नवरात्रि 2026: उत्तर प्रदेश के 5 प्रमुख शक्तिपीठ जहां विराजती हैं माता रानी के विशेष स्वरूप
सारांश
मुख्य बातें
नवरात्रि के पावन पर्व पर उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, वृंदावन और बलरामपुर जैसे तीर्थस्थलों पर देवी के ये धाम पौराणिक मान्यताओं के कारण भक्तों के बीच विशेष आस्था के केंद्र हैं।
शक्तिपीठों की पौराणिक पृष्ठभूमि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सती के शरीर के अंग और आभूषण जहाँ-जहाँ गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। इन स्थानों को देवी शक्ति का साक्षात् निवास माना जाता है। उत्तर प्रदेश में ऐसे कई शक्तिपीठ हैं जो सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहे हैं।
वाराणसी: मां विशालाक्षी का धाम
काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। यहाँ मणिकर्णिका घाट के समीप मां विशालाक्षी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जिसे शक्तिपीठों में विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर माता सती के कुंडल या मणिकर्णिका से संबंधित अंग गिरे थे। नवरात्रि के दौरान यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
प्रयागराज: मां ललिता, कल्याणी और अलोपी देवी
प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम का अपना विशेष धार्मिक महत्व है। यहाँ मां ललिता देवी का मंदिर प्रसिद्ध शक्तिधामों में गिना जाता है — मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती की अंगुली गिरी थी। इसके अतिरिक्त मां कल्याणी देवी और मां अलोपी देवी के मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। नवरात्रि में इन तीनों मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।
चित्रकूट और वृंदावन के शक्तिपीठ
चित्रकूट भगवान राम की तपःस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ रामगिरि क्षेत्र में स्थित शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि माता सती का वक्ष यहाँ गिरा था; देवी को यहाँ मां शिवानी के रूप में भी पूजा जाता है। वहीं वृंदावन — भगवान श्रीकृष्ण की नगरी — में मां कात्यायनी का प्रसिद्ध मंदिर है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहाँ माता सती के केश या चूड़ामणि गिरे थे। नवरात्रि में भक्त मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
बलरामपुर: देवीपाटन — भारत-नेपाल सीमा का तीर्थस्थल
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले के तुलसीपुर में स्थित देवीपाटन मंदिर मां पाटेश्वरी को समर्पित है। यह मंदिर भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर माता सती का स्कंध अर्थात् कंधा गिरा था। नवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष पूजा आयोजित होती है और दूरदराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
इस नवरात्रि में उत्तर प्रदेश के ये पाँचों शक्तिपीठ एक बार फिर लाखों भक्तों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र बनेंगे, जो माता रानी के अलग-अलग रूपों की आराधना में लीन होंगे।