मां कुटेटी देवी मंदिर: उत्तरकाशी की आराध्य शक्तिपीठ, मनोकामना पूरी होने पर भक्त चढ़ाते हैं घंटी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित मां कुटेटी देवी मंदिर देवभूमि के सबसे प्रसिद्ध और पौराणिक सिद्धपीठों में से एक है, जहाँ मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु माता के दरबार में घंटी अर्पित करते हैं। माता आदिशक्ति को समर्पित यह पवित्र स्थल अपनी अनूठी लोक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और दिव्य वातावरण के लिए पूरे देश में विख्यात है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए श्रद्धालुओं को इस शांत तीर्थस्थल के दर्शन का निमंत्रण दिया।
मुख्यमंत्री धामी का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'उत्तरकाशी की खूबसूरत घाटियों के बीच बसा मां कुटेटी देवी मंदिर आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक शांति का एक शानदार संगम है। मां आदि शक्ति को समर्पित यह पवित्र मंदिर अपनी प्राचीन धार्मिक मान्यताओं, दिव्य माहौल और प्राकृतिक सुंदरता के लिए खास पहचान रखता है। उत्तरकाशी जिले में आने पर, इस पवित्र मंदिर के दर्शन जरूर करें।' उनकी इस पोस्ट ने मंदिर की ओर श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान नए सिरे से आकर्षित किया है।
मंदिर की पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मान्यता के अनुसार, मां कुटेटी देवी मूलतः राजस्थान के कोटा-बूंदी राजघराने की कुलदेवी थीं। पौराणिक कथा के अनुसार, कोटा के महाराजा गंगा यात्रा के दौरान उत्तरकाशी आए और उनका बैग खो गया। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में मनौती माँगी कि बैग मिलने पर वे अपनी पुत्री का विवाह यहीं के किसी योग्य युवक से करेंगे।
बैग मिलने पर राजकुमारी का विवाह वहीं हुआ, परंतु अपनी कुलदेवी से दूर होने के कारण वह विरह-व्यथित रहने लगीं। तब कथित तौर पर देवी ने स्वप्न में दर्शन देकर खेतों में तीन सुगंधित पत्थरों के रूप में प्रकट होने का संकेत दिया। उसी स्थान पर इस मंदिर की स्थापना हुई। मंदिर में विराजमान माता को माता राजेश्वरी के नाम से भी पूजा जाता है।
मंदिर की विशेषताएँ और श्रद्धा परंपरा
मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 50 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। यहाँ की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि जब भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है, वह माँ के दरबार में कृतज्ञता स्वरूप घंटी चढ़ाता है। मंदिर परिसर में इस कारण अनगिनत घंटियाँ एकत्रित हैं, जो यहाँ की सामूहिक आस्था की साक्षी हैं।
आस्था के अनुसार, इस सिद्धपीठ में दर्शन और पूजा-अर्चना से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं, और विशेष रूप से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है।
नवरात्रि पर्व पर विशेष श्रद्धा
नवरात्रि, अष्टमी और नवमी के अवसर पर यहाँ देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब शारदीय नवरात्रि निकट है और उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की सरकारी कोशिशें तेज़ हुई हैं। गौरतलब है कि देवभूमि उत्तराखंड में इस प्रकार के सिद्धपीठ न केवल आध्यात्मिक महत्त्व के केंद्र हैं, बल्कि स्थानीय आजीविका और पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण आधार हैं।
आगामी दर्शन और संपर्क
मंदिर उत्तरकाशी जिला मुख्यालय के समीप स्थित है और सड़क मार्ग से सुलभ है। शारदीय नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्था की जाती है। उत्तराखंड सरकार की बढ़ती सक्रियता से इस ऐतिहासिक तीर्थस्थल को और अधिक पहचान मिलने की उम्मीद है।