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दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: 'ऑपरेशन कवच' में छह साल से फरार हत्या आरोपी मो. शब्बीर गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: 'ऑपरेशन कवच' में छह साल से फरार हत्या आरोपी मो. शब्बीर गिरफ्तार

सारांश

छह साल की फरारी का अंत — दिल्ली पुलिस के 'ऑपरेशन कवच' ने 2020 के जहांगीरपुरी हत्याकांड के एकमात्र बचे भगोड़े आरोपी मो. शेख शब्बीर को कंझावला से दबोचा। तकनीकी निगरानी और ह्यूमन इंटेलिजेंस के संयोग ने वह काम किया जो छह वर्षों में नहीं हो सका।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 25 सितंबर 2026 को कंझावला से मो.
शेख शब्बीर (35 वर्ष) को गिरफ्तार किया।
शब्बीर 2020 के जहांगीरपुरी हत्याकांड का मुख्य आरोपी था और लगभग छह वर्षों से फरार था।
पीड़ित सिराज अली की मौत 29 अप्रैल 2020 को मीट की कीमत को लेकर हुए विवाद के बाद हमले में हुई थी।
गिरफ्तारी 'ऑपरेशन कवच' के तहत हुई, जो गंभीर अपराधों के फरार आरोपियों को पकड़ने का विशेष अभियान है।
रेडिंग टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर पंकज ठाकरान ने किया; एसीपी अशोक शर्मा की देखरेख में ऑपरेशन हुआ।
मामले में IPC की धारा 302, 323 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज है।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 25 सितंबर 2026 को कंझावला इलाके में छापेमारी कर 2020 के जहांगीरपुरी हत्याकांड के मुख्य आरोपी मो. शेख शब्बीर (35 वर्ष) को गिरफ्तार किया। आरोपी लगभग छह वर्षों से फरार था और पकड़े जाने से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदलता रहता था। यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस के 'ऑपरेशन कवच' के तहत संभव हुई, जो गंभीर अपराधों में संलिप्त और लंबे समय से भगोड़े खतरनाक आरोपियों को पकड़ने के लिए शुरू किया गया विशेष अभियान है।

मामले की पृष्ठभूमि

29 अप्रैल 2020 को जहांगीरपुरी की झुग्गी नंबर जी-636 में 35 वर्षीय सिराज अली अपनी मीट की दुकान पर काम कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, शेख जहूर के बेटे शाह आलम से मीट की कीमत को लेकर विवाद हुआ, जो जल्द ही मारपीट में बदल गया।

शाह आलम ने कथित तौर पर अपने साथियों — मो. शेख शब्बीर, सिराज, सलीम, जहूर और शकील — के साथ मिलकर लोहे की रॉड और लकड़ी के डंडों से सिराज अली पर हमला किया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद सिराज अली की मौत हो गई। इस मामले में जहांगीरपुरी पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 323 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

ऑपरेशन कवच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया

जांच के दौरान अन्य आरोपियों को तो गिरफ्तार कर लिया गया, परंतु शब्बीर लगातार कानून की पकड़ से बाहर रहा। क्राइम ब्रांच की NR-1 इकाई के इंस्पेक्टर पंकज ठाकरान की टीम हत्या और डकैती के फरार आरोपियों की तलाश में सक्रिय थी।

ऑपरेशन के दौरान कॉन्स्टेबल अंकुश को शब्बीर के कंझावला गांव में छिपे होने की विश्वसनीय सूचना मिली। इसके बाद फील्ड वेरिफिकेशन और तकनीकी निगरानी के जरिए सूचना की पुष्टि की गई।

एसीपी अशोक शर्मा की देखरेख में इंस्पेक्टर ठाकरान के नेतृत्व में एक विशेष रेडिंग टीम बनाई गई, जिसमें एसआई भाग्यश्री, एएसआई अनिल, एएसआई सुमित, एएसआई अजय और कॉन्स्टेबल अंकुश शामिल थे। इस संयुक्त दल ने शुक्रवार को कंझावला में समन्वित छापेमारी कर शब्बीर को दबोच लिया।

आरोपी की भागने की रणनीति

पुलिस के अनुसार, शब्बीर ने लगभग छह वर्षों तक गिरफ्तारी से बचने के लिए कोई एक स्थायी ठिकाना नहीं रखा। वह बार-बार अपना निवास स्थान बदलता रहा, जिससे उसकी तलाश में जुटी पुलिस के लिए उसे ट्रेस कर पाना बेहद मुश्किल हो गया था। गौरतलब है कि इस मामले में बाकी सभी आरोपियों की गिरफ्तारी वर्षों पहले हो चुकी थी — शब्बीर ही एकमात्र फरार बचा था।

आगे की कार्रवाई

फिलहाल मो. शेख शब्बीर को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। उसे संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा, जहां IPC की धारा 302 (हत्या) सहित अन्य धाराओं के तहत मुकदमा आगे बढ़ेगा। यह गिरफ्तारी 'ऑपरेशन कवच' के तहत दिल्ली पुलिस की एक और उल्लेखनीय सफलता है, जो दर्शाती है कि तकनीकी निगरानी और ह्यूमन इंटेलिजेंस का समन्वय दीर्घकालिक फरारी को भी समाप्त कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि छिटपुट। गौरतलब है कि इस मामले में बाकी सभी आरोपी वर्षों पहले पकड़े जा चुके थे, फिर भी एक व्यक्ति का इतने लंबे समय तक फरार रहना निगरानी तंत्र में कमियों की ओर इशारा करता है। तकनीकी निगरानी और ह्यूमन इंटेलिजेंस के इस समन्वय को स्थायी तौर-तरीका बनाया जाए, तभी इस कामयाबी का असली अर्थ होगा।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मो. शेख शब्बीर को किस मामले में गिरफ्तार किया गया?
मो. शेख शब्बीर को 29 अप्रैल 2020 को जहांगीरपुरी में हुई सिराज अली की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया। मामले में IPC की धारा 302, 323 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज है।
'ऑपरेशन कवच' क्या है?
'ऑपरेशन कवच' दिल्ली पुलिस का एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य गंभीर अपराधों जैसे हत्या और डकैती में शामिल तथा लंबे समय से फरार खतरनाक अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करना है।
शब्बीर छह साल तक कैसे फरार रहा?
पुलिस के अनुसार, शब्बीर पकड़े जाने से बचने के लिए लगातार अपना निवास स्थान बदलता रहता था। उसकी इसी रणनीति के कारण छह वर्षों तक उसे ट्रेस करना मुश्किल रहा।
जहांगीरपुरी में 2020 का यह हत्याकांड कैसे हुआ था?
29 अप्रैल 2020 को झुग्गी नंबर जी-636 में सिराज अली और शाह आलम के बीच मीट की कीमत को लेकर विवाद हुआ। शाह आलम ने कथित तौर पर अपने साथियों के साथ मिलकर सिराज अली पर लोहे की रॉड और लकड़ी के डंडों से हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई।
शब्बीर की गिरफ्तारी किस टीम ने की?
गिरफ्तारी एसीपी अशोक शर्मा की देखरेख में इंस्पेक्टर पंकज ठाकरान के नेतृत्व वाली रेडिंग टीम ने की। इस टीम में एसआई भाग्यश्री, एएसआई अनिल, एएसआई सुमित, एएसआई अजय और कॉन्स्टेबल अंकुश शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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