11 अगस्त 2026
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म्यूचुअल फंड उद्योग में जुलाई 2026: ₹2.35 लाख करोड़ का शुद्ध निवेश, एयूएम ₹85.76 लाख करोड़ के पार

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म्यूचुअल फंड उद्योग में जुलाई 2026: ₹2.35 लाख करोड़ का शुद्ध निवेश, एयूएम ₹85.76 लाख करोड़ के पार

सारांश

जुलाई 2026 में भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में ₹2.35 लाख करोड़ का शुद्ध निवेश आया और AUM ₹85.76 लाख करोड़ पर पहुँचा। डेट फंड्स में संस्थागत निवेशकों की सतर्कता और स्मॉल-कैप में खुदरा जोश — दोनों एक साथ दिखे। फोलियो संख्या 28.09 करोड़ के पार पहुँचना भारत में म्यूचुअल फंड के व्यापक होते आधार की कहानी कहता है।

मुख्य बातें

जुलाई 2026 में म्यूचुअल फंड स्कीम्स में कुल ₹2.35 लाख करोड़ का शुद्ध निवेश दर्ज हुआ।
31 जुलाई 2026 तक उद्योग का कुल AUM ₹85,75,656.52 करोड़ ; औसत AUM ₹86,33,798.38 करोड़ रहा।
डेट-ओरिएंटेड स्कीम्स में ₹1.88 लाख करोड़ का प्रवाह; लिक्विड फंड्स में अकेले ₹1,19,065.85 करोड़ आए।
इक्विटी फंड्स में ₹24,697 करोड़ ; स्मॉल-कैप फंड्स ने ₹7,767.50 करोड़ के साथ इक्विटी श्रेणी में शीर्ष स्थान पाया।
लार्ज-कैप फंड्स से ₹1,321.69 करोड़ की निकासी; ELSS से भी ₹959.13 करोड़ का आउटफ्लो।
उद्योग में कुल 28.09 करोड़ फोलियो — खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का संकेत।

भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग ने जुलाई 2026 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया — एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा मंगलवार, 11 अगस्त को जारी आँकड़ों के अनुसार, इस महीने म्यूचुअल फंड स्कीम्स में कुल ₹2.35 लाख करोड़ का शुद्ध निवेश (नेट इन्फ्लो) आया। इसके परिणामस्वरूप उद्योग का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर ₹85.76 लाख करोड़ के स्तर पर पहुँच गया।

डेट और इक्विटी — दोनों मोर्चों पर निवेश

जुलाई में निवेश प्रवाह की अगुवाई डेट-ओरिएंटेड स्कीम्स ने की, जिनमें ₹1.88 लाख करोड़ का शुद्ध निवेश दर्ज हुआ। इनमें लिक्विड फंड्स सबसे आगे रहे, जिन्होंने अकेले ₹1,19,065.85 करोड़ आकर्षित किए। ओवरनाइट फंड्स में ₹40,412.55 करोड़ और मनी मार्केट फंड्स में ₹21,180.23 करोड़ का निवेश आया — जो यह संकेत देता है कि संस्थागत और कॉर्पोरेट निवेशक अल्पकालिक विकल्पों में सक्रिय बने हुए हैं।

वहीं, इक्विटी-उन्मुख फंड्स में ₹24,697 करोड़ का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा निवेशकों का दीर्घकालिक निवेश पर भरोसा बना रहा।

इक्विटी श्रेणियों में स्मॉल-कैप अव्वल, लार्ज-कैप से निकासी

इक्विटी स्कीम्स में स्मॉल-कैप फंड्स ने सर्वाधिक ₹7,767.50 करोड़ का निवेश खींचा। इसके बाद मिड-कैप फंड्स में ₹6,192.31 करोड़ और फ्लेक्सी-कैप फंड्स में ₹4,709.08 करोड़ आए। लार्ज एंड मिड-कैप फंड्स में ₹3,425.34 करोड़ तथा मल्टी-कैप फंड्स में ₹3,227.29 करोड़ का निवेश हुआ।

हालाँकि, लार्ज-कैप फंड्स से ₹1,321.69 करोड़ की निकासी हुई। इसके अलावा ELSS स्कीम्स से ₹959.13 करोड़ और डिविडेंड यील्ड फंड्स से ₹169.16 करोड़ का शुद्ध बहिर्वाह (आउटफ्लो) दर्ज किया गया। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि निवेशक इस दौर में उच्च-जोखिम वाले विकास-उन्मुख विकल्पों की ओर झुके हैं।

हाइब्रिड और ईटीएफ का प्रदर्शन

हाइब्रिड फंड्स में कुल ₹11,490.56 करोड़ का शुद्ध निवेश आया। इनमें आर्बिट्राज फंड्स ने ₹6,502.44 करोड़ आकर्षित किए, जबकि मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स में ₹3,753.38 करोड़ का निवेश रहा।

एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में ₹9,512.05 करोड़ का निवेश आया। गोल्ड ETF में ₹1,558.75 करोड़ और इंडेक्स फंड्स में ₹1,536.60 करोड़ का शुद्ध निवेश दर्ज हुआ।

ओपन-एंडेड स्कीम्स और फोलियो संख्या का विस्तार

उद्योग में सबसे बड़ा योगदान ओपन-एंडेड स्कीम्स का रहा, जिनमें ₹2,36,595 करोड़ का शुद्ध निवेश आया और इनका कुल AUM ₹85.59 लाख करोड़ हो गया। AMFI के आँकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक उद्योग का कुल AUM ₹85,75,656.52 करोड़ रहा, जबकि जुलाई का औसत AUM ₹86,33,798.38 करोड़ दर्ज हुआ।

गौरतलब है कि 31 जुलाई 2026 तक म्यूचुअल फंड उद्योग में कुल 28.09 करोड़ फोलियो दर्ज किए गए। फोलियो संख्या की यह निरंतर वृद्धि खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण है और दर्शाती है कि म्यूचुअल फंड अब केवल संस्थागत निवेशकों तक सीमित नहीं रहा।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति पर निवेशकों की नज़र टिकी है। डेट फंड्स में भारी प्रवाह संकेत देता है कि बड़े निवेशक अभी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, जबकि स्मॉल और मिड-कैप में खुदरा रुचि भारतीय बाज़ार की दीर्घकालिक विकास कहानी में विश्वास को दर्शाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें से ₹1.88 लाख करोड़ डेट फंड्स में गया — जो मुख्यतः संस्थागत और कॉर्पोरेट धन है जो अल्पकालिक पार्किंग के लिए आता-जाता रहता है। असली कहानी इक्विटी के ₹24,697 करोड़ में है, जो खुदरा निवेशकों के दीर्घकालिक भरोसे को दर्शाता है — और यह भरोसा स्मॉल व मिड-कैप की ओर झुका है, न कि लार्ज-कैप की ओर। लार्ज-कैप से निकासी और ELSS का कमज़ोर प्रदर्शन संकेत देता है कि निवेशक अभी मूल्यांकन को लेकर सतर्क हैं। 28.09 करोड़ फोलियो का आँकड़ा उत्साहजनक है, पर यह भी देखना होगा कि इनमें से कितने सक्रिय SIP खाते हैं और कितने निष्क्रिय — क्योंकि फोलियो संख्या और वास्तविक निवेशक संख्या में अंतर होता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुलाई 2026 में म्यूचुअल फंड उद्योग में कितना निवेश आया?
AMFI के आँकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 में म्यूचुअल फंड स्कीम्स में ₹2.35 लाख करोड़ का शुद्ध निवेश (नेट इन्फ्लो) दर्ज हुआ। इसमें डेट-ओरिएंटेड स्कीम्स का हिस्सा ₹1.88 लाख करोड़ और इक्विटी फंड्स का ₹24,697 करोड़ रहा।
जुलाई 2026 में म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल AUM कितना है?
31 जुलाई 2026 तक भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल AUM ₹85,75,656.52 करोड़ (लगभग ₹85.76 लाख करोड़) रहा। जुलाई का औसत AUM ₹86,33,798.38 करोड़ दर्ज किया गया।
जुलाई 2026 में किस इक्विटी फंड श्रेणी में सबसे अधिक निवेश आया?
इक्विटी श्रेणियों में स्मॉल-कैप फंड्स ने ₹7,767.50 करोड़ के साथ सर्वाधिक निवेश आकर्षित किया। इसके बाद मिड-कैप फंड्स (₹6,192.31 करोड़) और फ्लेक्सी-कैप फंड्स (₹4,709.08 करोड़) का स्थान रहा।
जुलाई 2026 में किन म्यूचुअल फंड श्रेणियों से निकासी हुई?
लार्ज-कैप फंड्स से ₹1,321.69 करोड़ का शुद्ध बहिर्वाह हुआ। इसके अलावा ELSS स्कीम्स से ₹959.13 करोड़ और डिविडेंड यील्ड फंड्स से ₹169.16 करोड़ की निकासी दर्ज की गई।
31 जुलाई 2026 तक म्यूचुअल फंड उद्योग में कुल कितने फोलियो दर्ज हैं?
AMFI के अनुसार 31 जुलाई 2026 तक म्यूचुअल फंड उद्योग में कुल 28.09 करोड़ फोलियो दर्ज हैं। यह संख्या देश में खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और म्यूचुअल फंड के विस्तृत होते आधार को दर्शाती है।
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