9 जुलाई 2026
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महाराष्ट्र विधानसभा: स्पीकर नार्वेकर ने अनुपस्थिति पर सरकार को लताड़ा, मुख्य सचिव को 30 मिनट में तलब किया

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महाराष्ट्र विधानसभा: स्पीकर नार्वेकर ने अनुपस्थिति पर सरकार को लताड़ा, मुख्य सचिव को 30 मिनट में तलब किया

सारांश

महाराष्ट्र विधानसभा में 8 जुलाई को एक असाधारण दृश्य — स्पीकर राहुल नार्वेकर ने खाली बेंचों और सूनी अधिकारियों की गैलरी पर भड़कते हुए मुख्य सचिव को आधे घंटे में तलब किया। सत्ता और विपक्ष दोनों एक सुर में खड़े हुए, और स्पीकर ने सदन स्थगित करने तक की चेतावनी दे डाली।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने 8 जुलाई 2026 को मानसून सत्र के दौरान मंत्रियों और नौकरशाहों की गैर-हाजिरी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
स्पीकर ने मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल को 30 मिनट के भीतर विधानसभा में उपस्थित होने का असाधारण निर्देश दिया।
कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार और नाना पटोले ने अधिकारियों की गैलरी और सत्ता पक्ष की बेंचें खाली होने का मुद्दा उठाया; सत्ताधारी गठबंधन के रणधीर सावरकर ने भी आलोचना में साथ दिया।
स्पीकर ने बताया कि मंत्रालय में 110 नौकरशाह हैं, फिर भी सदन में प्रतिनिधित्व शून्य था।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने तत्काल अटेंडेंस रोस्टर लागू करने का आश्वासन दिया।
स्पीकर ने चेतावनी दी कि गैर-हाजिरी जारी रही तो सदन की कार्यवाही स्थगित करने से भी नहीं हिचकेंगे।

महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने 8 जुलाई 2026 को मानसून सत्र के दौरान राज्य सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ नौकरशाहों की बड़े पैमाने पर गैर-हाजिरी पर कड़ी नाराजगी जताई और मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल को आधे घंटे के भीतर सदन के समक्ष उपस्थित होने का असाधारण निर्देश दिया। यह घटना उस समय सामने आई जब विपक्षी सदस्यों ने नियम 293 के तहत एक प्रस्ताव पर बहस के दौरान अधिकारियों की गैलरी और सत्ता पक्ष की बेंचें खाली पाईं।

विवाद की जड़: खाली कुर्सियाँ और नियम 293

कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार और नाना पटोले के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों ने पीठासीन अधिकारी का ध्यान इस ओर खींचा कि संबंधित विभागों के मंत्री और सचिव सदन में अनुपस्थित हैं। अधिकारियों की गैलरी — जो वरिष्ठ नौकरशाहों के लिए आरक्षित होती है ताकि वे मंत्रियों को रियल-टाइम डेटा और नीतिगत सहायता दे सकें — पूरी तरह खाली थी।

उल्लेखनीय यह रहा कि इस आलोचना को केवल विपक्ष का समर्थन नहीं मिला — सत्ताधारी गठबंधन के सदस्य रणधीर सावरकर सहित अन्य ने भी इस लापरवाही की निंदा की। यह दुर्लभ सर्वदलीय एकता इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करती है।

स्पीकर की सख्त कार्रवाई

सदस्यों की माँग पर पीठासीन अधिकारी समीर कुंवर ने कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित की। जब सदन पुनः शुरू हुआ, तो स्पीकर नार्वेकर ने स्वयं कमान संभाली। उन्होंने मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल को तत्काल बुलाया, और निर्देश दिया कि भविष्य में सत्र के दौरान कम से कम अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव स्तर का एक अधिकारी हर हाल में मौजूद रहे।

स्पीकर ने कहा, 'इस सदन की कार्यवाही राज्य के नागरिकों की सर्वोच्च आवाज का प्रतिनिधित्व करती है। यह देखना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि महत्वपूर्ण विभागों का गैलरी में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है और सरकार की तरफ की बेंचें खाली हैं। यह विधायी जवाबदेही के प्रति पूरी तरह से लापरवाही को दर्शाता है।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया: 'विधायी सत्र का कार्यक्रम सचिवों की उपलब्धता के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।' नार्वेकर ने बताया कि मंत्रालय में 110 नौकरशाह कार्यरत हैं, इसके अतिरिक्त सरकारी उपक्रमों और स्थानीय नागरिक निकायों में भी अधिकारी हैं — फिर भी सदन में प्रतिनिधित्व शून्य था।

संसदीय कार्य मंत्री को निर्देश और अंतिम चेतावनी

स्पीकर ने संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल को निर्देश दिया कि वे इस चूक पर तत्काल ध्यान दें और राज्य के सभी प्रशासनिक विभागों को फौरन आदेश जारी करें। उन्होंने मानसून सत्र के शेष भाग के लिए एक कड़ी चेतावनी भी जारी की:

'इसे आखिरी चेतावनी समझें। सरकार को आपस में बेहतर तालमेल बिठाना होगा। सेक्रेटरी विधानसभा के कार्यक्रमों को अपनी मर्जी से नहीं ले सकते। अगर ऐसा दोबारा हुआ, तो मुझे इस विधानसभा की गरिमा बनाए रखने के लिए सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा।'

सरकार की प्रतिक्रिया

स्पीकर की फटकार के बाद, मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल कई वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ अधिकारियों की गैलरी में उपस्थित हुए। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार सुधारात्मक कदम उठाएगी और कैबिनेट मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल एक सख्त अटेंडेंस रोस्टर लागू किया जाएगा।

आगे क्या होगा

यह घटना महाराष्ट्र विधानमंडल में विधायी जवाबदेही को लेकर एक व्यापक बहस को जन्म दे सकती है। गौरतलब है कि स्पीकर ने केवल चेतावनी देने तक सीमित न रहते हुए सदन स्थगित करने की शक्ति का भी उल्लेख किया — जो इस मुद्दे पर उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। मानसून सत्र के शेष दिनों में प्रशासनिक उपस्थिति पर सभी दलों की कड़ी निगाह रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह संकेत है कि समस्या दलीय नहीं, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति की है। मंत्रालय में 110 नौकरशाह होने के बावजूद गैलरी खाली रहना यह दर्शाता है कि विधायी सत्रों को प्रशासनिक कैलेंडर में पर्याप्त महत्व नहीं मिलता। अटेंडेंस रोस्टर का वादा तत्काल राहत दे सकता है, लेकिन असली जवाबदेही तब आएगी जब इसकी निगरानी और उल्लंघन पर वास्तविक परिणाम सुनिश्चित हों।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र विधानसभा में 8 जुलाई को क्या हुआ?
8 जुलाई 2026 को मानसून सत्र के दौरान नियम 293 के तहत बहस के समय मंत्री और वरिष्ठ नौकरशाह अनुपस्थित पाए गए। स्पीकर राहुल नार्वेकर ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई, कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित हुई और मुख्य सचिव को तत्काल तलब किया गया।
स्पीकर राहुल नार्वेकर ने मुख्य सचिव को क्यों बुलाया?
विधानसभा सत्र के दौरान अधिकारियों की गैलरी और सत्ता पक्ष की बेंचें खाली थीं, जो विधायी जवाबदेही का उल्लंघन है। स्पीकर ने इसे 'सर्वोच्च आवाज के प्रति लापरवाही' बताते हुए मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल को 30 मिनट में सदन में उपस्थित होने का निर्देश दिया।
महाराष्ट्र विधानसभा में अधिकारियों की गैलरी क्या होती है?
अधिकारियों की गैलरी वह स्थान है जहाँ वरिष्ठ नौकरशाह बैठकर सत्र के दौरान मंत्रियों को रियल-टाइम डेटा और नीतिगत इनपुट प्रदान करते हैं। इस गैलरी का खाली रहना मंत्रियों को सदन में सवालों का ठोस जवाब देने में असमर्थ बनाता है।
सरकार ने इस मामले में क्या आश्वासन दिया?
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सदन को आश्वस्त किया कि कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल एक सख्त अटेंडेंस रोस्टर लागू किया जाएगा।
क्या स्पीकर ने कोई दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी?
हाँ, स्पीकर नार्वेकर ने इसे 'आखिरी चेतावनी' करार दिया और कहा कि यदि गैर-हाजिरी का सिलसिला जारी रहा तो वे सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाने और आवश्यकता पड़ने पर कार्यवाही स्थगित करने से भी नहीं हिचकेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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