पीओके में प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद तनाव चरम पर, जेएएसी ने 23 जुलाई को बताया निर्णायक दिन
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 21 जुलाई को घोषणा की कि स्वैच्छिक बंद और चक्का जाम हड़ताल बदस्तूर जारी है। संगठन ने 23 जुलाई को निर्णायक दिन करार देते हुए मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजन के लोगों से बड़ी तादाद में विरोध प्रदर्शन में उतरने की अपील की है। यह आह्वान तब आया है जब पिछले सप्ताह जारी अशांति में 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम
जेएएसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, '45 दिनों से जारी उत्पीड़न और क्रूरता, बड़े पैमाने पर हत्याओं और शासकों द्वारा बुनियादी मानवाधिकारों के उल्लंघन के बावजूद हम कश्मीर के लोगों की दृढ़ता को सलाम करते हैं।' संगठन ने आरोप लगाया कि 'दर्जनों लोगों की हत्या की गई, लेकिन शासकों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।'
संगठन ने रावलकोट निवासी जिब्रान मुश्ताक फराम तारार की मौत की भी पुष्टि की, जिनका इस्लामाबाद में इलाज चल रहा था। जेएएसी के अनुसार, उनकी मृत्यु सुरक्षा बलों की गोली लगने से हुई।
23 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के साथ-साथ संगठन ने संकेत दिया कि उस दिन 'लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने और बंदूक की नोक पर फर्जी चुनावों' के संबंध में एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की जाएगी — यह संदर्भ 27 जुलाई को पीओके में होने वाले निर्धारित चुनावों से जुड़ा प्रतीत होता है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
जेएएसी एक व्यापक नागरिक मोर्चा है जिसमें व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। यह आंदोलन मूलतः बुनियादी अधिकारों और आर्थिक मांगों को लेकर शुरू हुआ था। 14 जुलाई की सरकारी समय सीमा खत्म होने के बाद जेएएसी ने मुजफ्फराबाद की ओर लंबे मार्च के लिए हजारों समर्थकों को एकजुट किया था, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद यह मार्च अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया था। हालांकि, संगठन ने चेतावनी दी थी कि ठोस कदम न उठाए जाने पर मार्च पुनः शुरू होगा। गौरतलब है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने जेएएसी पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगाया है और संगठन के कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र की चिंता
17 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने पीओके की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने कहा, 'किसी नागरिक समाज संगठन को अपराधी घोषित करना और सार्वजनिक सभाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने के अधिकारों के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।'
उन्होंने यह भी कहा कि हिरासत में लिए गए जेएएसी नेताओं को कानूनी सहायता और अपने परिवारों से संपर्क का अधिकार मिलना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और हिंसा में हुई सभी मौतों की त्वरित, निष्पक्ष एवं व्यापक जाँच कराने की अपील की है।
आम जनता पर असर
स्वैच्छिक बंद और चक्का जाम के कारण पीओके के विभिन्न हिस्सों में दैनिक जीवन प्रभावित है। रावलकोट और अन्य प्रदर्शन स्थलों पर पूरे क्षेत्र से काफिले पहुँच रहे हैं। ओएचसीएचआर के अनुसार, जून से अब तक कथित तौर पर कानून प्रवर्तन कर्मियों सहित दर्जनों नागरिक मारे गए हैं।
क्या होगा आगे
जेएएसी ने स्पष्ट किया है कि वह 'शहीदों के खून से कोई समझौता किए बिना शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेगी।' 23 जुलाई का विरोध प्रदर्शन और उस दिन प्रस्तावित घोषणा इस आंदोलन की अगली दिशा तय करेगी। 27 जुलाई को होने वाले चुनावों से पहले का यह तनाव पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए अहम परीक्षा बन गया है।