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नवरात्रि 2026: उत्तर प्रदेश के 5 प्रमुख शक्तिपीठ जहां विराजती हैं माता रानी के विशेष स्वरूप

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नवरात्रि 2026: उत्तर प्रदेश के 5 प्रमुख शक्तिपीठ जहां विराजती हैं माता रानी के विशेष स्वरूप

सारांश

नवरात्रि पर उत्तर प्रदेश के पाँच प्रमुख शक्तिपीठ — वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, वृंदावन और बलरामपुर — फिर से लाखों श्रद्धालुओं से भर उठेंगे। माता सती के अंगों से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं इन धामों को विशेष बनाती हैं, जहाँ देवी के अनेक स्वरूप विराजते हैं।

मुख्य बातें

नवरात्रि 2026 में उत्तर प्रदेश के पाँच प्रमुख शक्तिपीठों पर लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के पास स्थित मां विशालाक्षी मंदिर को शक्तिपीठों में विशेष दर्जा प्राप्त है।
प्रयागराज में मां ललिता देवी , मां कल्याणी देवी और मां अलोपी देवी के तीन प्रमुख मंदिर आस्था के केंद्र हैं।
चित्रकूट के रामगिरि शक्तिपीठ में माता को मां शिवानी और वृंदावन में मां कात्यायनी के रूप में पूजा जाता है।
बलरामपुर के तुलसीपुर स्थित देवीपाटन मंदिर भारत-नेपाल सीमा के पास का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है।

नवरात्रि के पावन पर्व पर उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, वृंदावन और बलरामपुर जैसे तीर्थस्थलों पर देवी के ये धाम पौराणिक मान्यताओं के कारण भक्तों के बीच विशेष आस्था के केंद्र हैं।

शक्तिपीठों की पौराणिक पृष्ठभूमि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सती के शरीर के अंग और आभूषण जहाँ-जहाँ गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। इन स्थानों को देवी शक्ति का साक्षात् निवास माना जाता है। उत्तर प्रदेश में ऐसे कई शक्तिपीठ हैं जो सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहे हैं।

वाराणसी: मां विशालाक्षी का धाम

काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। यहाँ मणिकर्णिका घाट के समीप मां विशालाक्षी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जिसे शक्तिपीठों में विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर माता सती के कुंडल या मणिकर्णिका से संबंधित अंग गिरे थे। नवरात्रि के दौरान यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

प्रयागराज: मां ललिता, कल्याणी और अलोपी देवी

प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम का अपना विशेष धार्मिक महत्व है। यहाँ मां ललिता देवी का मंदिर प्रसिद्ध शक्तिधामों में गिना जाता है — मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती की अंगुली गिरी थी। इसके अतिरिक्त मां कल्याणी देवी और मां अलोपी देवी के मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। नवरात्रि में इन तीनों मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।

चित्रकूट और वृंदावन के शक्तिपीठ

चित्रकूट भगवान राम की तपःस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ रामगिरि क्षेत्र में स्थित शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि माता सती का वक्ष यहाँ गिरा था; देवी को यहाँ मां शिवानी के रूप में भी पूजा जाता है। वहीं वृंदावन — भगवान श्रीकृष्ण की नगरी — में मां कात्यायनी का प्रसिद्ध मंदिर है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहाँ माता सती के केश या चूड़ामणि गिरे थे। नवरात्रि में भक्त मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

बलरामपुर: देवीपाटन — भारत-नेपाल सीमा का तीर्थस्थल

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले के तुलसीपुर में स्थित देवीपाटन मंदिर मां पाटेश्वरी को समर्पित है। यह मंदिर भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर माता सती का स्कंध अर्थात् कंधा गिरा था। नवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष पूजा आयोजित होती है और दूरदराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं।

इस नवरात्रि में उत्तर प्रदेश के ये पाँचों शक्तिपीठ एक बार फिर लाखों भक्तों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र बनेंगे, जो माता रानी के अलग-अलग रूपों की आराधना में लीन होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य के सांस्कृतिक और पर्यटन मानचित्र के अहम स्तंभ भी हैं। नवरात्रि जैसे पर्वों पर लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलता है, परंतु बुनियादी ढाँचे और भीड़ प्रबंधन की चुनौतियाँ हर वर्ष बनी रहती हैं। यह ऐसे समय में मायने रखता है जब सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काशी और अयोध्या जैसे शहरों में भारी निवेश कर रही है। इन शक्तिपीठों तक पहुँच सुगम बनाने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवरात्रि में उत्तर प्रदेश के कौन-से प्रमुख शक्तिपीठ दर्शनीय हैं?
नवरात्रि में उत्तर प्रदेश के पाँच प्रमुख शक्तिपीठ — वाराणसी में मां विशालाक्षी, प्रयागराज में मां ललिता देवी, चित्रकूट में मां शिवानी, वृंदावन में मां कात्यायनी और बलरामपुर के तुलसीपुर में देवीपाटन — दर्शनीय हैं। इन सभी स्थानों पर नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा और अनुष्ठान आयोजित होते हैं।
शक्तिपीठ क्या होते हैं और ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सती के शरीर के अंग और आभूषण जिन स्थानों पर गिरे, वे शक्तिपीठ कहलाए और देवी शक्ति के साक्षात् निवास माने जाते हैं। ये तीर्थस्थल सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र रहे हैं और नवरात्रि में यहाँ विशेष धार्मिक महत्व और भीड़ होती है।
वाराणसी में मां विशालाक्षी का मंदिर कहाँ स्थित है?
मां विशालाक्षी का प्रसिद्ध मंदिर वाराणसी में मणिकर्णिका घाट के समीप स्थित है। इसे शक्तिपीठों में विशेष स्थान प्राप्त है और मान्यता है कि यहाँ माता सती के कुंडल या मणिकर्णिका से संबंधित अंग गिरे थे।
देवीपाटन मंदिर कहाँ स्थित है और क्यों प्रसिद्ध है?
देवीपाटन मंदिर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले के तुलसीपुर में, भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित है। यह मां पाटेश्वरी को समर्पित है और मान्यता है कि यहाँ माता सती का स्कंध (कंधा) गिरा था, जिससे यह एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ बना।
प्रयागराज में नवरात्रि पर कौन-से देवी मंदिर प्रमुख हैं?
प्रयागराज में नवरात्रि पर मां ललिता देवी, मां कल्याणी देवी और मां अलोपी देवी के मंदिर प्रमुख तीर्थस्थल हैं। मां ललिता देवी के मंदिर को शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्त है और मान्यता है कि यहाँ माता सती की अंगुली गिरी थी।
राष्ट्र प्रेस
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