18 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मां कुटेटी देवी: उत्तरकाशी का वह सिद्धपीठ जहां पूरी होती हैं मनोकामनाएं, सीएम धामी ने साझा किया वीडियो

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मां कुटेटी देवी: उत्तरकाशी का वह सिद्धपीठ जहां पूरी होती हैं मनोकामनाएं, सीएम धामी ने साझा किया वीडियो

सारांश

उत्तरकाशी की वादियों में इंद्रावती नदी के किनारे बसा मां कुटेटी देवी सिद्धपीठ — जहां राजस्थान के कोटा राजघराने की आस्था से जुड़ी एक अनोखी पौराणिक कथा है। सीएम धामी के वीडियो ने इस अल्पज्ञात मंदिर को राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है।

मुख्य बातें

मां कुटेटी देवी मंदिर उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में इंद्रावती नदी के समीप स्थित एक प्रमुख सिद्धपीठ है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2 जून 2026 को एक्स पर मंदिर का विशेष वीडियो साझा कर इसे राष्ट्रीय ध्यान दिलाया।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, मंदिर का इतिहास आदि गुरु शंकराचार्य के काल और राजस्थान के कोटा राजघराने की भक्ति से जुड़ा है।
नवविवाहित दंपति यहां संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं; श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सच्चे मन से माँगी हर मनोकामना पूर्ण होती है।
मंदिर गंगोत्री धाम यात्रा मार्ग पर स्थित होने के कारण तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद की सुरम्य वादियों में इंद्रावती नदी के समीप स्थित मां कुटेटी देवी मंदिर देवभूमि के प्रमुख सिद्धपीठों में गिना जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से माँगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है और दर्शन मात्र से आत्मिक शांति की अनुभूति होती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मंदिर का विशेष वीडियो साझा कर इसकी भव्यता और आध्यात्मिक महत्ता को देशभर के श्रद्धालुओं तक पहुँचाया।

सीएम धामी का संदेश

मुख्यमंत्री धामी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'उत्तरकाशी की सुरम्य वादियों और प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित मां कुटेटी देवी मंदिर श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का पावन केंद्र है। मां आदिशक्ति को समर्पित यह सिद्धपीठ अपने दिव्य वातावरण और धार्मिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है। उत्तरकाशी जनपद आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।' उनकी इस पोस्ट ने मंदिर की ओर श्रद्धालुओं का ध्यान नए सिरे से आकर्षित किया है।

मंदिर का ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कुटेटी देवी का इतिहास आदि गुरु शंकराचार्य के काल से जुड़ा है और इसमें राजस्थान के कोटा राजघराने की अनन्य भक्ति का भी उल्लेख मिलता है। किंवदंती के अनुसार, कोटा के एक महाराजा गंगोत्री यात्रा पर आए थे। यात्रा के दौरान उनका धन से भरा बैग खो गया, जिसके बाद उन्होंने उत्तरकाशी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रार्थना की कि यदि बैग वापस मिला तो वे अपनी पुत्री का विवाह किसी स्थानीय युवक से करेंगे।

कुछ समय पश्चात बैग मिल गया और महाराजा ने अपनी प्रतिज्ञा निभाते हुए पुत्री का विवाह एक स्थानीय युवक से कर दिया। परंतु राजकुमारी इस बात से व्यथित थीं कि उनकी कुलदेवी मां कुटेटी उनसे दूर रह गई हैं। मान्यता है कि माता ने स्वप्न में राजकुमारी को दर्शन दिए और बताया कि वे उनके खेत में मिलेंगी। अगले दिन राजकुमारी को इंद्रावती नदी के समीप खेत में तीन पत्थर प्राप्त हुए। ग्रामीणों ने उसी पवित्र स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया, जो आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

श्रद्धालुओं की विशेष मान्यताएं

मंदिर से जुड़ी एक विशेष मान्यता यह है कि नवविवाहित दंपति यहां संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं और उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। मंदिर परिसर का शांत वातावरण और दिव्य ऊर्जा श्रद्धालुओं को गहरी आध्यात्मिक अनुभूति कराती है। उत्तरकाशी आने वाले तीर्थयात्री — विशेषकर गंगोत्री धाम के दर्शनार्थी — इस सिद्धपीठ के दर्शन को अपनी यात्रा का अभिन्न अंग मानते हैं।

पर्यटन एवं धार्मिक महत्व

उत्तराखंड सरकार की ओर से इस मंदिर को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुखता से स्थान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी की सोशल मीडिया पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे देश के कोने-कोने में बैठे श्रद्धालु इस अल्पज्ञात किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धपीठ के बारे में जान सकें। यह मंदिर देवभूमि उत्तराखंड की उस अमूल्य धरोहर का हिस्सा है, जो आध्यात्मिक जिज्ञासुओं को बार-बार अपनी ओर खींचती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की सुविचारित रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है — ऐसे समय में जब राज्य सरकार चारधाम यात्रा के अतिरिक्त वैकल्पिक तीर्थस्थलों को विकसित करने पर जोर दे रही है। मां कुटेटी देवी जैसे अल्पज्ञात सिद्धपीठों को मुख्यधारा में लाना स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण रोजगार के लिए भी सकारात्मक हो सकता है। हालांकि, बुनियादी ढाँचे और श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के प्रबंधन पर ध्यान दिए बिना यह प्रचार उलटा भी पड़ सकता है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां कुटेटी देवी मंदिर कहाँ स्थित है?
मां कुटेटी देवी मंदिर उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में इंद्रावती नदी के समीप एक पहाड़ी पर स्थित है। यह गंगोत्री धाम यात्रा मार्ग पर पड़ता है, जिससे तीर्थयात्री इसे अपनी यात्रा में सहजता से शामिल कर सकते हैं।
मां कुटेटी देवी मंदिर का इतिहास क्या है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास आदि गुरु शंकराचार्य के काल से जुड़ा है। राजस्थान के कोटा राजघराने की एक राजकुमारी की कुलदेवी के रूप में माता यहाँ प्रकट हुईं और ग्रामीणों ने उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया।
मां कुटेटी देवी मंदिर में कौन-सी विशेष मनोकामना पूरी होती है?
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से माँगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। विशेष रूप से नवविवाहित दंपति संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहाँ आते हैं।
सीएम धामी ने मां कुटेटी देवी मंदिर का वीडियो क्यों साझा किया?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2 जून को एक्स पर यह वीडियो साझा कर मंदिर की भव्यता और आध्यात्मिक महत्व को उजागर किया। उन्होंने उत्तरकाशी आने वाले श्रद्धालुओं से इस सिद्धपीठ के दर्शन करने का आग्रह किया।
कोटा राजघराने का मां कुटेटी देवी से क्या संबंध है?
किंवदंती के अनुसार, कोटा के एक महाराजा गंगोत्री यात्रा के दौरान उत्तरकाशी आए थे और उनकी पुत्री का विवाह एक स्थानीय युवक से हुआ। राजकुमारी की कुलदेवी मां कुटेटी ने स्वप्न में दर्शन देकर अपने प्रकट होने का स्थान बताया, जहाँ बाद में मंदिर बना।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले