यूएन सुरक्षा परिषद में भारत का पाकिस्तान पर प्रहार: पीओके में 34 कश्मीरियों की हत्या पर संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरिश ने 24 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया और आरोप लगाया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी दमन को अंतरराष्ट्रीय समुदाय वह ध्यान नहीं दे रहा जिसका वह हकदार है। यह बहस 'विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के तंत्र को मजबूत करने' विषय पर आयोजित की गई थी, जिसमें पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दा उठाए जाने के जवाब में भारत ने यह कड़ा रुख अपनाया।
मुख्य घटनाक्रम
पी. हरिश ने कहा, "अन्य देशों में इसी तरह की घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र कड़ी प्रतिक्रिया देता है, लेकिन पाकिस्तान में हो रहे ऐसे दमन को वह ध्यान नहीं मिलता, जिसका वह हकदार है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि पीओके में जारी घटनाक्रम पाकिस्तानी राज्य के वास्तविक चरित्र को उजागर करते हैं।
भारतीय प्रतिनिधि ने बताया कि जून 2026 से अब तक पीओके में अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे कम से कम 34 कश्मीरी पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा मारे जा चुके हैं। इनमें सबसे हालिया घटना 14 जुलाई को तरारखाल में हुई, जहाँ पाकिस्तानी सेना ने 6 कश्मीरियों को मार डाला।
पाकिस्तान में लोकतंत्र पर हमला
हरिश ने दमन के उदाहरण गिनाते हुए कहा कि पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री समेत नेताओं को जेल में डाला गया है और मुख्य विपक्षी पार्टी को गैरकानूनी घोषित करने की धमकी दी गई है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद से जेल में हैं, हालाँकि खान और उनके समर्थकों का कहना है कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।
इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को चुनावों में भाग लेने से कथित तौर पर रोका गया है और उस पर औपचारिक प्रतिबंध की तलवार लटक रही है।
संवैधानिक तख्तापलट का आरोप
हरिश ने यह भी कहा कि पाकिस्तानी सेना ने संविधान के 27वें संशोधन के जरिए एक संवैधानिक तख्तापलट किया है। उनके अनुसार यह संशोधन सेना के शीर्ष नेतृत्व की शक्तियों को और मजबूत करता है तथा वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को आपराधिक मामलों से आजीवन छूट प्रदान करता है।
उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, "ऐसी हरकतों ने लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। पाकिस्तान को अपने अंदर झाँककर देश के असली मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि मनगढ़ंत बातें करके संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों को गुमराह करना चाहिए।"
भारत का अटल रुख
हरिश ने दोहराया कि "जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश हमेशा से भारत का एक अभिन्न और अटूट हिस्सा रहा है, है और रहेगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संदर्भ में एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारतीय संप्रभु क्षेत्र पर किया गया अवैध कब्जा है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पहले से ऊँचे स्तर पर है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पाकिस्तान की कार्रवाइयों को लेकर लगातार आक्रामक कूटनीतिक मोर्चा खोल रहा है।
आगे क्या
भारत की इस कड़ी प्रतिक्रिया के बाद अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पीओके में मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं। गौरतलब है कि भारत ने यह मुद्दा उस बहस में उठाया जो मूलतः शांतिपूर्ण विवाद-समाधान के लिए थी — जो स्वयं में एक कूटनीतिक संदेश है।