राम मंदिर चढ़ावा विवाद: आरएसएस की कार्रवाई की मांग के बाद सियासत तेज, विपक्ष ने घेरा
सारांश
मुख्य बातें
राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद ने 3 जुलाई को नया राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबोले की कार्रवाई की मांग के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने रुख स्पष्ट किए। जांच, गिरफ्तारियों और इस मुद्दे पर हो रही राजनीति को लेकर विभिन्न दलों के नेताओं ने तीखे बयान दिए।
विपक्ष के सवाल और आरोप
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उपाध्यक्ष तनवीर हसन ने कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि राम मंदिर में चोरी हुई है या नहीं। उन्होंने रेखांकित किया कि यह सवाल कोई मुस्लिम नहीं, बल्कि हिंदुत्व का समर्थन करने वाले लोग ही उठा रहे हैं — और मंदिर प्रबंधन में किसी मुस्लिम की कोई भूमिका नहीं है। हसन ने इस पूरे मामले को 'दिखावा' करार दिया।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने आरोप लगाया कि घटना सामने आने के एक सप्ताह तक किसी बड़े नेता ने न प्रतिक्रिया दी, न निंदा की। उनका कहना था कि छोटे लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा जबकि बड़े आरोपियों को बचाने की कोशिश होगी — और इस मामले में 'बड़े लोगों' की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि RSS को आखिरकार यह एहसास हुआ है कि मामले में गंभीर गड़बड़ी हुई है। उन्होंने तंज कसा कि जिन लोगों ने अपनी पूरी राजनीति श्रीराम मंदिर के इर्द-गिर्द खड़ी की, उन्हीं के कार्यकाल में यह स्थिति बनी। चतुर्वेदी ने भी आरोप लगाया कि अभी तक केवल छोटे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी को बचाया जा रहा है।
सत्ता पक्ष का बचाव
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने मामले को 'अत्यंत गंभीर और संवेदनशील' बताया। उन्होंने कहा कि जैसे ही मामला सामने आया, सरकार ने तत्काल SIT का गठन किया, FIR दर्ज कराई और गिरफ्तारी भी की। प्रवक्ता ने जनता को आश्वस्त किया कि सरकार पूरी तरह सक्रिय है और जल्द सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि उन लोगों से भी सावधान रहने की ज़रूरत है जो भगवान राम को नहीं मानते थे।
RSS और VHP का रुख
RSS नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि हिंदू समाज दत्तात्रेय होसबोले के साथ खड़ा है और करोड़ों लोग जल्द न्याय मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस विषय पर राजनीति न करें और SIT को निष्पक्ष रूप से काम करने दें।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने स्वीकार किया कि साढ़े बारह करोड़ से अधिक लोगों द्वारा दिए गए दान से जुड़े इस प्रसाद की चोरी दुखद है और इसका कोई बचाव नहीं किया जा सकता।
JDU की संयमित प्रतिक्रिया
जनता दल (यूनाइटेड) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि भगवान श्रीराम को चढ़ाए गए चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं की खबर अत्यंत दुखद है। उन्होंने महात्मा बुद्ध और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि धैर्य और संयम भारत की परंपरा है, और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्यायपालिका के फैसले से बने राम मंदिर के प्रति देशवासियों की गहरी श्रद्धा है — इसीलिए इस घटना को लेकर व्यापक नाराजगी है।
आगे क्या होगा
SIT जांच जारी है और विभिन्न दलों के नेताओं ने मांग की है कि केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित न रहते हुए पूरी जांच की जाए। यह विवाद आने वाले दिनों में संसद और राज्य विधानसभाओं में भी गूंजने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष इसे एक बड़े जवाबदेही के सवाल के रूप में उठा रहा है।