पीओजेके में 40 से अधिक मौतें: भारत ने पाकिस्तान की कार्रवाई को बताया निंदनीय, अंतरराष्ट्रीय जांच की माँग
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने 31 जुलाई 2026 को पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हो रही हिंसक कार्रवाई की कड़ी निंदा की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वह पाकिस्तान की इन गतिविधियों की स्वतंत्र जाँच कराए तथा उसे इन अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराए। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में यह कड़ा रुख सामने आया, जहाँ प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री के विवादास्पद बयान का हवाला देते हुए इस्लामाबाद की नीयत पर सवाल उठाए।
मुख्य घटनाक्रम
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में पीओजेके में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और लॉन्ग मार्च के दौरान अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय संगठनों के अनुसार, 5 जून से अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, कई सौ घायल हुए हैं और सैकड़ों लोगों को कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने गायब कर दिया है।
कोटली इलाके में गुरुवार को सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में शांतिपूर्ण रैली के दौरान पुलिस की कथित गोलीबारी के बाद महिला प्रदर्शनकारियों को जान बचाकर भागते देखा गया। रावलाकोट, मीरपुर और अधिकृत क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी हिंसा की खबरें हैं।
भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "पाकिस्तान लगातार पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण नागरिकों पर बेहद कठोर कार्रवाई कर रहा है। इस कार्रवाई में 40 से ज्यादा बेगुनाह लोगों की जान जा चुकी है और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।"
जायसवाल ने यह भी कहा कि पीओजेके में हुए "कथित चुनाव" पाकिस्तानी प्रशासन के लिए एक बड़ी शर्मनाक अस्वीकृति साबित हुए हैं। उन्होंने बताया कि वहाँ के लोग गैरकानूनी हत्याओं की स्वतंत्र जाँच के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद माँग रहे हैं।
पाकिस्तानी नेताओं के विवादित बयान
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पीओजेके के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को 'भारत जैसा दुश्मन' बताकर सुरक्षा बलों की कार्रवाई का बचाव किया था। जायसवाल ने इस बयान को पाकिस्तान की मानसिकता का आईना बताया।
इसके अलावा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के राजनीतिक मामलों के विशेष सहायक राणा सनाउल्लाह ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने जिन 'मुजाहिदीन' को प्रशिक्षित किया, धन दिया, हथियार दिए और भारत भेजा — वही अब पाकिस्तान के खिलाफ खड़े होकर उसके लिए चुनौती बन गए हैं। जायसवाल ने इस स्वीकारोक्ति को भी रेखांकित किया।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान की इन गतिविधियों की जाँच करनी चाहिए और उसे उसके अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब पीओजेके के स्थानीय संगठन पहले से ही संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों से हस्तक्षेप की माँग कर चुके हैं।
गौरतलब है कि पीओजेके में नागरिक असंतोष कोई नई बात नहीं है — बिजली, आटे और ईंधन की कीमतों को लेकर वर्षों से जन-आक्रोश सुलगता रहा है। लेकिन इस बार की कार्रवाई की व्यापकता और मृत्यु की संख्या ने इसे एक गंभीर मानवाधिकार संकट का रूप दे दिया है।