शिक्षक दिवस 2026: राहुल गांधी और खड़गे ने डॉ. राधाकृष्णन को दी श्रद्धांजलि, शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली — शिक्षक दिवस, 5 सितंबर को लोकसभा में नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देशभर के शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें सादर नमन किया। दोनों नेताओं ने अपने-अपने सोशल मीडिया संदेशों में शिक्षकों के योगदान को राष्ट्र-निर्माण की आधारशिला बताया।
राहुल गांधी का संदेश और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
राहुल गांधी ने फेसबुक पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें सादर नमन। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को हार्दिक शुभकामनाएं। अपने ज्ञान, सेवा और समर्पण से आप छात्रों का भविष्य संवारते हैं और देश की आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते हैं। आपका योगदान अमूल्य है।'
इसी पोस्ट में उन्होंने देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने लिखा, 'आज भारत की शिक्षा व्यवस्था हमारे सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। हमें मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी है, जहां हर छात्र को समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और एक उज्ज्वल भविष्य मिले।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच पर राष्ट्रीय बहस जारी है।
खड़गे का एक्स पर संदेश
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'शिक्षक ही लोगों की सोच को आकार देते हैं, उनमें अच्छे संस्कार डालते हैं और हमारे देश के भविष्य की नींव रखते हैं। शिक्षक दिवस पर हम उन सभी शिक्षकों का सम्मान करते हैं, जिनका ज्ञान, धैर्य और समर्पण पीढ़ियों को प्रेरित करता है।' उन्होंने डॉ. राधाकृष्णन को 'एक महान दार्शनिक, शिक्षक और राजनेता' बताते हुए श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनकी बुद्धिमत्ता हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।
डॉ. राधाकृष्णन की विरासत और शिक्षा में योगदान
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शिक्षा जगत में योगदान ऐतिहासिक रहा है। 1948 में उनकी अध्यक्षता में गठित 'विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग' ने स्वतंत्र भारत में उच्च शिक्षा की रूपरेखा तैयार की और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की स्थापना की दृढ़ सिफारिश की। गौरतलब है कि UGC आज भी देश की उच्च शिक्षा नियामक व्यवस्था की रीढ़ है।
1952 में वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने और 1962 में देश के दूसरे राष्ट्रपति का पद संभाला। उच्च संवैधानिक पदों पर रहते हुए भी उनका जीवन अत्यंत सादा रहा। कहा जाता है कि जब वे राज्यसभा के सभापति थे, तो सदन में तीखी बहस के दौरान वे अचानक संस्कृत के श्लोक या बाइबिल की पंक्तियां पढ़ने लगते थे, जिससे तनावपूर्ण माहौल तत्काल शांत हो जाता था।
5 सितंबर को शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है
1962 में राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के बाद उनके कुछ पुराने छात्रों और मित्रों ने 5 सितंबर को उनका जन्मदिन भव्य रूप से मनाने की अनुमति माँगी। इस पर डॉ. राधाकृष्णन ने विनम्रतापूर्वक कहा था, 'मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय, यदि 5 सितंबर को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाए, तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।' तभी से प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को देशभर में राष्ट्रीय शिक्षक दिवस मनाया जाता है — एक ऐसी परंपरा जो उनकी विनम्रता और शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण की जीवंत याद दिलाती है।
इस वर्ष भी देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षक दिवस समारोह आयोजित किए गए, जहाँ छात्रों ने अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।