पीओके में मानवाधिकार हनन पर भारत सख्त, MEA ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार, 11 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन की कड़ी निंदा की। जायसवाल ने कहा कि अब तक 90 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और वहाँ की जनता की माँगों का जवाब बुलेट और इंटरनेट बंदी से दिया जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
पीओके में हो रही हिंसा पर भारत के रुख के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हमारी पड़ोस में हो रही गतिविधियों पर पूरी और करीबी नज़र है। हम देख रहे हैं कि कैसे पाकिस्तान में मानवाधिकारों का हनन किया जा रहा है। अब तक 90 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। लोगों की माँगों का जवाब बुलेट और नेट बंदी से दिया जा रहा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मानवाधिकार का हनन होते हमने देखा। हमने देखा लोगों को किस कदर मारा गया, उनके साथ ज़्यादती हुई। इसने एक बार फिर जता दिया कि पाकिस्तान को मानवाधिकार के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है।'
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
जायसवाल ने वैश्विक बिरादरी से सीधी अपील करते हुए कहा कि यह अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह इस मसले पर ध्यान दे और पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराए। उन्होंने कहा, 'हाल की हिंसा में लोग मारे गए हैं। अब ये अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी बनती है कि इस पर ध्यान दे और पाकिस्तान को इसके लिए जवाबदेह ठहराए।'
यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी चिंता जता चुके हैं। गौरतलब है कि भारत ने इससे पहले भी पीओके में मानवाधिकार स्थिति पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, लेकिन इस बार का बयान अधिक स्पष्ट और मृतकों की संख्या का उल्लेख करने वाला है।
मक्का डिफेंस पैक्ट पर भारत की प्रतिक्रिया
ब्रीफिंग में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित मक्का डिफेंस पैक्ट पर भी सवाल उठे। इस समझौते के तहत किसी भी एक देश पर सैन्य हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
जायसवाल ने कहा, 'हम पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर करीबी नज़र रखे हुए हैं। हम भारत की सुरक्षा और इलाके की शांति और स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभाव के नज़रिए से इसे देख रहे हैं। भारत अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इस बारे में जो भी आवश्यक होगा उसी हिसाब से कदम उठाएगा।'
आम जनता और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
पीओके में जारी हिंसा और इंटरनेट बंदी ने वहाँ की आम जनता के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। आलोचकों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और संचार की पाबंदी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन है।
मक्का डिफेंस पैक्ट को लेकर भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञ इसे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज़ से महत्वपूर्ण मान रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तान पहले से ही भारत का पड़ोसी और तनाव का केंद्र रहा है।
क्या होगा आगे
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम एशिया और पीओके दोनों मोर्चों पर स्थिति की निगरानी जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद अब देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय — विशेषकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद — पाकिस्तान पर किस हद तक दबाव बनाता है।