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उत्तर प्रदेश के 5 प्रमुख शक्तिपीठ: नवरात्रि में वाराणसी से बलरामपुर तक माता के ये पावन धाम

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उत्तर प्रदेश के 5 प्रमुख शक्तिपीठ: नवरात्रि में वाराणसी से बलरामपुर तक माता के ये पावन धाम

सारांश

नवरात्रि में उत्तर प्रदेश के पाँच प्रमुख शक्तिपीठ — वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, वृंदावन और बलरामपुर — श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र बनते हैं। इन स्थानों पर माता सती के विभिन्न अंग गिरने की पौराणिक मान्यता इन्हें 51 शक्तिपीठों में विशेष स्थान दिलाती है।

मुख्य बातें

51 शक्तिपीठों में से कई उत्तर प्रदेश में स्थित हैं — वाराणसी , प्रयागराज , चित्रकूट , वृंदावन और बलरामपुर प्रमुख हैं।
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के पास स्थित मां विशालाक्षी मंदिर में माता सती के कुंडल या मणिकर्णिका गिरने की मान्यता है।
प्रयागराज में मां ललिता देवी , कल्याणी देवी और अलोपी देवी — तीन प्रमुख शक्तिधाम संगम नगरी में हैं।
चित्रकूट के रामगिरि क्षेत्र में मां शिवानी के रूप में देवी की पूजा होती है; मान्यता है कि माता सती का वक्ष यहाँ गिरा था।
बलरामपुर के तुलसीपुर में देवीपाटन मंदिर भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित है और मां पाटेश्वरी को समर्पित है।

नवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। 51 शक्तिपीठों में से कई यूपी की धरती पर स्थित हैं — वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, वृंदावन और बलरामपुर के ये तीर्थस्थल मां दुर्गा की आस्था के सबसे बड़े केंद्र माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जहाँ-जहाँ माता सती के शरीर के अंग और आभूषण गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।

वाराणसी: मां विशालाक्षी का धाम

काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। यहाँ मणिकर्णिका घाट के समीप स्थित मां विशालाक्षी मंदिर को शक्तिपीठों में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस स्थान पर माता सती के कुंडल या मणिकर्णिका से संबंधित अंग गिरे थे।

मां विशालाक्षी को देवी शक्ति के स्वरूप में पूजा जाता है। नवरात्रि के दौरान यहाँ बड़ी संख्या में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं।

प्रयागराज: मां ललिता देवी, कल्याणी देवी और अलोपी देवी

प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम का विशेष धार्मिक महत्व है। यहाँ स्थित मां ललिता देवी मंदिर प्रसिद्ध शक्तिधामों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस पवित्र भूमि पर माता सती की अंगुली गिरी थी।

इसके अतिरिक्त मां कल्याणी देवी और अलोपी देवी के मंदिर भी यहाँ श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। नवरात्रि में इन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

चित्रकूट: मां शिवानी का शक्तिपीठ

चित्रकूट भगवान राम से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के लिए सुप्रसिद्ध है। यहाँ रामगिरि क्षेत्र में स्थित शक्तिपीठ के विषय में मान्यता है कि माता सती का वक्ष इस स्थान पर गिरा था। देवी को यहाँ मां शिवानी के रूप में पूजा जाता है।

नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता के दर्शन हेतु दूर-दूर से चित्रकूट पहुँचते हैं। गौरतलब है कि यह क्षेत्र आध्यात्मिक एवं पौराणिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है।

वृंदावन: मां कात्यायनी का पावन स्थल

वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी होने के साथ-साथ देवी उपासना का भी महत्त्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ मां कात्यायनी मंदिर शक्तिपीठ के रूप में पूजनीय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस स्थान पर माता सती के केश अथवा चूड़ामणि गिरे थे।

नवरात्रि में भक्त मां कात्यायनी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की प्रार्थना करते हैं। यह मंदिर नवरात्रि पर विशेष रूप से सजाया जाता है।

बलरामपुर: देवीपाटन — मां पाटेश्वरी का धाम

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में स्थित देवीपाटन मंदिर मां पाटेश्वरी को समर्पित है। यह तीर्थस्थल भारत-नेपाल सीमा के निकट अवस्थित होने के कारण दोनों देशों के श्रद्धालुओं में समान रूप से लोकप्रिय है। मान्यता है कि यहाँ माता सती का स्कंध अर्थात् कंधा गिरा था।

नवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में विशेष पूजन-अनुष्ठान आयोजित होते हैं और दूरदराज से भारी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। यह धाम उत्तर प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

नवरात्रि के इन पावन दिनों में उत्तर प्रदेश के ये शक्तिपीठ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का केंद्र बने रहते हैं — और आने वाले वर्षों में भी इन तीर्थों का महत्त्व और यात्राओं की संख्या बढ़ती ही जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन पर हर वर्ष नवरात्रि में करोड़ों रुपये का आर्थिक प्रवाह होता है। फिर भी इन मंदिरों में बुनियादी ढाँचे, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर व्यवस्थित ध्यान अभी भी अपेक्षित स्तर से कम है। योगी सरकार ने काशी और प्रयागराज में विकास पर जोर दिया है, लेकिन बलरामपुर जैसे सीमावर्ती तीर्थस्थलों तक सुविधाओं की पहुँच अभी भी असमान बनी हुई है। यह विरोधाभास — बड़े धार्मिक महत्त्व बनाम सीमित सुविधाएँ — उन मंदिरों के लिए बड़ा प्रश्न है जिन्हें 'विश्व स्तरीय तीर्थ' बनाने के दावे होते रहते हैं।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में कौन-कौन से प्रमुख शक्तिपीठ हैं?
उत्तर प्रदेश में वाराणसी (मां विशालाक्षी), प्रयागराज (मां ललिता देवी, कल्याणी देवी, अलोपी देवी), चित्रकूट (मां शिवानी), वृंदावन (मां कात्यायनी) और बलरामपुर के तुलसीपुर (मां पाटेश्वरी/देवीपाटन) प्रमुख शक्तिपीठ हैं। ये सभी 51 शक्तिपीठों में सम्मिलित माने जाते हैं।
शक्तिपीठ क्या होते हैं और इनका क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार जहाँ-जहाँ माता सती के शरीर के अंग और आभूषण गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। कुल 51 शक्तिपीठ माने जाते हैं जो भारत, नेपाल और पड़ोसी देशों में फैले हैं। इन स्थानों पर पूजा-अर्चना का विशेष फल मिलता है, ऐसी आस्था श्रद्धालुओं में प्रचलित है।
वाराणसी में कौन सा शक्तिपीठ है और उसकी क्या मान्यता है?
वाराणसी में मणिकर्णिका घाट के निकट मां विशालाक्षी का मंदिर स्थित है, जो प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहाँ माता सती के कुंडल या मणिकर्णिका गिरे थे।
देवीपाटन मंदिर कहाँ स्थित है और इसकी क्या विशेषता है?
देवीपाटन मंदिर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित है। यह मंदिर मां पाटेश्वरी को समर्पित है और मान्यता है कि यहाँ माता सती का स्कंध (कंधा) गिरा था। नवरात्रि में यहाँ दोनों देशों के श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
नवरात्रि में यूपी के शक्तिपीठों पर जाने का क्या महत्व है?
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। उत्तर प्रदेश के शक्तिपीठों पर इन दिनों विशेष अनुष्ठान, पूजा और मेले लगते हैं, जिनमें भाग लेना श्रद्धालु अत्यंत पुण्यदायी मानते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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