यूएनएससी में भारत का पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार: अफगानिस्तान हमलों को बताया 'दोहरे मापदंड' का उदाहरण
सारांश
मुख्य बातें
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 9 जून को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई चर्चा के दौरान पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा की और संयुक्त राष्ट्र तथा अफगानिस्तान के प्रति भारत का पुरजोर समर्थन व्यक्त किया। हरीश ने इस्लामाबाद द्वारा अपने पड़ोसी देश के विरुद्ध की जा रही हिंसा को 'अविवेकपूर्ण' करार देते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन बताया।
पाकिस्तान पर दोहरे मापदंड का आरोप
भारतीय प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में अफगानिस्तान पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता के उच्च सिद्धांतों के संदर्भ में दोहरे मापदंडों का स्पष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र के समर्थन को अपनी सुविधा के अनुसार नहीं चुना जा सकता।
हरीश ने कहा, 'किसी हत्याकांड को सैन्य ऑपरेशन का रूप देने से अपराधी बरी नहीं हो जाता। आम लोगों को मारना, अपाहिज बनाना और अनाथ बनाना काउंटर-टेररिज्म नहीं है।' यह टिप्पणी पाकिस्तान के उस दावे के जवाब में थी, जिसमें उसने अपने हमलों को काउंटर-टेररिज्म कार्रवाई बताया था।
यूएन रिपोर्ट में भारी नागरिक हताहतों का खुलासा
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की रिपोर्ट के अनुसार, 26 जनवरी से 31 मार्च के बीच 372 अफगान नागरिक मारे गए और 392 अन्य घायल हुए। इनमें से अधिकांश मौतें हवाई हमलों के कारण हुईं, जबकि कुछ क्रॉस-बॉर्डर फायरिंग से भी।
रिपोर्ट में विशेष रूप से 16 मार्च को काबुल के ओमिड ड्रग रिहैबिलिटेशन हॉस्पिटल पर हुए हवाई हमले का उल्लेख है, जिसमें कम से कम 269 लोग मारे गए और 122 घायल हुए। मृतकों में बड़ी संख्या उन मरीजों की थी जो उपचाराधीन थे।
यूएनएएमए के प्रति भारत का समर्थन
भारत ने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) और उसके जनादेश के महत्व पर विशेष जोर दिया। हरीश ने कहा कि भारत इस मुश्किल समय में यूएनएएमए को अपना पूरा समर्थन देता है, क्योंकि यह अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है।
भारत ने महासचिव की उस अपील का भी समर्थन किया जिसमें अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जिम्मेदारियों का पालन करने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई है। साथ ही यूएनएएमए की उन पूर्व अपीलों का भी समर्थन किया गया जिनमें जवाबदेही, घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिए जांच की मांग की गई थी।
पाकिस्तान का पक्ष और भारत का खंडन
पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने यूएनएससी में दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट ने अफगानिस्तान की स्थिति की जिम्मेदारी बाहरी कारकों पर डालने की कोशिश की है। उन्होंने यूएनएएमए की रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता और तालिबान के साथ उसके संवाद की प्रकृति पर भी सवाल उठाए।
भारत ने इस रुख को सीधे खारिज करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं की विश्वसनीयता पर इस तरह सवाल उठाना बहुपक्षीय व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय तनाव पहले से ही चरम पर है।
आगे की राह
यूएनएससी में भारत की इस दृढ़ स्थिति से संकेत मिलता है कि नई दिल्ली अफगानिस्तान में मानवीय संकट पर अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बहुपक्षीय मंचों का सक्रिय उपयोग करेगी। अफगानिस्तान में नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता का मुद्दा आने वाले समय में यूएन के एजेंडे पर केंद्रीय बना रहने की संभावना है।