जयशंकर ने यूएनजीए में उठाया नाविकों पर हमलों का मुद्दा, भारत-लाइबेरिया ने बनाया नया सुरक्षा समूह
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के इतर आयोजित एक बैठक में समुद्री व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर बढ़ते हमलों को गंभीर चिंता का विषय करार दिया। उन्होंने घोषणा की कि भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त रूप से 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स' की स्थापना की है, जो वाणिज्यिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करने का प्रयास करेगा।
हाल की घातक घटनाएँ
जयशंकर ने बताया कि बैठक से दो दिन पहले ओमान की खाड़ी में एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाले मालवाहक जहाज एमवी केप डव पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। इससे 10 दिन पहले होर्मुज स्ट्रेट में पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एल गया पर हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य लापता हो गया।
उन्होंने आगे कहा कि काला सागर में हुए दो अन्य हमलों में भी भारतीय नाविकों की जान गई है। यह ऐसे समय में आया है जब काला सागर, लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में इस वर्ष नागरिक जहाजों पर हमलों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
समुद्री व्यापार का वैश्विक महत्व
विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि विश्व का अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिदिन 140 अरब डॉलर से अधिक का है, जिसमें से 80 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है। व्यापारी जहाजों पर दुनिया भर में करीब 20 लाख नाविक कार्यरत हैं, जो लंबे समय तक परिवार से दूर रहते हुए मानसिक तनाव जैसी कठिनाइयों का सामना करते हैं।
गौरतलब है कि जहाज का झंडा और चालक दल की राष्ट्रीयता अक्सर भिन्न होती है, जिससे किसी एक देश के लिए एकल कार्रवाई करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाता है। यही कारण है कि जयशंकर ने सरकारों के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
नए समूह की भूमिका और संरचना
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यह नया मंच जहाज मालिक देशों, बड़े शिपिंग रजिस्टर वाले देशों और नाविक उपलब्ध कराने वाले देशों के लिए सहयोग का केंद्र बनेगा। उल्लेखनीय है कि भारत विश्व में नाविकों का एक प्रमुख स्रोत देश है, जबकि लाइबेरिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा शिपिंग रजिस्टर है — यह साझेदारी इसीलिए सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उन्होंने सदस्य देशों से इस समूह की कार्यप्रणाली और भविष्य की रूपरेखा तय करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
मोदी के ब्रिक्स प्रस्ताव से जुड़ाव
जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारत की मेज़बानी में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नाविकों के लिए एक आपातकालीन सहायता नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा था। यह नेटवर्क समुद्री प्राधिकरणों और दूतावासों को जोड़कर संकट की स्थिति में चिकित्सा सहायता, परिवारों को सूचना और निकासी जैसी सुविधाएँ प्रदान करेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक समुद्री सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव बढ़ रहा है और भारत इस मुद्दे पर नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले महीनों में इस समूह की पहली औपचारिक बैठक और कार्ययोजना की घोषणा अपेक्षित है।