मुंबई बिजली संकट: विधानसभा में हंगामा, स्पीकर नार्वेकर ने बीईएसटी को लगाई कड़ी फटकार
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र विधानसभा में 30 जून 2026 को उस वक्त जबरदस्त सियासी हंगामा हुआ जब दक्षिण और मध्य मुंबई में 8 से 12 घंटे तक बार-बार बिजली गुल होने का मुद्दा सदन में गूंजा। सत्ता पक्ष और विपक्ष — दोनों के विधायकों ने एकजुट होकर बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (बीईएसटी) की विफलताओं पर सरकार को घेरा।
सदन में क्या हुआ
विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने स्थिति की गंभीरता को भाँपते हुए तत्काल कदम उठाया। उन्होंने बीईएसटी प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि बिजली नेटवर्क में बार-बार आने वाली खराबी भारत की वाणिज्यिक और वित्तीय राजधानी के रूप में मुंबई की साख को गंभीर नुकसान पहुँचाती है। नार्वेकर ने स्पष्ट किया कि क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग के कारण बढ़ते थर्मल स्ट्रेस से निपटने के लिए बीईएसटी को अपना बुनियादी ढाँचा पहले ही अपग्रेड कर लेना चाहिए था।
स्पीकर ने बीईएसटी अधिकारियों को तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों और कॉल सेंटर के रिस्पॉन्स टाइम पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्होंने भविष्य में बिजली आपूर्ति सुधारने के लिए एक ठोस रोडमैप पेश करने को कहा।
आपातकालीन बैठक का आदेश
नार्वेकर ने विधान भवन में एक आपातकालीन संयुक्त बैठक बुलाई, जिसमें शहर के निर्वाचित प्रतिनिधि, बीईएसटी के जनरल मैनेजर, बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी) कमिश्नर, वरिष्ठ अधिकारी और राज्य सरकार के प्रतिनिधि शामिल होंगे। प्रशासन को ग्रिड दुरुस्त करने के लिए एक विस्तृत, समय-सीमाबद्ध रोडमैप प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
विधायकों की तीखी आलोचना
यह हंगामा कांग्रेस विधायक अमीन पटेल (मुंबादेवी) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक कैप्टन आर. तमिल सेल्वन (सायन कोलीवाड़ा) द्वारा संयुक्त रूप से लाए गए 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' पर बहस के दौरान भड़का।
सेल्वन ने कहा कि बिना पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति ठप होने से आम नागरिकों और छोटे कारोबारियों को भारी आर्थिक और शारीरिक कष्ट हो रहा है। पटेल ने बीईएसटी के शीर्ष प्रबंधन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बिजली कटौती के दौरान न तो जनरल मैनेजर और न ही वरिष्ठ इंजीनियर जनप्रतिनिधियों के फोन का जवाब देते हैं।
पटेल ने यह भी बताया कि बीईएसटी गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है, जिसके चलते वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए आवश्यक फंड की भारी कमी है। उन्होंने पुरानी भूमिगत केबलों में खराबी पकड़ने और उन्हें ठीक करने में होने वाली व्यवस्थागत देरी की कड़ी आलोचना की। पटेल ने माँग की कि बीईएसटी तत्काल मोबाइल जनरेटर यूनिट्स की एक फ्लीट तैनात करे और खराबी का तेज़ पता लगाने के लिए एडवांस्ड फॉल्ट-फाइंडिंग तकनीक अपनाए।
संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हुए पटेल ने सदन को बताया कि अचानक बिजली ट्रिप होने की एक घटना के बाद समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ढाई घंटे से अधिक समय तक लिफ्ट में फंसे रहे।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार की ओर से जवाब देते हुए शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसल ने माना कि बिजली लोड में भारी वृद्धि के कारण बड़े पैमाने पर ट्रिपिंग और आपूर्ति में रुकावटें आईं। मिसल ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार ने विधायकों की नाराज़गी को गंभीरता से लिया है और बीईएसटी वितरण नेटवर्क को अपग्रेड व आधुनिक बनाने के लिए उच्च प्राथमिकता वाले उपाय लागू कर रहा है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मुंबई की बिजली व्यवस्था विधानसभा में सवालों के घेरे में आई हो। बीईएसटी का वित्तीय संकट और पुराना पड़ता बुनियादी ढाँचा लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं। आपातकालीन बैठक के नतीजे और बीईएसटी का समय-सीमाबद्ध रोडमैप यह तय करेगा कि इस बार सियासी दबाव ज़मीनी बदलाव में तब्दील होता है या नहीं।