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सिद्धबली धाम: खोह नदी तट पर बसा 84 सिद्धपीठों में से एक पवित्र हनुमान मंदिर

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सिद्धबली धाम: खोह नदी तट पर बसा 84 सिद्धपीठों में से एक पवित्र हनुमान मंदिर

सारांश

उत्तराखंड के कोटद्वार में खोह नदी के तट पर बसा सिद्धबली धाम 84 सिद्धपीठों में से एक है। गुरु गोरखनाथ-हनुमान युद्ध और सिद्ध बाबा की तपस्या से जुड़ी इस पीठ की महिमा CM धामी के एक्स पोस्ट के बाद एक बार फिर चर्चा में है।

मुख्य बातें

सिद्धबली हनुमान मंदिर , कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल), खोह नदी के तट पर स्थित है और 84 सिद्धपीठों में से एक माना जाता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 26 मई को एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट कर श्रद्धालुओं को दर्शन का आमंत्रण दिया।
पौराणिक मान्यता के अनुसार गुरु गोरखनाथ और हनुमान जी के बीच इसी स्थान पर युद्ध हुआ था, जिसके बाद हनुमान जी ने यहाँ सदा विराजने का वचन दिया।
सिद्ध बाबा नामक संत को यहाँ तपस्या के बाद हनुमान जी के साक्षात दर्शन हुए — उन्हीं के नाम पर मंदिर का नाम 'सिद्धबली' पड़ा।
मंदिर में प्रतिदिन दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं; मान्यता है कि यहाँ से कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।

उत्तराखंड के कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल जिला) में खोह नदी के तट पर स्थित श्री सिद्धबली हनुमान मंदिर देश के 84 सिद्धपीठों में से एक माना जाता है। लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का यह केंद्र न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि पौराणिक कथाओं और सिद्ध संतों की तपस्या-भूमि के रूप में भी विख्यात है।

मुख्यमंत्री धामी ने किया मंदिर का उल्लेख

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार, 26 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिद्धबली मंदिर को समर्पित एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, 'पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में स्थित प्रसिद्ध सिद्धबली मंदिर भगवान श्री हनुमान जी की आस्था, भक्ति और कृपा का पवित्र संगम है। प्राकृतिक सुंदरता के बीच बना यह मंदिर भक्तों को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।' उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि उत्तराखंड आने पर इस दिव्य तीर्थ के दर्शन अवश्य करें।

पौराणिक महिमा और स्थापना की कथा

मान्यताओं के अनुसार, एक बार गुरु गोरखनाथ — जिन्हें कलयुग में शिव का अवतार माना जाता है — अपने गुरु मछेंद्रनाथ को मुक्त कराने के लिए इसी मार्ग से जा रहे थे। तब बजरंगबली ने रूप बदलकर उनका रास्ता रोक लिया और दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। जब युद्ध में कोई भी पराजित नहीं हुआ, तब हनुमान जी अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए और वचन दिया कि वे इस स्थान पर सदैव प्रहरी के रूप में विराजमान रहेंगे।

यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब उत्तराखंड सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। गौरतलब है कि देवभूमि के इस क्षेत्र में आस्था और प्रकृति का अनूठा संगम सदियों से तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता रहा है।

'सिद्धबली' नाम का रहस्य

इसी पावन स्थल पर सिद्ध बाबा नामक एक पूजनीय संत ने गहन तपस्या की थी, जिसके पश्चात उन्हें हनुमान जी के साक्षात दर्शन हुए और उन्हें सिद्धियाँ प्राप्त हुईं। उन्हीं सिद्ध संत और हनुमान जी के सम्मिलित स्वरूप को 'सिद्धबली' नाम दिया गया — यही इस मंदिर की नामकरण-परंपरा का आधार है।

आम भक्तों पर प्रभाव और मान्यताएँ

मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहाँ आने वाला कोई भी भक्त रिक्त हाथ नहीं लौटता। इसे कल्पवृक्ष के समान माना जाता है जो भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करता है। प्रतिदिन दूर-दूर से श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन और आशीर्वाद के लिए यहाँ पहुँचते हैं।

क्या होगा आगे

मुख्यमंत्री धामी के एक्स पोस्ट के बाद सिद्धबली धाम की चर्चा सोशल मीडिया पर तेज़ हो गई है। उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के बढ़ते महत्व को देखते हुए यह मंदिर आने वाले समय में और अधिक तीर्थयात्रियों को आकर्षित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उत्तराखंड सरकार आस्था को आर्थिक इंजन के रूप में स्थापित कर रही है। सिद्धबली जैसे कम-चर्चित तीर्थों को मुख्यधारा में लाना इस रणनीति की अगली कड़ी है। हालाँकि, बुनियादी ढाँचे और भीड़-प्रबंधन की तैयारी के बिना अचानक बढ़ा पर्यटन-दबाव इन स्थलों की पारिस्थितिक और सांस्कृतिक अखंडता के लिए चुनौती भी बन सकता है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धबली मंदिर कहाँ स्थित है?
सिद्धबली मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में खोह नदी के तट पर स्थित है। यह देश के 84 सिद्धपीठों में से एक माना जाता है।
सिद्धबली नाम कैसे पड़ा?
इस स्थान पर सिद्ध बाबा नामक संत ने तपस्या की थी, जिसके बाद उन्हें हनुमान जी के साक्षात दर्शन हुए। उन्हीं सिद्ध संत और हनुमान जी के सम्मिलित स्वरूप को 'सिद्धबली' नाम दिया गया।
सिद्धबली मंदिर की पौराणिक कथा क्या है?
मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ जब अपने गुरु मछेंद्रनाथ को मुक्त कराने जा रहे थे, तब हनुमान जी ने रूप बदलकर इसी स्थान पर उनका रास्ता रोका और दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। युद्ध में कोई पराजित न होने पर हनुमान जी ने अपने वास्तविक रूप में प्रकट होकर वचन दिया कि वे यहाँ सदा प्रहरी के रूप में विराजमान रहेंगे।
CM पुष्कर सिंह धामी ने सिद्धबली मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 26 मई को एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि यह मंदिर आस्था, भक्ति और कृपा का पवित्र संगम है और श्रद्धालुओं को शांति व सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने उत्तराखंड आने वाले सभी लोगों से यहाँ दर्शन करने का आग्रह किया।
सिद्धबली मंदिर क्यों खास माना जाता है?
यह मंदिर 84 सिद्धपीठों में से एक होने के साथ-साथ गुरु गोरखनाथ-हनुमान युद्ध और सिद्ध बाबा की तपस्या-भूमि के रूप में भी विख्यात है। मान्यता है कि यहाँ आने वाला कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।
राष्ट्र प्रेस
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