे जनता को पता चलेगा कि आरोपी किसका नाम ले रहे हैं और इस मामले का असली मास्टरमाइंड कौन है।
राष्ट्र प्रेस
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