हरिद्वार का दक्षिण काली मंदिर: नील पर्वत तलहटी में गंगा तट पर स्थित प्राचीन शक्तिपीठ, सीएम धामी ने किए गुणगान
सारांश
मुख्य बातें
हरिद्वार के नील पर्वत की तलहटी और गंगा की 'नीलधारा' के पावन तट पर स्थित मां दक्षिण काली मंदिर देवभूमि उत्तराखंड के सबसे प्राचीन शक्तिपीठों में गिना जाता है। यह सिद्धपीठ आस्था, शक्ति और अध्यात्म का ऐसा संगम है जहाँ पहुँचते ही भक्त सांसारिक कोलाहल से परे एक अलौकिक अनुभव में डूब जाते हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार, 10 जून 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मंदिर का दिव्य वीडियो साझा कर इस पवित्र स्थल की महिमा को देशभर के श्रद्धालुओं तक पहुँचाया।
मुख्यमंत्री धामी का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'हरिद्वार में मां गंगा के पावन तट पर स्थित दक्षिण काली मंदिर श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र है। यह प्राचीन मंदिर मां महाकाली को समर्पित है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। हरिद्वार आगमन पर मां दक्षिण काली के इस दिव्य मंदिर के दर्शन अवश्य करें।' धामी की इस पोस्ट के बाद मंदिर एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है।
मंदिर की स्थापना और पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान विषपान करने के बाद भगवान शिव ने विष का प्रभाव शांत करने के लिए इसी स्थान पर गंगा में स्नान किया था। यहाँ गंगा की धारा दक्षिण दिशा की ओर मुड़ती है — इसे 'दक्षिण वाहिनी' कहते हैं — और इसी भौगोलिक विशेषता के कारण इस मंदिर का नाम 'दक्षिण काली मंदिर' पड़ा। उल्लेखनीय है कि मंदिर के गर्भगृह में स्थापित माता काली की प्रतिमा का मुख पूर्व दिशा की ओर है।
मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना 108 नरमुंडों पर की गई थी। गर्भगृह में देवी काली, शिवलिंग और भैरव बाबा की प्रतिमाएँ एक साथ विराजमान हैं, जो इसे तांत्रिक और शाक्त परंपराओं का अनूठा केंद्र बनाती हैं।
उत्तर भारत की सबसे बड़ी अखंड धूना
इस मंदिर की एक और विशेष पहचान यहाँ प्रज्वलित उत्तर भारत की सबसे बड़ी 'अखंड धूना' (अखंड ज्वाला) है। यह ज्वाला अनवरत जलती रहती है और श्रद्धालुओं के लिए दिव्य ऊर्जा का स्रोत मानी जाती है। मंदिर परिसर का यह पहलू इसे अन्य शक्तिपीठों से अलग और विशिष्ट बनाता है।
आम श्रद्धालुओं पर असर
मंदिर की ख्याति केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है — देशभर से भक्त यहाँ माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। हरिद्वार पहले से ही एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र है, और मुख्यमंत्री धामी की पोस्ट के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होगी। यह मंदिर हरिद्वार आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक अनिवार्य दर्शनीय स्थल बन चुका है।
आगे क्या
मुख्यमंत्री धामी द्वारा इस मंदिर को सोशल मीडिया पर प्रमुखता देने से उत्तराखंड सरकार के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों को बल मिलता है। हरिद्वार में आने वाले समय में तीर्थयात्रा के बुनियादी ढाँचे के और विस्तार की संभावना है, और दक्षिण काली मंदिर इस धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर केंद्रीय भूमिका निभाता रहेगा।