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काला सागर में भारतीय नाविकों को खतरा: यूक्रेन ने जयशंकर को पत्र लिखा, रूसी हमलों पर सतर्कता की अपील

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काला सागर में भारतीय नाविकों को खतरा: यूक्रेन ने जयशंकर को पत्र लिखा, रूसी हमलों पर सतर्कता की अपील

सारांश

यूक्रेन ने काला सागर में रूसी हमलों को लेकर भारत को सीधे आगाह किया है — विदेश मंत्री सिबिहा ने जयशंकर को पत्र लिखा, भारतीय नाविकों की मौत पर संवेदना जताई और दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच शीघ्र वार्ता की उम्मीद जताई।

मुख्य बातें

यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने 27 जुलाई 2026 को काला सागर में रूसी बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों के लिए औपचारिक चेतावनी जारी की।
2025–2026 में रूसी हमलों के कारण नाविकों और व्यापारी जहाजों के क्रू सदस्यों की मौत हुई, जिनमें भारतीय नाविक भी शामिल हैं।
यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने डॉ.
जयशंकर को पत्र लिखकर सतर्कता और द्विपक्षीय वार्ता का आग्रह किया।
डीजीएमए सर्कुलर-41 ( 23 जुलाई 2026 ) के तहत भारत ने काला सागर में परिचालन करने वाले भारतीय जहाजों के लिए समुद्री सुरक्षा परामर्श पहले ही जारी किया था।
आईएमओ को 12 जून और 26 जून 2026 के सर्कुलर लेटर्स के माध्यम से औपचारिक रूप से सूचित किया गया।
यूक्रेन ने रूस पर नागरिक जहाजों पर हमले बंद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की माँग की।

यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने 27 जुलाई 2026 को काला सागर में रूसी बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले विदेशी व्यापारी जहाजों को लेकर एक औपचारिक चेतावनी जारी की है। इस बयान में भारत समेत साझेदार देशों से आग्रह किया गया है कि वे इस क्षेत्र में बिगड़ती समुद्री सुरक्षा स्थिति को लेकर तत्काल सतर्कता बरतें। यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने इस संबंध में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक पत्र भी लिखा है।

मुख्य घटनाक्रम

यूक्रेनी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, 2025–2026 के दौरान काला सागर में रूस के हमलों के कारण नाविकों, समुद्री पायलटों और व्यापारी जहाजों के क्रू सदस्यों सहित कई नागरिकों की मौत हुई है। इन हमलों में यूक्रेन के समुद्री निर्यात गलियारे का उपयोग करने वाले जहाजों और बंदरगाह अवसंरचना को भी निशाना बनाया गया है।

भारत में यूक्रेन के दूतावास ने स्पष्ट किया कि काला सागर और आज़ोव सागर में नागरिक जहाजों पर मंडराते खतरों को केवल समय पर एहतियाती चेतावनियों पर तत्काल प्रतिक्रिया देकर कम किया जा सकता है।

भारत से सीधा संपर्क

यूक्रेन ने कहा कि युद्ध के दौरान वह लगातार अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों — जिनमें भारत के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं — को रूस की कार्रवाइयों से नागरिक नौवहन पर बढ़ते खतरों के बारे में आगाह करता रहा है। साथ ही, यूक्रेन ने साझेदार देशों को उन उपायों की जानकारी दी है जो वह सैन्य सामग्री की आपूर्ति रोकने और रूस की युद्ध-समर्थक लॉजिस्टिक आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करने के लिए उठा रहा है।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (डीजीएमए) ने 23 जुलाई 2026 को सर्कुलर-41 जारी किया था, जिसमें काला सागर से गुजरने वाले भारतीय जहाजों और भारतीय नाविकों वाले विदेशी ध्वजधारी जहाजों के लिए समुद्री सुरक्षा परामर्श दिया गया है। यूक्रेन ने इस परिपत्र का संज्ञान लिया है और इसे सकारात्मक कदम बताया है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुद्दा उठाया

यूक्रेन के दूतावास ने बताया कि इन चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के मंच पर भी औपचारिक रूप से उठाया गया है। इसके तहत 12 जून और 26 जून 2026 को जारी आईएमओ सर्कुलर लेटर्स के माध्यम से सदस्य देशों को सूचित किया गया। यूक्रेन का मानना है कि नाविकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए सक्षम अधिकारियों द्वारा समय पर बचाव-उन्मुख कार्रवाई अनिवार्य है।

भारतीय नाविकों के परिवारों के प्रति संवेदना

विदेश मंत्री सिबिहा के पत्र में यूक्रेन ने उन भारतीय नाविकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है, जिन्होंने काला सागर में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के कारण अपनी जान गंवाई। यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच शीघ्र बातचीत होगी, जिसमें काला सागर की मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

आगे की राह

यूक्रेन ने स्पष्ट किया है कि समुद्री सुरक्षा को पुनर्स्थापित करने का एकमात्र दीर्घकालिक समाधान यह है कि रूस पर नागरिक जहाजों पर हमले बंद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाया जाए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-यूक्रेन संबंध कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय हैं और भारत रूस-यूक्रेन संघर्ष में संतुलित भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस कूटनीतिक संतुलन को और जटिल बनाता है। विदेश मंत्री स्तर की प्रस्तावित वार्ता यह तय करेगी कि भारत इस दबाव को किस हद तक स्वीकार करता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काला सागर में भारतीय नाविकों को किस तरह का खतरा है?
यूक्रेनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2025–2026 में रूस के हमलों के कारण काला सागर में नाविकों और व्यापारी जहाजों के क्रू सदस्यों की मौत हुई है, जिनमें भारतीय नाविक भी शामिल हैं। रूसी हमले बंदरगाह अवसंरचना और यूक्रेन के समुद्री निर्यात गलियारे का उपयोग करने वाले जहाजों को भी निशाना बना रहे हैं।
यूक्रेन ने भारत को इस मामले में क्यों लिखा?
यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर काला सागर में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर चर्चा का आग्रह किया है। यूक्रेन चाहता है कि भारत रूस पर नागरिक जहाजों पर हमले बंद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने में सहयोग करे।
डीजीएमए सर्कुलर-41 क्या है और यह भारतीय नाविकों को कैसे प्रभावित करता है?
भारत सरकार के समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (डीजीएमए) ने 23 जुलाई 2026 को सर्कुलर-41 जारी किया, जिसमें काला सागर से गुजरने या वहाँ परिचालन करने वाले भारतीय जहाजों और भारतीय नाविकों वाले विदेशी ध्वजधारी जहाजों के लिए समुद्री सुरक्षा परामर्श दिया गया है। यूक्रेन ने इस परिपत्र को सकारात्मक कदम बताया है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) की इसमें क्या भूमिका है?
यूक्रेन ने काला सागर में नागरिक जहाजों पर खतरों की जानकारी 12 जून और 26 जून 2026 को जारी आईएमओ सर्कुलर लेटर्स के माध्यम से सदस्य देशों को दी है। यह मुद्दा आईएमओ के आधिकारिक मंच पर औपचारिक रूप से उठाया जा चुका है।
आगे क्या होने की संभावना है?
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच शीघ्र बातचीत होगी, जिसमें काला सागर की सुरक्षा स्थिति पर विस्तृत चर्चा होगी। यूक्रेन का दीर्घकालिक लक्ष्य रूस पर नागरिक जहाजों पर हमले बंद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाना है।
राष्ट्र प्रेस
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