यूक्रेन और भारत के विदेश मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय सहयोग पर अहम चर्चा
सारांश
Key Takeaways
- यूक्रेन और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
- डॉ. जयशंकर ने आईएमईसी के महत्व पर बल दिया।
- सप्लाई चेन की सुरक्षा पर भी विचार किया गया।
- यूएनएससी सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
- ब्रिटेन और जर्मनी के विदेश मंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय चर्चा हुई।
नई दिल्ली, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर इस समय फ्रांस में अपने दो दिवसीय दौरे पर हैं। जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान उन्होंने अपने समकक्षों से संवाद किया। इस अवसर पर, यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहरा ने भारतीय विदेश मंत्री से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और यूक्रेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की।
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "फ्रांस में जी7 मंत्री स्तर की मीटिंग के दौरान मेरे भारतीय साथी डॉ. एस जयशंकर के साथ सकारात्मक बातचीत हुई। हमने मिडिल ईस्ट में हो रहे विकास के संदर्भ में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सप्लाई चेन के सुरक्षित संचालन के महत्व पर विचार किया। इसके साथ ही हमने आगे के संपर्कों को समन्वयित करने और द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने की अपनी इच्छा को फिर से व्यक्त किया।"
विदेश मंत्री जयशंकर ने फ्रांस में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण मजबूत व्यापार मार्ग और सुरक्षित सप्लाई चेन की आवश्यकता बढ़ गई है। सत्र के दौरान, डॉ. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि यूरोपीय यूनियन, यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफटीए) और ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौता समेत बड़े वैश्विक साझेदारियों ने आईएमईसी में महत्वपूर्ण मूल्य जोड़ा है।
शुक्रवार को, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डॉ. जयशंकर ने एक पोस्ट में लिखा, "जी 7 विदेश मंत्रियों की मीटिंग के दूसरे सत्र में बुलाए गए साझेदार के साथ आईएमईसी के बारे में विचार साझा किए। पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितताएं मजबूत व्यापार कॉरिडोर और सप्लाई चेन के लिए एक और मजबूत तर्क प्रस्तुत करती हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "साथ ही, यूरोपीय यूनियन, ईएफटीए के सदस्यों और ब्रिटेन के साथ भारत के एफटीए ने आईएमईसी के लाभ को बढ़ाया है।"
विदेश मंत्री जयशंकर ने कनेक्टिविटी पहल को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच बढ़ते उत्साह की सराहना की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया और वैश्विक दक्षिण के सामने आने वाली चुनौतियों को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, "यूएनएससी सुधारों की आवश्यकता, शांति अभियानों को सुगम बनाने और मानवीय सप्लाई चेन को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। विशेष रूप से ऊर्जा चुनौतियों, खाद्य आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में वैश्विक दक्षिण की चिंताओं को उठाया।"
इस मौके पर, उन्होंने ब्रिटेन और जर्मनी के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, "ब्रिटेन की विदेश सचिव, यवेट कूपर के साथ अच्छी बातचीत हुई, जिसमें द्विपक्षीय और वैश्विक दोनों मुद्दों पर चर्चा हुई।"
जर्मन विदेश मंत्री के साथ अपनी मीटिंग के बाद, डॉ. जयशंकर ने कहा, "जर्मन विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ हमारी हाल में बातचीत हुई।"