दिल्ली पुलिस ने 32 साल बाद दबोचा डबल मर्डर का आरोपी ललित, मंगोलपुरी से हुई गिरफ्तारी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की सेंट्रल रेंज ने 25 सितंबर 2026 को एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल करते हुए 32 वर्षों से फरार चल रहे आरोपी ललित (48) को मंगोलपुरी फेज-II, नई दिल्ली से गिरफ्तार किया। यह मामला पूर्वी दिल्ली स्थित एक आध्यात्मिक आश्रम की दो साध्वियों की नृशंस हत्या और डकैती से जुड़ा है, जिसके तहत थाना शकरपुर में आईपीसी धाराओं 396/302/34 के अंतर्गत मामला दर्ज था।
मामले की पृष्ठभूमि
दशकों पहले पूर्वी दिल्ली के एक आध्यात्मिक आश्रम में हुई इस वारदात में आरोपियों ने डकैती के इरादे से दो साध्वियों की गला घोंटकर बेरहमी से हत्या की थी। कथित तौर पर आरोपियों ने आश्रम से नकदी, गहने और अन्य कीमती सामान लूट लिया था। जाँच के अनुसार, ललित मुख्य आरोपियों में शामिल था और कथित तौर पर पीड़ितों का गला घोंटने में प्रत्यक्ष रूप से संलिप्त था। लूटे गए सामान में से उसे हिस्से के रूप में कुछ नकद और गहने मिले थे।
शुरुआती जाँच में सुनील कुमार, दिलीप राम और सुशील को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन ललित फरार हो गया। उसे 26 अक्टूबर 1995 को 'घोषित अपराधी' करार दिया गया था।
32 साल तक कैसे बचता रहा आरोपी
जाँच से सामने आया कि ललित मूलतः बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है और आठवीं कक्षा तक पढ़ा है। वह शुरू में घरेलू सहायक के रूप में दिल्ली आया था और सह-आरोपियों के संपर्क में आया। अपराध के बाद वह वर्ष 2000 तक बिहार में रहा और अलग-अलग स्थानों पर काम करता रहा। इसके बाद वह फिर दिल्ली लौटा और विभिन्न मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों में पैकेजिंग लेबर के रूप में काम करने लगा।
कथित तौर पर ललित ने अपना अतीत छिपाकर रखा, लेकिन अपनी असली पहचान बरकरार रखी। उसने मई 2017 में शादी की और वह 5 वर्षीय बेटे का पिता है। गिरफ्तारी के समय वह मंगोलपुरी की एक फैक्ट्री में पैकेजिंग लेबर के रूप में काम कर रहा था।
क्राइम ब्रांच टीम का अभियान
अपराध की गंभीरता और आरोपी के लंबे समय तक फरार रहने को देखते हुए क्राइम ब्रांच सेंट्रल रेंज ने उसे पकड़ने का बीड़ा उठाया। डीसीपी/क्राइम ब्रांच हर्ष इंदोरा की देखरेख और एसीपी सतेंद्र मोहन के नेतृत्व में इंस्पेक्टर विनय कुमार के नेतृत्व वाली विशेष टीम गठित की गई। इस टीम में एसआई विकास सोलंकी, रितेश कुमार, जय कुमार, हेड कांस्टेबल गौरव और बिजेंद्र सिंह शामिल थे।
टीम ने लगातार प्रयास कर ललित के ठिकाने की जानकारी जुटाई और मंगोलपुरी फेज-II पहुँचकर उसे चुपचाप घेरकर गिरफ्तार किया। उसके आधार कार्ड से भी उसकी पहचान की पुष्टि हुई। गिरफ्तारी की सूचना तत्काल शकरपुर पुलिस स्टेशन को दी गई।
आगे की जाँच
क्राइम ब्रांच के अनुसार इस मामले में आगे की जाँच अभी जारी है। यह गिरफ्तारी उन मामलों में पुलिस की दृढ़ता का प्रमाण है, जहाँ दशकों बाद भी फाइलें बंद नहीं की गईं। गौरतलब है कि यह ऐसे मामलों की एक कड़ी में है जहाँ 'घोषित अपराधी' का दर्जा पाए व्यक्ति वर्षों तक सामान्य जीवन जीते हुए फरार रहते हैं और पुलिस की सतर्क जाँच उन्हें अंततः पकड़ लेती है।