जयशंकर-सिबिहा फोन वार्ता: काला सागर में समुद्री स्वतंत्रता बहाली पर भारत-यूक्रेन की चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा के बीच 27 अगस्त 2026 को फोन पर महत्वपूर्ण वार्ता हुई, जिसमें काला सागर की बिगड़ती स्थिति और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने के उपायों पर केंद्रित चर्चा की गई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब रूसी हमलों के कारण काला सागर में व्यापारिक गतिविधियाँ गंभीर रूप से बाधित हो रही हैं और वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
सिबिहा ने वार्ता के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'मेरी भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ फोन पर बात हुई। मैंने उन्हें यूक्रेन के खिलाफ रूसी आक्रामकता और हमारे बंदरगाहों तथा समुद्री मार्गों पर बढ़ते हमलों के कारण काला सागर में पैदा हुई मुश्किल स्थिति के बारे में जानकारी दी।'
उन्होंने आगे कहा कि 'यूक्रेन के खाद्य निर्यात को बाधित करने की रूस की कोशिशें वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं। इसका असर हमारे क्षेत्र से कहीं आगे तक जाता है और दुनिया भर में लाखों परिवारों को जोखिम में डालता है।'
काला सागर में बढ़ती अस्थिरता
यह वार्ता काला सागर में हाल ही में हुए गंभीर हमलों की पृष्ठभूमि में हुई। 25 अगस्त को रूस के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसने मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें पिवदेन्नी बंदरगाह पर तीन मालवाहक जहाज और एक टैंकर निशाना बने। इसके अलावा, ओडेसा बंदरगाह पर भी एक अन्य मालवाहक जहाज पर हमला किया गया।
रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के वाणिज्यिक जहाजों, बंदरगाहों की बुनियादी सुविधाओं और ऊर्जा पाइपलाइनों पर लगातार हमले कर रहे हैं, जिससे काला सागर आर्थिक और सैन्य दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र बन गया है।
भारत की कूटनीतिक स्थिति
जयशंकर ने वार्ता के बाद कहा, 'आज शाम यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा के साथ हुई बातचीत की सराहना करता हूँ। हमारी चर्चा का मुख्य विषय काला सागर में व्यापारिक गतिविधियों की बहाली, सभी नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। भारत हमेशा संवाद और कूटनीति का दृढ़ समर्थक रहा है।'
गौरतलब है कि इसी दिन, 25 अगस्त को, जयशंकर ने मॉस्को में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भी विस्तृत बातचीत की थी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय तनाव, वैश्विक चुनौतियों और बहुपक्षीय विषयों पर चर्चा की। जयशंकर ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ व्यापक बातचीत हुई। हमने द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय तनाव वाले मुद्दों, वैश्विक चुनौतियों और बहुपक्षीय मामलों पर चर्चा की।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारत संघर्ष के दोनों पक्षों के साथ उच्च-स्तरीय संवाद बनाए रखते हुए तटस्थ कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है।
द्विपक्षीय सहयोग पर सहमति
सिबिहा ने बताया कि दोनों पक्षों ने काला सागर में 'समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता को बहाल करने और सुरक्षित बनाने' के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने यह भी बताया कि भारत और यूक्रेन के बीच द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने और आपसी हितों से जुड़े एजेंडे पर भी बात हुई, तथा दोनों पक्षों ने लगातार संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई।
आगे क्या होगा
भारत की यह कूटनीतिक सक्रियता — एक ही दिन यूक्रेन और रूस दोनों के विदेश मंत्रियों से संवाद — नई दिल्ली की उस रणनीति को रेखांकित करती है जिसमें वह युद्धरत पक्षों के बीच संभावित मध्यस्थ की भूमिका निभाने की स्थिति में बना रहना चाहता है। काला सागर में व्यापारिक आवाजाही की बहाली भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस मार्ग से होने वाला खाद्यान्न और ऊर्जा व्यापार वैश्विक कीमतों को सीधे प्रभावित करता है।