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मराठी वाचन में चूक पर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सदन में माँगी माफी, राज ठाकरे की आलोचना के बाद लिया संज्ञान

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मराठी वाचन में चूक पर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सदन में माँगी माफी, राज ठाकरे की आलोचना के बाद लिया संज्ञान

सारांश

शोक प्रस्ताव में 'दीनानाथ मंगेशकर' को 'दीनदयाल मंगेशकर' पढ़ना महज एक उच्चारण की चूक नहीं थी — यह महाराष्ट्र की भाषाई संवेदनशीलता की आग में घी डालने जैसा था। राज ठाकरे के व्यंग्य और सोशल मीडिया के तूफान के बाद स्पीकर नार्वेकर का सदन में खेद जताना राजनीतिक मजबूरी और व्यक्तिगत जवाबदेही दोनों का मिला-जुला रूप है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बुधवार, 25 जून 2025 को सदन में मराठी वाचन की चूकों पर औपचारिक खेद व्यक्त किया।
विवाद सोमवार, 23 जून को शुरू हुआ जब नार्वेकर ने शोक प्रस्ताव में दीनानाथ मंगेशकर का नाम गलती से 'दीनदयाल मंगेशकर' पढ़ दिया।
नार्वेकर ने कहा कि उन्हें दिए गए 12 शोक प्रस्तावों का प्रिंटआउट धुंधला था और फ़ॉन्ट बेहद छोटा था।
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी कर घटना को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।
शिवसेना (UBT) विधायक अजय चौधरी ने गलत पाठ उपलब्ध कराने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की।

महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बुधवार, 25 जून 2025 को सदन में खड़े होकर गहरा खेद व्यक्त किया — यह खेद सोमवार, 23 जून को शोक प्रस्ताव पढ़ते समय मराठी उच्चारण और वाचन में हुई चूकों को लेकर था। सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे की कटु टिप्पणी के बाद नार्वेकर ने स्पष्ट किया कि ये त्रुटियाँ पूरी तरह अनजाने में हुईं और उनका आशय किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था।

विवाद कैसे शुरू हुआ

विवाद सोमवार को उस समय भड़का जब नार्वेकर विधानसभा में दिवंगत पार्श्व गायिका आशा भोसले और राजनीतिक विचारक दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि देने के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ रहे थे। इस दौरान उन्होंने मराठी पाठ में कई उच्चारण और तथ्यात्मक गलतियाँ कर दीं। सबसे अधिक चर्चित वह क्षण रहा जब उन्होंने आशा भोसले के पिता और प्रख्यात संगीतज्ञ दीनानाथ मंगेशकर का नाम गलती से 'दीनदयाल मंगेशकर' पढ़ दिया।

यह चूक सदन में तत्काल नोटिस में आई और देखते-देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। आलोचकों का कहना है कि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक महान विभूति के नाम की ऐसी भूल विधानसभा की गरिमा के अनुकूल नहीं है।

स्पीकर का स्पष्टीकरण

नार्वेकर ने सदन को बताया कि उन्हें कुल 12 शोक प्रस्ताव पढ़ने थे और जो प्रिंटआउट उपलब्ध कराया गया था, उसकी छपाई धुंधली थी, फ़ॉन्ट का आकार बेहद छोटा था और उसमें तकनीकी एवं मुद्रण संबंधी खामियाँ भी थीं। उन्होंने कहा, 'मुझे मराठी भाषा पर गर्व है और मैं उसका सम्मान करता हूँ। पिछले चार वर्षों में विधानसभा अध्यक्ष के रूप में मैंने मराठी में अनेक भाषण दिए हैं और सदन की कार्यवाही का सफलतापूर्वक संचालन किया है। कोई भी व्यक्ति, विशेषकर विधानसभा अध्यक्ष, आशा ताई भोसले जैसी महान विभूति का अपमान करने की कल्पना भी नहीं कर सकता। जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह अनजाने में हुई गलती थी। फिर भी यदि राज्य के नागरिकों या सदन के सदस्यों की भावनाएँ आहत हुई हैं तो मैं इसके लिए ईमानदारी से खेद व्यक्त करता हूँ।'

राज ठाकरे और विपक्ष की प्रतिक्रिया

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने इस घटना पर तीखा हमला बोला और कहा कि इतने गंभीर अवसर पर भाषा की ऐसी दुर्दशा दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में टिप्पणी की कि ऐसा लग रहा था मानो स्पीकर को दिया गया कागज पहले किसी ने भेल खाने के लिए इस्तेमाल कर लिया हो।

बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने यह मुद्दा उठाया। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक अजय चौधरी ने माँग की कि स्पीकर को गलत और त्रुटिपूर्ण पाठ उपलब्ध कराने वालों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि इससे विधानसभा की गरिमा और अध्यक्ष की प्रतिष्ठा दोनों प्रभावित हुई हैं।

आम जनता और सोशल मीडिया पर असर

घटना के वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैले और मराठी भाषा-प्रेमियों में तीव्र प्रतिक्रिया देखी गई। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में मराठी भाषा और संस्कृति को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता पहले से ऊँची है। गौरतलब है कि दीनानाथ मंगेशकर मराठी संगीत के एक स्तंभ हैं और उनके परिवार को महाराष्ट्र में अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।

आगे क्या होगा

नार्वेकर ने संकेत दिया कि वे इस प्रकार की तकनीकी चूकों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाएँगे। विपक्ष की माँग है कि दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। यह प्रकरण महाराष्ट्र विधानसभा में मराठी भाषा की शुद्धता और प्रशासनिक तैयारी पर बहस को नई धार दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल प्रशासनिक विफलता का है — विधानसभा जैसी संस्था में स्पीकर को धुंधले और त्रुटिपूर्ण प्रिंटआउट देना गंभीर लापरवाही है। यह प्रकरण केवल एक भाषाई भूल नहीं, बल्कि विधानसभा सचिवालय की तैयारी पर सवाल उठाता है। महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता एक अत्यंत संवेदनशील राजनीतिक विषय है, और मंगेशकर परिवार के नाम की चूक ने इस संवेदनशीलता को छू लिया। विपक्ष की जवाबदेही माँग उचित है, परंतु यह भी देखना होगा कि यह मुद्दा राजनीतिक अवसरवाद में न बदल जाए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल नार्वेकर ने विधानसभा में किस बात पर खेद जताया?
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सोमवार, 23 जून को शोक प्रस्ताव पढ़ते समय मराठी उच्चारण और वाचन में हुई गलतियों पर बुधवार को सदन में खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि त्रुटियाँ पूरी तरह अनजाने में हुईं और उनका आशय किसी का अपमान करना नहीं था।
शोक प्रस्ताव में कौन-सी बड़ी गलती हुई थी?
नार्वेकर ने पार्श्व गायिका आशा भोसले के पिता और प्रख्यात संगीतज्ञ दीनानाथ मंगेशकर का नाम गलती से 'दीनदयाल मंगेशकर' पढ़ दिया, जो सबसे अधिक चर्चित चूक रही। इसके अलावा कई उच्चारण संबंधी गलतियाँ भी हुईं।
राज ठाकरे ने इस मामले पर क्या कहा?
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने तीखी आलोचना करते हुए कहा कि इतने गंभीर अवसर पर भाषा की ऐसी दुर्दशा दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि ऐसा लग रहा था मानो स्पीकर को दिया गया कागज पहले किसी ने भेल खाने के लिए इस्तेमाल कर लिया हो।
नार्वेकर ने गलती का कारण क्या बताया?
नार्वेकर ने कहा कि उन्हें दिए गए 12 शोक प्रस्तावों का प्रिंटआउट धुंधला था, फ़ॉन्ट का आकार बेहद छोटा था और उसमें तकनीकी एवं मुद्रण संबंधी खामियाँ थीं, जिस कारण पढ़ते समय अनजाने में गलतियाँ हो गईं।
विपक्ष ने इस मामले में क्या माँग की है?
शिवसेना (UBT) विधायक अजय चौधरी ने माँग की कि स्पीकर को गलत और त्रुटिपूर्ण पाठ उपलब्ध कराने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि इस चूक से विधानसभा की गरिमा और अध्यक्ष की प्रतिष्ठा दोनों प्रभावित हुई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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