हरमनप्रीत सिंह बोले — मनप्रीत के साथ जूनियर से बना भरोसा वर्ल्ड कप में होगा असली ताकत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने 15 अगस्त को कहा कि सीनियर मिडफील्डर मनप्रीत सिंह के साथ जूनियर स्तर से बना गहरा व्यक्तिगत और खेल-संबंधी जुड़ाव एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप 2026 से पहले टीम की स्थिरता की सबसे बड़ी बुनियाद है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी दबाव के क्षणों में पूरे दल को शांत और केंद्रित रखती है।
जूनियर दिनों से बना अटूट बॉन्ड
हरमनप्रीत ने जियोस्टार पर कहा, 'मनप्रीत हमारे सीनियर रहे हैं। हम जूनियर्स से ही साथ हैं। तब से लेकर अब तक, वह बॉन्ड, भरोसा और समझ बहुत मजबूत रही है। हम इतने सालों से साथ खेल रहे हैं, और मैं बस उन्हें मुझ पर भरोसा और विश्वास दिखाने के लिए धन्यवाद कहना चाहता हूं। यह जान-पहचान मैच के हालात से भी आगे तक जाती है।'
यह रिश्ता केवल मैदान तक सीमित नहीं है। हरमनप्रीत ने बताया कि अनुभवी खिलाड़ियों का यह समूह ट्रेनिंग सेशन के बाहर भी एक साथ समय बिताता है, जिससे आपसी तालमेल और भी स्वाभाविक हो जाता है।
मैदान पर आँखों से होती है बात
कप्तान ने कहा, 'यहाँ तक कि जब हम घर जाते हैं, ट्रेनिंग सेशन के दौरान, हम ज़्यादातर साथ होते हैं — मैं, मनप्रीत, मंदीप, दिलप्रीत। जब कैंप में होते हैं, तो हम स्वाभाविक रूप से साथ रहते हैं।'
हरमनप्रीत के अनुसार, यही निकटता मैदान पर तत्काल संवाद को संभव बनाती है। उन्होंने कहा, 'मैदान पर, डिफेंडर और मिडफील्डर के बीच समझ बहुत अच्छी है। हम जानते हैं कि कुछ खास हालात में कैसे पास देना है — आँखों में देखने से ही काम हो जाता है। हम डिफेंस में भी करीब रहते हैं, इसलिए कोई कम्युनिकेशन गैप नहीं है।'
अनुभव का मोल — चौथा और तीसरा वर्ल्ड कप
हरमनप्रीत ने बताया कि भारतीय टीम के कई सीनियर सदस्य बड़े टूर्नामेंट के दबाव को पहले भी झेल चुके हैं। उन्होंने कहा, 'मनप्रीत और मंदीप के लिए यह उनका चौथा वर्ल्ड कप है। मेरे लिए यह तीसरा है। जब कोई सीनियर खिलाड़ी मुश्किल हालात में आगे आता है, तो इससे टीम में आत्मविश्वास आता है।'
गौरतलब है कि बड़े टूर्नामेंट में अनुभव की यह गहराई भारतीय हॉकी के लिए दुर्लभ रही है। ऐसे में इन खिलाड़ियों का एक साथ मौजूद होना कोचिंग स्टाफ के लिए भी बड़ी राहत है।
नेतृत्व का बोझ बँटा हुआ
हरमनप्रीत ने टीम के एक ही हिस्से पर नेतृत्व की जिम्मेदारी डालने के बजाय विभिन्न विभागों में अनुभवी खिलाड़ियों की उपस्थिति को ज़रूरी बताया। उनके अनुसार, इस संतुलन से भारत के पास जरूरत पड़ने पर जिम्मेदारी संभालने में सक्षम कई विकल्प मौजूद हैं।
1975 के बाद पदक का लक्ष्य
दोनों अनुभवी खिलाड़ियों ने हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में भारत को 1975 के बाद पहली बार पदक दिलाने के लिए पूरी ताकत झोंकने का संकल्प जताया है। यह टूर्नामेंट भारतीय हॉकी के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बन सकता है, और हरमनप्रीत-मनप्रीत की जोड़ी उस सपने की रीढ़ मानी जा रही है।