25 सितंबर 2026
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जयशंकर ने यूएनजीए में उठाया नाविकों पर हमलों का मुद्दा, भारत-लाइबेरिया ने बनाया नया सुरक्षा समूह

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जयशंकर ने यूएनजीए में उठाया नाविकों पर हमलों का मुद्दा, भारत-लाइबेरिया ने बनाया नया सुरक्षा समूह

सारांश

यूएनजीए के मंच पर जयशंकर ने वह बात कही जो अक्सर वैश्विक बहस में पीछे रह जाती है — नाविकों की जान। ओमान की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में हाल के हमलों के बाद भारत और लाइबेरिया ने मिलकर एक नया समुद्री सुरक्षा समूह बनाया है, जो 20 लाख नाविकों की सुरक्षा के लिए देशों के बीच समन्वय का मंच बनेगा।

मुख्य बातें

विदेश मंत्री जयशंकर ने 25 सितंबर 2026 को यूएनजीए की बैठक में समुद्री जहाजों और नाविकों पर हमलों का मुद्दा उठाया।
भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त रूप से 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स' की स्थापना की।
ओमान की खाड़ी में एमवी केप डव पर हमले में एक भारतीय नाविक की मौत ; होर्मुज स्ट्रेट में एल गया टैंकर पर हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य लापता ।
विश्व व्यापार का 80% से अधिक समुद्री मार्गों से होता है; दैनिक व्यापार 140 अरब डॉलर से अधिक।
PM मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नाविकों के लिए आपातकालीन सहायता नेटवर्क का प्रस्ताव रखा था।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के इतर आयोजित एक बैठक में समुद्री व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर बढ़ते हमलों को गंभीर चिंता का विषय करार दिया। उन्होंने घोषणा की कि भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त रूप से 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स' की स्थापना की है, जो वाणिज्यिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करने का प्रयास करेगा।

हाल की घातक घटनाएँ

जयशंकर ने बताया कि बैठक से दो दिन पहले ओमान की खाड़ी में एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाले मालवाहक जहाज एमवी केप डव पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। इससे 10 दिन पहले होर्मुज स्ट्रेट में पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एल गया पर हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य लापता हो गया।

उन्होंने आगे कहा कि काला सागर में हुए दो अन्य हमलों में भी भारतीय नाविकों की जान गई है। यह ऐसे समय में आया है जब काला सागर, लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में इस वर्ष नागरिक जहाजों पर हमलों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

समुद्री व्यापार का वैश्विक महत्व

विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि विश्व का अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिदिन 140 अरब डॉलर से अधिक का है, जिसमें से 80 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है। व्यापारी जहाजों पर दुनिया भर में करीब 20 लाख नाविक कार्यरत हैं, जो लंबे समय तक परिवार से दूर रहते हुए मानसिक तनाव जैसी कठिनाइयों का सामना करते हैं।

गौरतलब है कि जहाज का झंडा और चालक दल की राष्ट्रीयता अक्सर भिन्न होती है, जिससे किसी एक देश के लिए एकल कार्रवाई करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाता है। यही कारण है कि जयशंकर ने सरकारों के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

नए समूह की भूमिका और संरचना

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यह नया मंच जहाज मालिक देशों, बड़े शिपिंग रजिस्टर वाले देशों और नाविक उपलब्ध कराने वाले देशों के लिए सहयोग का केंद्र बनेगा। उल्लेखनीय है कि भारत विश्व में नाविकों का एक प्रमुख स्रोत देश है, जबकि लाइबेरिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा शिपिंग रजिस्टर है — यह साझेदारी इसीलिए सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

उन्होंने सदस्य देशों से इस समूह की कार्यप्रणाली और भविष्य की रूपरेखा तय करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

मोदी के ब्रिक्स प्रस्ताव से जुड़ाव

जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारत की मेज़बानी में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नाविकों के लिए एक आपातकालीन सहायता नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा था। यह नेटवर्क समुद्री प्राधिकरणों और दूतावासों को जोड़कर संकट की स्थिति में चिकित्सा सहायता, परिवारों को सूचना और निकासी जैसी सुविधाएँ प्रदान करेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक समुद्री सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव बढ़ रहा है और भारत इस मुद्दे पर नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले महीनों में इस समूह की पहली औपचारिक बैठक और कार्ययोजना की घोषणा अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मालिक और चालक दल की अलग-अलग राष्ट्रीयता के चलते हमलों में ज़िम्मेदारी और राहत का अभाव। गौरतलब है कि भारत दुनिया के शीर्ष नाविक-आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है, इसलिए यह मुद्दा केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि लाखों भारतीय परिवारों की आजीविका से सीधे जुड़ा है। नया समूह तभी प्रभावी साबित होगा जब इसकी कार्ययोजना बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र पर टिकी हो, न केवल सहयोग की भावना पर।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और लाइबेरिया ने जो नया समुद्री सुरक्षा समूह बनाया है, वह क्या करेगा?
'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स' जहाज मालिक देशों, शिपिंग रजिस्टर देशों और नाविक उपलब्ध कराने वाले देशों के बीच सहयोग का मंच बनेगा। इसका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
ओमान की खाड़ी में एमवी केप डव पर हमले में क्या हुआ?
एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाले मालवाहक जहाज एमवी केप डव पर ओमान की खाड़ी में हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। यह घटना यूएनजीए बैठक से दो दिन पहले हुई।
नाविकों की सुरक्षा इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
दुनिया के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का 80% से अधिक हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है और इस पर प्रतिदिन 140 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार निर्भर करता है। विश्व भर के व्यापारी जहाजों पर करीब 20 लाख नाविक काम करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों की है।
PM मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नाविकों के लिए क्या प्रस्ताव रखा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नाविकों के लिए एक आपातकालीन सहायता नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा था। यह नेटवर्क समुद्री प्राधिकरणों और दूतावासों को जोड़कर संकट में चिकित्सा सहायता, परिवारों को सूचना और निकासी की सुविधाएँ देगा।
इस साल किन समुद्री क्षेत्रों में नागरिक जहाजों पर हमले हुए हैं?
जयशंकर के अनुसार इस वर्ष काला सागर, लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में नागरिक जहाजों पर कई हमले हुए हैं। काला सागर में हुए दो हमलों में भारतीय नाविकों की जान गई, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर एल गया पर हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य लापता है।
राष्ट्र प्रेस
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