डॉ. एस. जयशंकर ने 9वें हिंद महासागर सम्मेलन में सहयोग और एकता पर दिया जोर
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पोर्ट लुइस, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर एक चार दिवसीय यात्रा पर हैं, जिसके पहले चरण में उन्होंने मॉरीशस का दौरा किया। यहां, डॉ. जयशंकर ने 9वें हिंद महासागर सम्मेलन में भाग लिया और महासागर की महत्ता पर प्रकाश डाला।
जब होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है, डॉ. जयशंकर ने कहा, "इस कठिन समय में, सहयोग का विचार छोटी-छोटी बातों से बढ़कर साझा जिम्मेदारी के बड़े दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता है। हिंद महासागर हमें यह दिखाने का अवसर प्रदान करता है कि इस तरह के सहयोग से वास्तव में क्या प्राप्त किया जा सकता है। एक साथ काम करके, हम एक स्वतंत्र, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र सुनिश्चित कर सकते हैं। भारत इस दिशा में पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।"
विदेश मंत्री ने कहा, "भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में हमेशा ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाई है। चाहे मानवीय संकट हो या प्राकृतिक आपदाएं, हम तेजी और विश्वास के साथ आगे बढ़े हैं। चाहे श्रीलंका, मेडागास्कर या मोजाम्बिक में आपदा राहत ऑपरेशन हों या मॉरीशस और श्रीलंका के तटों पर तेल रिसाव का समाधान, हम इस क्षेत्र के लिए हमेशा उपलब्ध रहे हैं।"
उन्होंने एक हालिया उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि पिछले साल श्रीलंका में आए विनाशकारी तूफान दित्वाह के बाद ‘ऑपरेशन सागरबंधु’ को सफलतापूर्वक लागू किया गया। हमने न केवल तात्कालिक और बड़े पैमाने पर एचएडीआर ऑपरेशन किए, बल्कि राहत और पुनर्निर्माण के लिए 450 मिलियन डॉलर का पैकेज भी प्रदान किया।
इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन का मुख्यालय मॉरीशस में है। भारत सतत विकास, क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
डॉ. जयशंकर ने महासागर में उठने वाली चुनौतियों और होर्मुज स्ट्रेट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "हमने कई सम्मेलनों में अपने समुद्री क्षेत्र में गैर-पारंपरिक चुनौतियों पर चर्चा की है। लेकिन यह सत्य है कि हम इससे बच नहीं सकते। आज एक बड़ा संघर्ष चल रहा है जिसका प्रभाव हिंद महासागर के सभी देशों पर गहरा पड़ रहा है।"
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जब लाल सागर में शिपिंग में बाधा आई, तो उसके परिणाम सभी ने देखे। चुनौतियों का दायरा और बढ़ गया है और यह और अधिक गंभीर हो गया है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भारतीय विदेश मंत्री ने एकजुट होकर साझा प्रतिबद्धता और सहयोग पर बल दिया और कहा, "हिंद महासागर का कोई भी एकल देश, कितना भी सक्षम क्यों न हो, अकेले समुद्री क्षेत्र को बचा और सुरक्षित नहीं रख सकता। कठिनाइयों के लिए एक साझा प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। ऐसा प्रतिबद्धता जो सहयोग और पारदर्शिता पर आधारित हो और सबसे महत्वपूर्ण, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करे।"
उन्होंने आगे कहा कि हमें हिंद महासागर को एक वैश्विक संपत्ति के रूप में देखना चाहिए, जहां न केवल लाभ साझा किए जाते हैं, बल्कि अन्य जिम्मेदारियां भी साझा की जाती हैं। हमारी कोशिशों को मजबूत संस्थागत नेटवर्क के माध्यम से आगे बढ़ाना चाहिए। इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशियन रीजन (आईएफसी-आईओआर) वास्तविक समय की समुद्री जानकारी साझा करने, भागीदार देशों के बीच डोमेन जागरूकता और संचालन समन्वय बढ़ाने में मदद करता है।