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यूएनएससी में भारत का बयान: भारत-अफगान संबंध आधुनिक सीमाओं से भी पुराने, 500+ विकास परियोजनाएँ जारी

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यूएनएससी में भारत का बयान: भारत-अफगान संबंध आधुनिक सीमाओं से भी पुराने, 500+ विकास परियोजनाएँ जारी

सारांश

यूएनएससी की बैठक में भारत ने स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान के साथ उसके रिश्ते आधुनिक सीमाओं से भी पुराने हैं। 34 प्रांतों में 500+ परियोजनाएँ, 33 टन वैक्सीन और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति — यह केवल कूटनीति नहीं, सदियों पुरानी साझेदारी की निरंतरता है।

मुख्य बातें

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने 16 सितंबर 2026 को यूएनएससी की बैठक में भारत का पक्ष रखा।
भारत अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में 500 से अधिक विकास साझेदारी परियोजनाओं के ज़रिए सक्रिय है।
पिछली तिमाही में भारत ने अफगानिस्तान को 33 टन वैक्सीन और विशेष चिकित्सा उपकरण भेजे।
यूएन रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष की पहली छमाही में 150 स्वास्थ्य केंद्र बंद हुए; 4.8 करोड़ अफगान नागरिक संकट में हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वास को दोहराया गया कि यूरेशिया की शांति अफगानिस्तान की स्थिरता से जुड़ी है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 16 सितंबर 2026 की बैठक में अफगानिस्तान की राजनीतिक, मानवीय, सुरक्षा और मानवाधिकार स्थिति पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने इस बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि भारतीयों और अफगानों के बीच के संबंध आधुनिक नक्शों और सीमाओं से भी पुराने हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में मानवीय संकट गहराता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

ऐतिहासिक रिश्तों का संदर्भ

पार्वथनेनी हरीश ने कहा कि काबुल से हिंदुस्तान के मैदानी इलाकों तक जाने वाले मार्ग केवल व्यापारिक रास्ते नहीं थे, बल्कि वे विचारों, ज्ञान, विश्वास और आस्था के गलियारे भी थे। उन्होंने कहा कि सदियों में कई साम्राज्य उभरे और ढहे, किंतु अफगान और भारतीय लोगों के बीच दोस्ती और भाईचारे का धागा कभी नहीं टूटा। गौरतलब है कि यह कथन भारत की अफगानिस्तान नीति की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ों को रेखांकित करता है, जो केवल कूटनीतिक संबंधों से परे जाती है।

भारत की विकास साझेदारी और मानवीय सहायता

हरीश ने बताया कि अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में 500 से अधिक विकास साझेदारी परियोजनाओं के माध्यम से भारत वहाँ के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दृढ़ विश्वास को दोहराया कि एक शांतिपूर्ण और सुरक्षित यूरेशिया की भारत की आकांक्षा, अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से गहराई से जुड़ी हुई है। भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण दोहा वर्किंग ग्रुप की बैठकों में भागीदारी और क्षेत्रीय पहलों में भारत के प्रयासों से मिलता है।

स्वास्थ्य के मोर्चे पर, भारत ने पिछली तिमाही में अफगानिस्तान में बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम के लिए 33 टन वैक्सीन और संबंधित सामग्री भेजी। इसके अतिरिक्त, इस रिपोर्टिंग अवधि में भारत ने अफगान स्वास्थ्य अधिकारियों को विशेष चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए, जिनमें नवजात और बाल-देखभाल उपकरण, कार्डियोग्राफ मशीन, वेंटिलेटर, पेशेंट मॉनिटर, इलेक्ट्रोकॉटरी उपकरण, प्लास्टिक सर्जरी सेट और विशेष मेडिकल किट शामिल हैं।

अफगानिस्तान का मानवीय संकट

यूएन महासचिव की रिपोर्ट में अफगानिस्तान की कमज़ोर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की गंभीर स्थिति का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष की पहली छमाही में 150 स्वास्थ्य केंद्र बंद हो गए। हरीश ने कहा कि 4.8 करोड़ से अधिक अफगान नागरिक पिछले पाँच वर्षों से भारी अभाव, तकलीफ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस गंभीर स्थिति से मुँह नहीं मोड़ सकता और मानवीय संकट को रोकने के लिए निवेश जारी रहेगा।

द्विपक्षीय संवाद और सहयोग के क्षेत्र

हरीश ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में अफगान मंत्रियों के भारत दौरों से मानवीय सहायता, विकास परियोजनाओं, स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सुरक्षा, क्षमता-निर्माण, नशीले पदार्थों की रोकथाम, खेल, शिक्षा, व्यापार, यात्रा और कनेक्टिविटी जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग पर बातचीत संभव हो पाई है। भारत संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और अफगान रेड क्रिसेंट सोसाइटी जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि सबसे ज़रूरतमंद लोगों तक सहायता पहुँचाई जा सके।

आगे की राह

भारत की यूएनएससी में यह सक्रिय उपस्थिति दर्शाती है कि नई दिल्ली अफगानिस्तान को लेकर बहुपक्षीय मंचों पर अपनी आवाज़ और भूमिका को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएँ बढ़ रही हैं। आने वाले समय में भारत की सहायता और कूटनीतिक संलग्नता की दिशा पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके निहितार्थ गहरे हैं — तालिबान शासन के साथ व्यावहारिक संलग्नता और मानवीय सहायता जारी रखते हुए भारत एक नाज़ुक संतुलन साध रहा है। 500 से अधिक विकास परियोजनाओं का दावा प्रभावशाली है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितनी परियोजनाएँ 2021 के बाद भी सक्रिय हैं और उनकी ज़मीनी स्थिति क्या है। मुख्यधारा की कवरेज जो प्रश्न अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि भारत की यह 'मानवीय पहुँच' तालिबान की वैधता को अप्रत्यक्ष रूप से कितना बल देती है — और क्या यह दीर्घकालिक रणनीतिक हित में है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएनएससी में भारत ने अफगानिस्तान पर क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने 16 सितंबर 2026 को यूएनएससी की बैठक में कहा कि भारतीयों और अफगानों के बीच संबंध आधुनिक नक्शों और सीमाओं से भी पुराने हैं। उन्होंने अफगानिस्तान में 500 से अधिक विकास परियोजनाओं और मानवीय सहायता जारी रखने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत अफगानिस्तान को क्या सहायता दे रहा है?
भारत अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में 500 से अधिक विकास परियोजनाओं के ज़रिए योगदान दे रहा है। पिछली तिमाही में 33 टन वैक्सीन भेजी गई और विशेष चिकित्सा उपकरण — जिनमें वेंटिलेटर, कार्डियोग्राफ मशीन और नवजात देखभाल उपकरण शामिल हैं — अफगान स्वास्थ्य अधिकारियों को दिए गए।
अफगानिस्तान में स्वास्थ्य संकट कितना गंभीर है?
यूएन महासचिव की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष की पहली छमाही में अफगानिस्तान में 150 स्वास्थ्य केंद्र बंद हो गए। 4.8 करोड़ से अधिक अफगान नागरिक पिछले पाँच वर्षों से गंभीर अभाव और मानवीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
भारत और अफगानिस्तान के बीच हाल में क्या द्विपक्षीय संवाद हुआ है?
पिछले कुछ महीनों में अफगान मंत्रियों ने भारत का दौरा किया, जिसके दौरान मानवीय सहायता, स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग पर बातचीत हुई। भारत अफगान रेड क्रिसेंट सोसाइटी और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
भारत की अफगानिस्तान नीति का आधार क्या है?
भारत की अफगानिस्तान नीति सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और मानवीय संबंधों पर आधारित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वास के अनुरूप, भारत मानता है कि एक शांतिपूर्ण यूरेशिया की आकांक्षा अफगानिस्तान में स्थिरता से अविभाज्य रूप से जुड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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