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हरमनप्रीत सिंह का वर्ल्ड कप पर बड़ा बयान: '51 साल का इंतजार खत्म करने का वक्त आ गया'

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हरमनप्रीत सिंह का वर्ल्ड कप पर बड़ा बयान: '51 साल का इंतजार खत्म करने का वक्त आ गया'

सारांश

51 साल का इंतजार, दो ओलंपिक पदक और एक कप्तान जो हार मानने को तैयार नहीं — हरमनप्रीत सिंह ने साफ कहा है कि यह टीम वर्ल्ड कप ट्रॉफी के लिए ही उतर रही है। अंडरडॉग का तमगा? उनके लिए यह बोझ नहीं, हथियार है।

मुख्य बातें

भारतीय हॉकी कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप जीतने का संकल्प जताया।
भारत ने आखिरी बार 1975 में पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप जीता था — यह सूखा 51 साल पुराना है।
टीम टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में लगातार कांस्य पदक जीत चुकी है।
हरमनप्रीत ने कहा टीम अंडरडॉग के रूप में उतरेगी, जिसे वे अपने पक्ष में मानते हैं।
टीम ने फुल प्रेस, हाफ-कोर्ट प्रेस और लो प्रेस — तीनों डिफेंसिव प्रणालियों पर गहन अभ्यास किया है।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप को लेकर अपना दृढ़ संकल्प जाहिर किया है — उनका कहना है कि यह टीम 1975 के बाद से चले आ रहे 51 साल के खिताबी सूखे को समाप्त करने के लिए पूरी तरह तैयार है। जियोस्टार से बातचीत में हरमनप्रीत ने कहा कि मौजूदा दस्ते में अनुभव और आत्मविश्वास दोनों हैं, और यही दोनों चीजें किसी भी बड़े टूर्नामेंट में निर्णायक साबित होती हैं।

वर्ल्ड कप क्यों है इस टीम के लिए सबसे अहम

हरमनप्रीत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'वर्ल्ड कप हम सभी के लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि इस वर्ल्ड कप के बाद, आपको कभी नहीं पता होता कि क्या हो सकता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि टीम में कई सीनियर खिलाड़ी हैं, इसलिए यह टूर्नामेंट उनके करियर का एक बेहद खास पड़ाव है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय हॉकी टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में लगातार कांस्य पदक जीतकर नई ऊँचाइयों पर है।

अंडरडॉग भूमिका को बना रहे हथियार

कप्तान ने माना कि भारत इस प्रतियोगिता में अंडरडॉग के रूप में उतरेगा, लेकिन उनके अनुसार यह स्थिति टीम के पक्ष में भी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उम्मीदों का बोझ उठाने के बजाय, टीम इस टूर्नामेंट को विश्व मंच पर अपनी काबिलियत साबित करने के एक बड़े अवसर के रूप में देख रही है। हरमनप्रीत के शब्दों में — 'यह सफर मुश्किल होगा, लेकिन हम तैयार हैं।'

टीम एकता और सामूहिक जिम्मेदारी

हरमनप्रीत ने टीम की सामूहिक सोच पर जोर देते हुए कहा, 'टीम एक-दूसरे पर भरोसा करती है और हमारी सोच सकारात्मक है। कौन स्कोर करता है या कौन डिफेंड करता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, जब तक हम एक टीम के तौर पर जीतते हैं।' गौरतलब है कि यह सामूहिक दृष्टिकोण ही टोक्यो और पेरिस में भारत की सफलता की बुनियाद रहा है।

डिफेंस पर टिकी है रणनीति

कप्तान ने बताया कि भारत की तैयारियों का सबसे बड़ा हिस्सा डिफेंसिव सिस्टम को मजबूत करने पर केंद्रित रहा है। टीम ने फुल प्रेस, हाफ-कोर्ट प्रेस और लो प्रेस — तीनों स्थितियों के लिए गहन अभ्यास किया है। हरमनप्रीत का मानना है कि एक अनुशासित डिफेंसिव ढाँचा टीम को विरोधी सर्कल में बार-बार दबाव बनाने और पेनल्टी कॉर्नर व गोल के मौके तैयार करने का प्लेटफॉर्म देगा।

51 साल का इंतजार और मौजूदा टीम की क्षमता

भारत ने आखिरी बार 1975 में पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप जीता था। तब से अब तक 51 वर्ष बीत चुके हैं और यह खिताबी सूखा हर हॉकी प्रेमी के मन में एक टीस बनकर बैठा है। हरमनप्रीत का कहना है कि मौजूदा टीम के पास इस सूखे को खत्म करने के लिए जरूरी अनुभव, आत्मविश्वास और तैयारी — तीनों हैं। अब देखना यह होगा कि मैदान पर यह संकल्प किस रूप में साकार होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारतीय हॉकी का ढाँचा वर्ल्ड कप के दबाव में टिक पाएगा — जहाँ नेदरलैंड्स, ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम जैसी टीमें हर टूर्नामेंट में खिताब की प्रबल दावेदार होती हैं। टोक्यो और पेरिस के कांस्य पदक टीम की प्रगति के प्रमाण हैं, पर ओलंपिक में पदक और वर्ल्ड कप खिताब के बीच की खाई बड़ी है। डिफेंस-फर्स्ट रणनीति नॉकआउट चरणों में कारगर हो सकती है, लेकिन भारत को आक्रामक मोर्चे पर भी निरंतरता दिखानी होगी — जो पिछले कुछ बड़े टूर्नामेंटों में अनिश्चित रही है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरमनप्रीत सिंह ने एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप को लेकर क्या कहा?
हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि वर्ल्ड कप टीम के हर सदस्य के लिए बेहद अहम है और उन्हें पूरा भरोसा है कि भारत इस बार ट्रॉफी घर ला सकता है। उन्होंने कहा कि टीम ने जितनी मेहनत और ट्रेनिंग की है, उससे वे आश्वस्त हैं।
भारत ने आखिरी बार हॉकी वर्ल्ड कप कब जीता था?
भारत ने आखिरी बार 1975 में पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप जीता था। तब से अब तक 51 साल बीत चुके हैं और यह खिताबी सूखा भारतीय हॉकी की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भारतीय हॉकी टीम की वर्ल्ड कप रणनीति क्या है?
कप्तान हरमनप्रीत सिंह के अनुसार टीम की रणनीति मजबूत डिफेंस पर टिकी है। टीम ने फुल प्रेस, हाफ-कोर्ट प्रेस और लो प्रेस — तीनों प्रणालियों पर गहन अभ्यास किया है ताकि विरोधी सर्कल में अधिक मौके बनाए जा सकें।
हरमनप्रीत सिंह ने अंडरडॉग भूमिका के बारे में क्या कहा?
हरमनप्रीत ने माना कि भारत इस टूर्नामेंट में अंडरडॉग के तौर पर उतरेगा, लेकिन उनका कहना है कि यह स्थिति टीम के पक्ष में जा सकती है। उम्मीदों के बोझ से मुक्त होकर टीम अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
टोक्यो और पेरिस ओलंपिक के पदक भारतीय हॉकी के लिए क्यों अहम हैं?
टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 में लगातार कांस्य पदक जीतकर भारत ने साबित किया कि वह विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी टीम बन चुकी है। हरमनप्रीत के अनुसार ये पदक टीम के लिए बड़ी प्रेरणा हैं और वर्ल्ड कप में बेहतर प्रदर्शन की नींव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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